दिव्य महाराष्ट्र मंडल

स्वास्थ्य चिंतन शिविर में ‘सहयोग’ के सदस्यों को मिला डॉक्‍टरों का मार्गदर्शन

- महाराष्ट्र मंडल और  वरिष्‍ठ नागरिक मंच ने किया आयोजन

रायपुर। वृद्धावस्था में सबसे बड़ी समस्या हड्डियों में दर्द की होती है। घुटना, हाथ-पैर और कमर में दर्द से ज्यादातर लोग परेशान रहते है। वहीं दांतों की समस्या से भी बड़ी संख्या में लोगों को परेशान होना पड़ता है। महाराष्ट्र मंडल आयोजित स्वास्थ्य चिंतन शिविर में पहुंचे सहयोग के सदस्यों को राजधानी के तीन वरिष्ठ डॉक्‍टर सीता मेमोरियल डेंटल क्लिनिक के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सराफ, वीवाय हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद जोशी, सीएसपीडीसीएल के चिकित्सा सलाहकार डॉ. विवेक गोले का मार्गदर्शन मिला। स्वास्थ्य चिंतन शिविर का आयोजन महाराष्ट्र मंडल और  वरिष्‍ठ नागरिक मंच सहयोग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल ने स्वास्थ्य सेवा प्रकल्प की शुरूआत की। जिसके माध्यम से समय-समय में स्वास्थ्य कैंप और वाघोळीकर मेडिकल इक्यूपमेंट योजना चलाई गई। ताकि मेडिकल इमरजेंसी में लोगों को मेडिकल बेड, वाकर, चेयर आदि उपलब्ध हो सके। वहीं 2023 में एलआईसी के सहयोग से फिजियोथैरेपी सेंटर शुरू किया है। सहयोग के साथ मिलकर आज यहां स्वास्थ्य चिंतन शिविर का आयोजन भी किया गया है।  शिविर में आए तीनों वरिष्ठ डॉक्‍टर डॉ. जितेंद्र सराफ, डॉ. आनंद जोशी और डॉ. विवेक गोले का मार्गदर्शन हमारे लिए लाभकारी होगा।

दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सराफ ने कहा कि हमें हमेशा अल्ट्रा साफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं कुछ भी खाने के बाद नियमित रुप से पानी जरूर पीना चाहिए। ताकि खाने की कोई भी चीज का कोई भी कण हमारे दांतों में न फंसा रहे। छह महीने में एक बार माउथ वाश के कुल्ला जरूर करें। आमतौर पर लोगों  को दांतों में सड़न, मसूड़ों से बदबू आना, मुंह सूखना की समस्या आती है। हड्डियां कमजोर होने के कारण हमारे दांतों में गेप आ जाता है। दांत में गेप आने या दांत के टूट जाने के बाद उच्चारण में हमें तकलीफ होती है। लोग हमारी बातें अच्छे से समझ नहीं पाते है। इसलिए दांतों में दर्द होने पर डाक्टरों की सलाह जरूर लें।

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद जोशी ने कहा कि उम्र के साथ हमारे घुटनों में दर्द होता है, इसलिए हेंडल वाली कुर्सियों का इस्तेमाल करें, ताकि उठने में परेशानी न हो। बाथरूम में पर्याप्त लाइट होनी चाहिए। क्योंकि उम्र के साथ आंखों भी कमजोर हो जाती है। बाथरूम में अधिक पानी का इस्तेमाल मत कीजिए। नहाने के लिए सीटिंग शावर का इस्तेमाल करें।  उम्र के इस पड़ाव में नींद न आने बड़ी समस्या होती है। पश्चिम के देशों में सुबह के बजाए शाम को नहाने का प्रचलन है। वे लोग शाम को गुनगुने पानी में नहाते है। ताकि नींच अच्छी आए। इससे पूर्व सहयोग की अध्यक्षा अपर्णा काळेले ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम का संचालन दीपक पात्रीकर ने किया।