कर्नाटक के मांड्या में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री का सम्बोधन
देलही : परमपूज्य जगतगुरू डॉक्टर निर्मलानंदनाथ महास्वामी जी, पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय एच डी देवेगौड़ा जी, यहां के राज्यपाल थावर चंद गहलोत जी, परमपूज्य जगतगुरू स्वामी परमात्मानंद जी सरस्वती जी, केंद्र में मेरे सहयोगी एच डी कुमार स्वामी, शोभा करंदलाजे जी, कर्नाटका के नेता प्रतिपक्ष आर अशोका जी, राज्य के मंत्री एन चेलुवराय स्वामी जी, सभी पूज्य संत, अन्य सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए सभी भाईयों और बहनों।
आज मेरा मन कुछ ऐसे भावों से भरा है, जिसे शब्दों में प्रकट करना मुश्किल है। श्री काल भैरो मंदिर में दर्शन और पूजन, श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर के भव्य उद्घाटन का साक्षी बनना, ऐतिहासिक ज्वाला पीठ में समय बिताना, आध्यात्मिक ऊंचाई पर पहुंचे संतों का सान्निध्य प्राप्त करना, और अब यहां उपस्थित जनसमूह के दर्शन करना, ये अनुभव हमेशा हमेशा मेरे साथ रहेगा। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं, कि मुझे आप सभी के बीच आने का अवसर मिला। मैं आप सभी को इस अवसर की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।
कर्नाटका आना मेरे लिए बहुत प्रसन्नता की बात होती है। हर बार यहां आकर मुझे नई प्रेरणा मिलती है। लेकिन आज सक्करे नगरा मधुर मंड्या जिले का ये दौरा कई वजहों से महत्वपूर्ण है। ये धरती Sugarcane की sweetness के लिए जानी जाती है, और यहां के लोगों की बातों में वैसी ही sweetness दिखती भी है। उनका अपनापन, उनका स्वागत करने का भाव दिल को छू जाता है। मैं अक्सर कहता हूं कि कर्नाटका तत्वज्ञान और तंत्रज्ञान, दोनों में समृद्ध है। यानी दर्शन की गहराई और टेक्नोलॉजी की शक्ति, दोनों यहां मौजूद हैं। श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ जैसे आध्यात्मिक केंद्र इस महान भूमि की महान देन हैं। ये संस्था तत्वज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को दिशा देती है।
भारत, हजारों वर्षों से चलती आ रही एक जीवंत सभ्यता है। दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां परंपराएं इतनी लंबी अवधि तक निरंतर बनती रहती हैं। जब हम श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ को देखते हैं, तो हमें इस निरंतरता का साक्षात रूप दिखाई देता है। इस पवित्र मठ का इतिहास लगभग दो हजार वर्षों का है। इसकी गुरु परंपरा, इसका आध्यात्मिक दर्शन, और इसकी सेवा की परंपरा ने पीढ़ियों तक इस भूमि को समृद्ध किया है।