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चंद्रग्रहण विज्ञान के अनुसार खगोली घटना और भारतीय शास्त्र , दर्शन और अध्यात्मिक के लिए महत्व कारकः डा. आाशुतोष झा

डेस्क। वर्ष 2023 के पूरे साल भर में केवल एक ही ग्रहण भारत में हो रहा है । जो 28 अक्टूबर को लगेगा, इस दिन शरद पूर्णिमा भी है। माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह में आने वाली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा धरती के सबसे निकट होता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।

पुरोहित और ज्योतिषाचार्य डा. आशुतोष झा ने बताया कि विज्ञान के अनुसार यह  खगोलकीय घटना है किन्तु  भारतीय शास्त्र , दर्शन और  अध्यात्मिक जगत् से जुड़े लोगों के लिए यह उससे भी आगे बढ़कर महत्व कारक है ।  उन्होंने बताया कि चन्द्र ग्रहणदिनांक 28 अक्टूबर, शनिवार को संपूर्ण भारत में दिखाई देगा। सूतक शाम 4.5 बजे प्रारंभ होगा। स्पर्श  रात 28/29 अक्टूबर को 1:5 बजे, मध्य रात 1:44 और मोक्ष  रात 2:23 होगा। इस तरह कुल पर्वकाल- 1 घंटा 18 मिनट का होगा।

ग्रहण फल- यह चन्द्र ग्रहण मिथुन, कुम्भ और कन्या राशि के लिए लाभकारी है। अश्वनी नक्षत्र में होने के कारण और नाम राशि ( मेष राशि)  वालों को ग्रहण काल में  इष्ट का जप करने के मामले में दुराव नहीं रखना चाहिए। ग्रहण कालिक सूतक के चलते कोजागरा की समस्त विधियाँ जो रात्रि में की जानी होती है । इस दिन में अपराह्म 3:00 बजे तक में पूर्ण कर लेना अत्यधिक हितकारक है ।