दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बच्चा जितना संस्कारी, वह देश उतना समृद्ध: डा. चितरंजन कर

-  नागरिक संवाद: महाराष्ट्र मंडल में वक्‍ताओं ने ‘जेन-जी व संस्‍कार’ पर कहा- हमें ही है आत्ममंथन की जरूरत

रायपुर। एक बार स्वामी विवेकानंद की जयंती पर सत्य स्वरूपानंद जी ने कहा था, युवा वह है जो वायु की दिशा बदल दें..। आज हमारे जेन- जी भी कुछ ऐसे ही हैं। उनमें भी वायु की दिशा बदलने की शक्ति है। जरूरत है उन्हें सही दिशा देने की। सूचना बाहर से आती है और ज्ञान अंदर से। किसी देश की तस्वीर देखनी है, तो आपको बच्चों को देखना होगा। बच्चा जितना संस्कारी होगा, वह देश उतना समृद्ध होगा। उक्ताशय के विचार विचारक, चिंतक, लेखक डा. चितरंजन कर ने महाराष्ट्र मंडल में आयोजित ‘जेन-जी और संस्कार’ विषय पर आयोजित नागरिक संवाद में कहीं। बताते चलें कि नागरिक संवाद का आयोजन महाराष्ट्र मंडल की परिवार परामर्श समिति और साहित्य समिति ने किया।
 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. कर ने आगे कहा कि जेन- जी में संस्कार हैं। कुछ लोगों के कारनामों के कारण पूरे जेन-जी को हम एक ही चश्मे से नहीं देख सकते। बच्चों को उपदेश नहीं संदेश चाहिए। स्कूलों में सिर्फ 10 प्रतिशत शिक्षक और 90 प्रतिशत वेतनभोगी कार्य करते हैं। इंसान साधन से नहीं साधना से बड़ा होता है, और हमें जेन-जी को साधना का महत्व बताना होगा। डा. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ के  विचारों में हमारी पीढ़ी अपने बच्चों के लिए सुरक्षा चाहती है। फिर वह नौकरी की सुरक्षा हो या जीवन की। लेकिन वहीं जेन-जी रफ्तार चाहती है। वह समय के साथ दौड़ रही है। हमें आज खुद की समीक्षा करने की जरुरत है। जो खुद की समीक्षा नहीं करता, वह किसी की समीक्षा नहीं कर सकता।
 
हिंदी साहित्य परिषद के शशांक शर्मा ने कहा कि मेरे घर में छह जेन-जी के बच्चे हैं और मुझे यह बिल्कुल भी नहीं लगता कि जेन-जी में संस्कार की कमी है। आज के जेन-जी तर्कसंगत कार्य कर रहे है। आज वे मंदिरों की ओर लौट रहे हैं। साल 2047 के भारत की कल्पना जो जेन-जी, जेन-अल्फा ही साकार करेंगे। पैरेंटिंग कोच हर्षदा टिचकुले ने कहा कि बच्चों को अच्छे पैरेटिंग की जरूरत है। हम बच्चों को संस्कार दे नहीं रहे और उनसे 1988 वाले बच्चों के संस्कार की उम्मीद कर रहे हैं। आज बच्चों के आधुनिक उपकरण समय की जरुरत है। हमें बच्चों को समझने की जरूरत है। हमें कहा जाता था, किसी को कुछ बोलने के पहले सौ बार सोचो। लेकिन आज हमें बच्चों को कहने की जरुरत है कि कोई भी पोस्ट करने के पहले सौ बार सोचो।
 
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि संस्कार देने का काम माता-पिता और गुरु का होता है। आजादी की लड़ाई लड़ने वाले भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद उस समय के जेन-जी ही थी, उन्होंने काम को अलग तरीके से किया और इतिहास बन गए। महाराष्ट्र मंडल जेन-जी को संस्कारित करने की दिशा में श्रृंखला चलाएगा। आज के युवा को सही दिशा देने की जरूरत है और यह जिम्मेदारी हमारी है। 
 
मंडल की परिवार परामर्श समिति की समन्‍वयक व भाजपा की राज्‍य प्रवक्‍ता शताब्दी पांडे के अनुसार आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जिसे जेन-जी को पीढ़ी कहा जाता है। यह वह पीढ़ी है, जो तकनीक के साथ बड़ी हुई है, जिसके हाथ में मोबाइल है, दुनिया उसकी हथेली पर है। सूचना की गति इतनी तेज है कि आज का युवा कुछ ही सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी प्राप्त कर सकता है। समय चाहे कितना भी बदल जाए, हमारे भीतर मनुष्यता बनी रहनी चाहिए और यही हमारे संस्कार है। 
 
शिक्षाविद् और सेंट्रल जीएसटी विभाग के अधिकारी राजीव कुमार के मुताबिक युवा अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो आप उसे गलत नहीं ठहरा सकते। आज समाज में खुलापन बढ़ गया है, इसलिए युवा गोवा के बजाए मथुरा वृंदावन जैसे शहरों में जा रहे हैं, यानी हमारी एक पीढ़ी ऊपर के संस्कार उनमें दिख रहे है। हमें जेन-जी के अनुरुप खुद को बदलना होगा। कार्यक्रम का संचालन वरिष्‍ठ पत्रकार शशांक खरे और आभार प्रदर्शन साहित्य समिति की समन्‍वयक कुमुद लाड ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों साथ महाराष्ट्र मंडल की कार्यकारिणी, पदाधिकारी व सभासद उपस्थित रहे।