महाराष्ट्र मंडल के नव निर्वाचित अध्यक्ष, कार्यकारिणी को दिए गए प्रमाण पत्र
2026-02-01 08:41 PM
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0 मंडल की निर्वाचन नियमावली व संविधान फ्रेम करवाने योग्य: शेखर
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में हाल ही में संपन्न हुए निर्विरोध चुनाव के निर्वाचन अधिकारी शेखर राव साहेब अमीन ने कहा कि रायपुर के मंडल की न सिर्फ निर्वाचन नियमावली बल्कि समूचा संविधान इतना शानदार, स्पष्ट है कि ऐसा संविधान पूरे देश के महाराष्ट्र मंडल तो क्या, बृहन्महाराष्ट्र मंडल का भी नहीं है। अमीन रविवार को शिवाजी महाराज मिनी हॉल में नव निर्वाचित पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
अमीन ने अध्यक्ष अजय मधुकर काले सहित नई कार्यकारिणी चेतन गोविंद दंडवते, गीता श्याम दलाल, श्याम सुंदर खंगन, परितोष डोनगांवकर, नमिता शेष और मालती मिश्रा को निर्वाचन का सर्टिर्फिकेट देते हुए कहा कि नव निर्वाचित पदाधिकारियों की निस्वार्थ कार्यशैली और आजीवन सभासदों की आम सहमति के कारण यह चुनाव निर्विरोध हो पाया। उन्होंने सभी नए चुने हुए पदाधिकारियों को भावी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

इससे पहले सचिव चेतन दंडवते ने मंडल में होने वाले भावी कार्यक्रमों 15 फरवरी को लघु रुद्राभिषेक, 16 को राष्ट्रीय गौरव यात्रा सहित मार्च माह में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, होली मिलन और चैत्र नवरात्र के दौरान मंडल में संभावित पांच दिवसीय रामकथा के आयोजन को लेकर समस्त पदाधिकारियों व सभासदों को जानकारी दी और उनसे सुझाव भी मांगे।
दंडवते ने जोर देकर कहा कि शिवाजी महाराज की मां जिजाऊ बाई के मायके सिंधखेड़ से 12 फरवरी को निकलने वाली राष्ट्रीय गौरव यात्रा 16 फरवरी को रायपुर पहुंचेगी। इस भव्य आयोजन की बड़ी जिम्मेदारी हम पर होगी। इसमें बड़ी संख्या में उपस्थिति सुनिश्चित करने से लेकर यात्रा के साथ चल रहे महाराष्ट्र के 500 मेहमानों को यथासंभव सुविधाएं देने की जिम्मेदारी भी हम पर होगी। इसके लिए हमें हर तैयारी बैठक में शामिल होकर आयोजन के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निर्वहन करना है।
मंडल के लगातार नौंवी बार के अध्यक्ष बने काले ने निर्वाचन नियमावली की सविस्तार चर्चा करते हुए कहा कि यहां बैठे हर एक पदाधिकारी को इसकी जानकारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जब वे बड़े पद के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हों, तो उनकी ओर से अपनी जिम्मेदारियों के अहसास के साथ इसकी मानसिक तैयारी भी हो।
काले ने कहा कि जिस तरह अध्यक्ष व उनकी कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्षों का होता है, ठीक उसी तरह महिला केंद्र का कार्यकाल भी दो वर्षों का ही होता है। जब भी मंडल को बिना जानकारी दिए महिला केंद्र अपने स्तर पर ही संयोजिका व सह संयोजिका बदल देते हैं, तो गड़बड़ी होने की आशंका बढ़ जाती है। भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए और सभी 17 केंद्रों की नव मनोनीत अथवा नव निर्वाचित संयोजिका व सह संयाजिकाओं के नाम 31 मार्च तक महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले को मिल जाएं।