ईरान युद्ध में भारत की ताकत: होर्मुज से निकले आठ भारतीय जहाज, चीन के टैंकर अब भी फंसे
2026-04-07 07:55 AM
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नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच दुनिया ने भारत की समुद्री ताकत का साक्षात् प्रदर्शन देखा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं, वहीं भारत ने अपने आठ जहाज सुरक्षित निकालकर ऊर्जा आपूर्ति की दिशा में बड़ी राहत हासिल की। जबकि चीन के लगभग 70 टैंकर अब भी वहीं अटके हुए हैं।
भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी
सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, अब तक सात भारतीय जहाज पहले ही होर्मुज से निकल चुके थे और शनिवार को ग्रीन सान्वी नामक जहाज भी सुरक्षित बाहर आ गया। इस तरह कुल आठ जहाज भारत तक पहुंचने में सफल रहे। इन जहाजों में एलपीजी और क्रूड ऑयल की भारी मात्रा थी, जिसने घरेलू ऊर्जा संकट को कुछ हद तक कम किया।
ऊर्जा आपूर्ति को मिली राहत
भारत की दैनिक एलपीजी खपत लगभग 1 लाख टन है। होर्मुज से निकले जहाजों ने करीब 2.79 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति दी, जो 2-3 दिन की जरूरत पूरी करने के बराबर है।
• शिवालिक और नंदा देवी में 92,712 टन एलपीजी था।
• पाइन गैस और जग वसंत से 92,612 टन एलपीजी पहुंचा।
• बीडब्लू टायर और बीडब्लू एल्म से 94,000 टन एलपीजी आया।
• जग लाडकी ने 80,886 टन क्रूड ऑयल मुंद्रा पोर्ट तक पहुंचाया।
मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर जैसे बंदरगाहों पर यह सप्लाई पहुंची, जिससे वाणिज्यिक क्षेत्र को राहत मिली।
भारत की रणनीतिक सफलता
ईरान युद्ध के बीच भारत ने जिस तरह से अपने जहाजों को सुरक्षित निकाला, वह उसकी कूटनीतिक और सामरिक क्षमता का प्रमाण है। घरेलू रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति का यह सहारा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करता है। सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही और 14 भारतीय जहाज भी होर्मुज से बाहर निकलेंगे।
चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें
जहां भारत ने आठ जहाज सुरक्षित निकाल लिए, वहीं चीन के लगभग 60-70 टैंकर अब भी फंसे हुए हैं। चीन सरकार ने स्वीकार किया है कि अब तक सिर्फ तीन कंटेनर ही बाहर निकल पाए हैं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि ईरान ने उसके 20 जहाजों को पास करने की अनुमति दी है, लेकिन यह दावा पूरी तरह सत्यापित नहीं हुआ। अभी तक केवल दो पाकिस्तानी जहाज कराची पहुंच पाए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने यह भी रिपोर्ट किया है कि पाकिस्तान निजी तेल-गैस जहाजों पर अपना झंडा लगाकर अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है।
ओमानी रूट की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि अब ओमानी रूट को अपनाने की संभावना बढ़ रही है। हाल ही में तीन ओमानी टैंकर इसी रास्ते से गुजरे हैं, जिससे भविष्य में अन्य जहाजों के लिए रास्ता आसान हो सकता है। भारत के लिए यह विकल्प और भी सुरक्षित साबित हो सकता है।