दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल की दुर्गा दौड़ 11 से.....मंडल की 17 महिला केंद्रों के माध्यम से होगा आयोजन

0- छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति दशहरा तक रायपुर शहर के विभिन्‍न क्षेत्रों में विभिन्‍न समितियों व महिला केंद्रों के माध्‍यम से करेगी दौड़ का आयोजन

रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल की छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति पहली बार शारदीय नवरात्रि पर भगवा ध्‍वज लेकर शिवाजी महाराज के सम्‍मान में दुर्गा दौड़ का आयोजन करेगी। रायपुर शहर के अलग- अलग क्षेत्रों में मंडल की विभिन्‍न समितियों व सभी 17 महिला केंद्रों के माध्‍यम से दुर्गा दौड़ का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी आयुवर्ग के लोग शामिल होंगे। 
श्रीशिव प्रतिष्‍ठान हिंदुस्‍तान सांगली महाराष्‍ट्र के प्रतिनिधियों के साथ मंडल के पदाधिकारियों व सभासदों के साथ हुई बैठक में इस आशय की घोषणा मंडल के अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने की। उन्‍होंने कहा कि मंडल के सभी समितियों के पदाधिकारियों, सभासदों की दौड़ में उपस्थिति रहेगी। इसमें आमजन भी भक्तिभाव के साथ शामिल हो सकेंगे। यह सारी बातें श्रीशिव प्रतिष्‍ठान हिंदुस्‍तान सांगली के प्रतिनिधि संजय तांदळे के आह्रवान के बाद कही गईं। साथ ही संजय ने एक बड़ा आह्रवान यह भी किया कि जिस तरह हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाते हैं, उसी तरह हमें पूरे जोश व उत्‍साह के साथ शिवाजी महाराज का राज्‍याभिषेक दिवस 6 जून को मनाना चाहिए। क्‍योंकि इसी दिवस से हमें अपने राष्‍ट्र की स्‍वतंत्रता के मायने समझ में आए और हमें अंग्रेजों से देश को आजाद कराने की प्रेरणा मिली। 
संजय ने कहा कि महाराष्‍ट्र के गांव- गांव से लेकर नगरों- महानगरों तक छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्‍मान में होने वाली दौड़ भगवा ध्‍वज व सुरक्षा स्वरूप दो हथियारों के साथ निकाली जाती है। आमतौर पर इसमें शिवाजी महाराज की जय, भारत मां की जय से लेकर शक्ति स्‍वरूपा देवियों के नामों की भी जयकार की जाती है। यह परंपरा का हिस्‍सा होने के कारण प्रत्‍येक नवरात्रि में इसे उत्‍साह के साथ दोहराया जाता है। अब महाराष्‍ट्र से बाहर कई राज्‍यों में इस परंपरा को आत्‍सात किया जा रहा है।   
संजय तांदळे ने कार्यकारिणी सदस्‍यों व समितियों के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम अपने देश में 12 ज्‍योर्तिलिंग के दर्शन कर पा रहे हैं, तो इसकी वजह हिंदवी स्‍वराज के संस्‍थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ही हैं। उन्‍हीं के शौर्य की वजह से हमारे 12 ज्‍योतिर्लिंग स‍मेत तमाम धार्मिक स्‍थल सुरक्षित रह पाए। यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी शिवाजी महाराज के रायगढ़ किले को 13वें ज्‍योतिर्लिंग के रूप में महत्‍व देती है और हर वर्ष लाखों  लोग उसे देखने और राष्‍ट्रप्रेम का पाठ सीखने के लिए आते हैं। 
