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रायसेन में तीन दिवसीय कृषि महाकुंभ में किसानों के लिए बहु आयामी आय के नए अवसर

नईदिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन में तीन दिन “कृषि का महाकुंभ” चलेगा, जहाँ फसल के साथ साथ डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, बकरीपालन, एफपीओ  मार्केटिंग और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका के अवसरों पर विशेष ध्यान होगा ताकि किसानों की आय के अनेक मजबूत स्तंभ तैयार हो सकें। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में बीज से बाजार और मछली से मोती तक, पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वैल्यू चेन को एक ही मंच पर जोड़ा जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले इस महोत्सव में उत्पादन, पशुपालन, प्रसंस्करण, मार्केटिंग और उद्यमिता की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ रखा जाएगा ताकि किसान खेत से लेकर बाज़ार और निर्यात तक की पूरी यात्रा को एक ही जगह समझ सकें। रायसेन का दशहरा मैदान तीन दिनों के लिए लाइव डेमो, तकनीकी सत्र, प्रशिक्षण श्रृंखला और बिज़नेस मीटिंग्स का केंद्र बनेगा, जहाँ वैज्ञानिक, स्टार्ट अप, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमी आमने सामने संवाद करेंगे।

इस उन्नत कृषि महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा राज्य सरकार की ओर से आयोजित पशुधन प्रदर्शन में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी जैसी उन्नत गाय नस्लें तथा जमुनापारी, बारबरी, सिरोही, बीटल, सोजत जैसी दुग्ध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त बकरी नस्लें प्रदर्शित की जाएँगी, वहीं कड़कनाथ जैसी विशिष्ट पोल्ट्री नस्ल किसानों को उच्च मूल्य वाली मार्केट से जोड़ने का रास्ता दिखाएगी। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के माध्यम से पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण, पोषण प्रबंधन, प्रजनन एवं नस्ल सुधार पर विशिष्ट जानकारी दी जाएगी, जिससे छोटे एवं सीमांत पशुपालकों को कम लागत में अधिक उत्पादकता के व्यावहारिक उपाय सीखने का मौका मिलेगा। डेयरी कोऑपरेटिव, चारा प्रबंधन, गोबर आधारित ऊर्जा और ऑर्गेनिक इनपुट जैसे विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि पशुधन को खेती के साथ जोड़कर चक्रीय और टिकाऊ कृषि मॉडल तैयार हो सकें।

मत्स्य विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) द्वारा बायोफ्लॉक, पुनरावर्ती एक्वाकल्चर प्रणाली (Recirculatory Aquaculture System – RAS), एक्वापोनिक्स, सजावटी मछली पालन (Ornamental Fish Culture) और मोतीपालन (Pearl Culture) के लाइव मॉडल दिखाए जाएँगे  ताकि किसान और युवाएँ कम पानी व कम स्थान में भी उच्च आय वाले आधुनिक मत्स्य मॉडलों को नज़दीक से समझ सकें। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, राष्ट्रीय मत्स्य विकास कार्यक्रम (NFDP), फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) और अन्य योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे किसान खेत के साथ तालाब, रिसाइक्लिंग टैंक या एक्वापोनिक्स यूनिट के रूप में जल आधारित उद्यम भी शुरू कर सकें और साल भर आय के नए स्रोत बन सके।

मार्केटिंग डिवीजन के तहत 50 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) भाग लेंगे, जो GI टैग चिन्नौर चावल, शरबती गेहूँ, मिलेट आधारित उत्पाद (कोदो, कुटकी), विभिन्न दालें, बेसन, सोया उत्पाद, हल्दी लहसुन मोरिंगा पाउडर, सरसों अलसी तेल, शहद, अचार, गुड़, गुड़ पाउडर, गुड़ कैंडी, मूंगफली चिक्की और तिल लड्डू जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगे, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बेहतर दाम मिल सके। 12 अप्रैल को होने वाले एफपीओ सम्मेलन में संगठन प्रबंधन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और ई ट्रेड प्लेटफॉर्म्स पर विस्तृत चर्चा होगी, ताकि छोटे किसान उत्पादक संगठन ई कॉमर्स और आधुनिक रिटेल चैनल के माध्यम से ‘लोकल टू नेशनल’ की यात्रा तेज़ी से पूरी कर सकें।

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