दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल ने शिवाजी की आरती संग मनाई गई रानी लक्ष्मी बाई की जयंती

रायपुर। खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी... बुंलेदे हर बोले के मुंह हमने सुनी कहानी थी.... शुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता सभी ने अपने बचपन में पढ़ी। यह कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक और अंर्तमन में देश प्रेम जागृत करने में सक्षम है। शुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के असाधारण साहस और बहादुरी को दर्शाती है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने रानी लक्ष्मी बाई की जयंती कार्यक्रम के अवसर पर कहीं। वहीं इससे पूर्व महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने माह के प्रत्येक 19 तारीख को होने वाली शिवाजी महाराज की आरती की।

शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मी बाई के रोचक प्रसंगों पर चर्चा करते हुए महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई में कई समानताएं थींजैसे कि दोनों मराठा साम्राज्य से संबंधित थेअपने राज्य के प्रति गहरी निष्ठा रखते थे और युद्ध और नेतृत्व कौशल में कुशल थे। दोनों ही भारत के महान नायकों में गिने जाते हैंजिन्होंने अपनी बहादुरी और कौशल से राष्ट्र के इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया है। 

इस अवसर पर मंडल के वरिष्ठ सभासद अनिल श्रीराम कालेले ने कहा कि शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक थेजबकि रानी लक्ष्मीबाई बाद के दौर में झांसी पर शासन करने वाली एक मराठी रानी थीं। दोनों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया। शिवाजी ने स्वराज्य की स्थापना की और लक्ष्मीबाई ने 'झांसी नहीं दूंगीकहकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध किया।

इस अवसर पर युवा समिति के मंडल के वरिष्ठ सदस्य अतुल गद्रे, युवा समिति के प्रमुख विनोद राखुंडे, दिव्य महाराष्ट्र मंडल वेब पोर्टल प्रभारी कुणाल दत्त मिश्रा, कार्यालय सहायक मनीष देसाई प्रमुख रुप से उपस्थित थे।