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मौसम की बेरूखी से बिगड़ रही तबीयत... डॉ. भागवत ने दी सलाह... इस तरह बने रहे निरोग

रायपुर। महीना सावन का चल रहा है, लेकिन जिस तरह से मौसम की बेरूखी बनी हुई है, इससे हर वर्ग के लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। डायरिया के अलावा वायरल फीवर, पीलिया, टाइफाइड और आईफ्लू की शिकायतें भी आम हो गईं हैं। बताते चलें कि इन सबका संबंध इस मौसम में हमारे खानपान से है। बारिश में नालियों का पानी सड़कों पर बहता है , जिसमें जीवाणु होते है। जो हमारे जूते, चप्पल और कपड़ों के माध्यम से घर तक पहुंचता है। और हमारी थोड़ी से लापरवाही के कारण इसके जीवाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है।

सावन के महीने में बारिश की आस होती है, लेकिन निराशा हाथ लग रही है। मौसम की शुष्कता का असर इंसान के शरीर पर तत्काल नजर आता है। ऐसे मौसम में अतिसूक्ष्म जीवाणु हवा और पानी के माध्यम से इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके बाद वे शरीर के पोषक तत्वों के प्रभाव को कम कर इंसान को कमजोर बनाते चले जाते हैं। नतीजतन, हमें कई स्वास्थ्यगत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

लोगों को समझ भी नहीं आता कि अचानक दस्त क्यों होने लगी है, शरीर में पानी की कमी की वजह क्या है। दरअसल, यह सब उन जीवाणुओं की वजह से होता है, तो मौसम में पनपते हैं और हवा के माध्यम से इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

इन विषयों को लेकर राजधानी के प्रख्यात गैस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी डॉ. प्रकाश भागवत का कहना है कि मौसम में बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में बचकर रहना हमारी खुद की जिम्मेदारी होती है। डॉ. भागवत ने बताया कि मौसम की शुष्कता की वजह से शरीर में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। इस मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बेहतर होगा कि प्रतिदिन पानी को उबालकर सेवन करें। जरुरी नहीं कि आप गर्म पानी ही पिए, पर उबाल लेने से पानी में पलने वाले जीवाणु मर जाते हैं, जिसे छानकर आप सेवन कर सकते हैं।

वहीं डॉ. भागवत ने बाहरी खानपान, खासतौर पर जंक फूड के सेवन पर गंभीरता से ध्यान देने और उससे बचने की वकालत की है। उनका मानना है कि जंक फूड में जीवाणु की मात्रा काफी ज्यादा होती है, ऐसे में सेहत को बिगड़ने से नहीं रोका जा सकता। तो बेहतर है कि बाहर के खानपान में सावधानी बरतते हुए, घर पर बना गर्म भोजन का सेवन करें, इससे अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सकता है।