शिक्षक श्रद्धा से युक्त हो और विद्यार्थी श्रद्धालु होः पुष्पा पाध्ये
- महाराष्ट्र मंडल ने किया संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के शिक्षकों का सम्मान
- अध्यक्ष काले बोले- शिक्षक कभी रिटायर नहीं होते
रायपुर। शिक्षक धैर्यवान होने के साथ अपनी पूरी शक्तिस विद्यार्थियों के कल्याण में लगानी चाहिए। विद्यार्थियों की ग्रहण शक्ति के अनुसार उन्हें शिक्षा प्रदान करें। बदलते परिवेश के अनुसार खुद को बदलकर आधुनिक ज्ञान से अपडेट करें और बच्चों को उसका ज्ञान दें। अर्थात् एक शिक्षक को श्रद्धा से युक्त होना चाहिए। वहीं विद्यार्थियों में श्रद्धालु की भांति समर्पण का भाव होना चाहिए। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल द्वारा टाटीबंध स्थित महतारी सदन में शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में संस्कार भारती स्कूल की पूर्व प्राचार्या 82 वर्षीय पुष्पा पाध्ये ने व्यक्त किए।

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों हर वक्त इस बात का ध्यान रखना होगा कि शिक्षण कार्य एक वृत्ति अर्थात काम नहीं अपितु एक व्रत है। बच्चों के प्रथम गुरु उनके मां-बाप होते है। इसलिए औपचारिक शिक्षा व्यवस्था में हम शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों को समन्वित करते हुए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करनी होगी। तभी एक विद्यालय संस्था से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माता की भूमिका में आता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता है। वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव तक अपने ज्ञान कुंज के प्रकाश से अपने विद्यार्थियों को प्रकाशमान बनाता है। वह कभी थकता नहीं, इसलिए वह शिक्षक कहलाता है। शिक्षक यानी शि से शिखर पर ले जाने वाला, क्ष से क्षमा करने वाला और क से कमजोरी को मजबूत करने वाला।

इस अवसर पर मंडल उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, सहप्रभारी नवीन देशमुख, महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, आस्था काले, प्रवीण क्षीरसागर, प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार सहित संत ज्ञानेश्र स्कूल के शिक्षक और आंगनबाड़ी की शिक्षिकाएं उपस्थित थीं।
