दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल में आशा के हर गाने पर झूमे दर्शक

0- खचाखच भरे संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित संगीतमय कार्यक्रम दो घंटे तक दर्शकों ने आशा भोसले के हर गाने का लिया लुत्फ

रायपुर। आशा भोसले कितनी वर्सेटाइल गायिका थी, इसका उदाहरण आज फिर देखने को मिला, जब दर्शकों से खचाखच भरे महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में संगीत की हर विधा के गाने सुनने को मिले। हिंदी और मराठी के गाने ऐसे कि तालियों की गड़गड़ाहट आने वाली गायिकाओं को और भी प्रोत्साहित करती रही। 
 
 
कार्यक्रम में सुप्रिया शेष की ‘कजरा मोहब्बत वाला’ और अस्मिता कुसरे के ‘दो लफ्जों की है दिल की कहानी’ की सुरीली प्रस्तुतियों ने ऐसा माहौल बनाया कि करीब दो घंटे तक दर्शक अपनी सीटों पर जमे रहे। अंजलि कान्हे की मराठी गानों की प्रस्तुति ‘सांज ये गोकुळी’ और वैशाली जोशी की ‘रूपेरी वारूळ’ ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। 
 
 
 
आशा भोसले के गानों की बात हो और ‘जब छाए मेरा जादू’ (मंजिरी बक्षी) ‘जवानी जानेमन, हसीन दिलररूबा’ (अंकिता किरवई), ‘ये मेरा दिल प्यार का दिवाना’ (भारती पलसोदकर), ‘प्यार करने वाले प्यार करते हैं शान से’ (सुमिता रायजादा), दम मारो दम (मीना सोनी) का जिक्र न हो, ये कैसे हो सकता है। उमराव जान के गीत ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए’ को मंडल के स्व. कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर आशीष शुक्ला ने प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। 
 
 
इस तरह 21 गानों की 21 गायिकाओं की ओर से दी गई सुमधुर प्रस्तुतियों के इस कार्यक्रम को संगीतप्रेमी दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सफेद फूलों से सजे आशा भोसले की तस्वीर पर कार्यक्रम की मुख्‍य अतिथि ज्‍योति बाला नारापाराजू व विशिष्टि अतिथि चांदनी दुबे, सरिता नासरे, कुमुद लाड और कार्यक्रम के अध्‍यक्ष चेतन दंडवते ने माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन किया। साथी सभी वक्ताओं ने कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए कहा ऐसे आयोजनों से नई प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलता है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।