बच्चों को दें कैरियर चुनने की आजादीः डा. वर्षा वरवंडकर
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद और कैरियर काउंसलर डा. वर्षा वरवंडकर ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के ऊपर पढ़ाई और करियर को लेकर दबाव न डाले। यानी बच्चों को ऐसा नहीं लगना चाहिए वे उनके माता-पिता जज बने बैठे है। उनका मार्गदर्शन जरूर करें, लेकिन बच्चों को अपना कैरियर खुद चुनने की आजादी जरूर दें। जितने प्यार की जरूरत छोटे बच्चों को होती है उतनी ही बड़े बच्चों को भी होती है, इसलिए अगर आपके बच्चे बड़ी क्लासेस में पहुंच गए हैं, तो उन्हें भरपूर प्यार दें। आज हमारे पास देशभर में 250 से अधिक क्षेत्रों में कैरियर के विकल्प है। बच्चों की 75 फीसदी बातों को मानें।
डा. वर्षा वरवंडकर ने आगे कहा कि बच्चों में बढ़ते तनाव के ग्राफ को कम करने के लिए दिन में एक बार उनके साथ बैठकर भोजन अवश्य करें। इस बीच पढ़ाई को लेकर बिल्कुल बात न करें। इस दौरान बच्चों को प्रेम पूर्वक खाना खिलाए, उनकी पसंद की चीजें बनाए और हंसी मजाक से बात करें। कुछ अभिभावकों की आदत होती है खाने के समय मोबाइल फोन चलाने की। ऐसे अभिभावकों से मेरा अनुरोध है कि कम से कम खाने के टेबल में खुद को बच्चों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूर रखे।
डा. वर्षा वरवंडकर ने आगे कहा कि स्कूल प्रबंधन से उनका अनुरोध है कि कोरोना काल के बाद से बच्चों को होमवर्क वाट्सएप में दिया जा रहा है। इसे बंद करना चाहिए। मोबाइल पर वर्क आने के कारण बच्चे मोबाइल की लत की चपेट में आ रहे है। कक्षा 8वीं तक के बच्चों को डायरी में होमवर्क देना चाहिए। डाय़री में प्रापर वर्क भेजने के लिए शासन स्तर पर निर्देश जारी होने चाहिए।