तांदळे के अनुसार युवा पीढ़ी को शिवाजी महाराज से प्रत्‍यक्ष परिचय कराने अथवा उनके संघर्षों को भलीभांति महसूस कराने के लिए श्रीशिव प्रतिष्‍ठान हिंदुस्‍तान सांगली लगातार अनेक अभियान चला रही है। इनमें से एक युवाओं को सहयाद्री के पर्वत श्रंखला से लेकर घने जंगलों तक की बेहद जटिल परिस्थितियों में यात्रा कराने की भी है, ताकि वे करीब 375 साल पहले शिवाजी महाराज की आवाजाही वाले पहाड़ी व घने जंगलों वाले उन अघोषित मार्गों व वहां के संघर्षों को बेहतर तरीके से समझ सकें। वर्ष 1985 से शुरू हुए इस अभियान के पहले साल 150 युवाओं ने इन मार्गों का भ्रमण किया था, जबकि इस साल यह संख्‍या ढाई लाख से अधिक हो गई। 
श्रीशिव प्रतिष्‍ठान हिंदुस्‍तान सांगली के ही प्रह्लाद माने ने कहा कि आज भी हमारा हिंदू समाज स्‍वाभिमान के साथ सिर उठाकर जी रहा है, तो सिर्फ शिवाजी महाराज के कारण। प्रेरणा स्‍वरूप यदि पूरे दिन में हमने शिवाजी महाराज का स्‍मरण नहीं किया, तो कम से कम सोने से पहले हमें महाराज को याद करना चाहिए, ताकि स्वप्‍न में वे हमें जरूर दिखाई दें। ऐसा तभी संभव है कि जब बिस्‍तर पर जाने से पहले ‘शिव चरित्र’ के कम से कम चार पन्‍ने जरूर पढें। यह गुण हमारे आदत में शामिल होना चाहिए। 
श्रीशिव प्रतिष्‍ठान हिंदुस्‍तान सांगली का एक अभियान शिवाजी महाराज के इतिहास में दर्ज मित्रों, परिजनों व सैनिकों (मावळों) की समाधियों पर आमजनों को ले जाकर उस सैनिक के त्‍याग, बलिदान और शिवाजी महाराज की सेना में उनके महत्‍व व योगदान की जानकारी देने की भी है। इस अभियान के बारे में माने ने जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि इसके लिए भी बड़ी संख्‍या में ऐसे इच्‍छुक सामने आते हैं, जो उन समाधियों की देखना और अपनी भावनाएं व्‍यक्‍त करना चाहते हैं। दिखाई जाने वाले समाधियों में शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज व राजाराम महाराज से लेकर उनके प्रमुख सैनिक बाजीप्रभु देशपांडे, नानाजी मालुसरे, बहिर्जी नाइक, हंबीराव मोहिते, नेताजी पालकर, मुरार बीजी देशपांडे, जीवा महाला, कान्‍होजी जेधे, येसाजी कंक, सूरीजी मालुसरे, बाजी पासलकर की समाधियां प्रमुख हैं। 
एक लाख घरों तक पहुंचाई ‘शिव चरित्र’
संजय तांदळे ने जानकारी दी कि विख्‍यात नाटक ‘जाणता राजा’ के लेखक, प्रखर वक्‍ता बाबा साहेब पुरंदरे रचित पुस्‍तक ‘शिव चरित्र’ जब पहली बार मार्केट में आई, तो इसकी कीमत 470 रुपये थी। इतनी महंगी किताब हमारे अपेक्षानुसार घर-घर में नहीं पहुंच पाएगी, यह हमें मालूम था। वहीं हमारी संस्‍था का लक्ष्‍य शिवाजी महाराज व्‍यक्तित्‍व पर लिखी गई इस पुस्‍तक हर घर तक पहुंचाना था। हमने मूल लागत पर किताब उपलब्‍ध कराने की मांग बाबा साहेब से की। कई बैठकों व उनकी दी गई कीमतों के बाद हमें कुछ नुकसान के साथ अंतिम मूल्‍य सौ रुपये पुस्‍तक मिली। इस मूल्‍य पर हम एक लाख घरों में शिव चरित्र की प्रतियां पहुंचा चुके हैं।   
शिवाजी महाराज आयोजन समिति के प्रमुख गणेशा जाधव पाटील ने बताया कि पिछले माह संस्‍था के संस्‍थापक संभाजी भिड़े 'गुरुजी' से हुई बातचीत के आधार पर संजय तांदळे और प्रह्लाद माने का महाराष्‍ट्र मंडल में आगमन हुआ। इस मौके पर दिव्‍यांग बालि‍का विकास गृह की प्रभारी मालती मिश्रा, सखी निवास प्रभारी नमिता शेष, मुख्‍य समन्‍वयक श्‍याम सुंदर खंगन, कार्यकारिणी सदस्‍य अजय पोतदार, सियान गुडी के प्रभारी प्रवीण क्षीरसागर, समिति के समन्‍वयक अभिषेक बक्षी, रवि किरण दशपुत्रे, मंगल जाधव पाटील, वरिष्‍ठ रंगसाधक अनिल कालेले, प्रशांत देशपांडे, नवीन देशमुख सहित बड़ी संख्‍या में पदाधिकारी व सभासद उपस्थित रहे।