सब कुछ राख, बस यादें बाकी: टेढ़ी पुलिया की आग ने लखनऊ को सन्न कर दिया
2026-04-16 11:10 AM
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अचानक भड़की आग ने बदली शाम की सूरत
लखनऊ| लखनऊ के टेढ़ी पुलिया इलाके में बुधवार की शाम अभी पूरी तरह ढली भी नहीं थी कि अचानक उठी आग की लपटों ने पूरे आसमान को लाल कर दिया। कुछ ही मिनटों में रोजमर्रा की चहल-पहल से भरी झुग्गी-झोपड़ियों की बस्ती एक भयावह त्रासदी में बदल गई। देखते ही देखते आग ने करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। बस्ती में रखे लगभग 100 गैस सिलेंडर एक के बाद एक पटाखों की तरह फटने लगे, जिनकी आवाज दूर-दूर तक गूंजती रही। आग की लपटें और धुएं का घना गुबार पांच किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था, मानो शहर के दिल में कोई बड़ा जख्म उभर आया हो।
अफरा-तफरी, चीखें और बेबसी का मंजर
आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई, हर ओर चीख-पुकार और घबराहट का माहौल बन गया। कोई अपने बच्चों को बचाने में जुटा था, तो कोई घर का सामान समेटने की आखिरी कोशिश कर रहा था। लेकिन आग की रफ्तार के सामने हर कोशिश नाकाफी साबित हो रही थी। धुएं के बीच सांस लेना मुश्किल हो गया था और हर चेहरा डर और बेबसी से भरा हुआ था।
आग की शुरुआत और देरी के आरोप
बताया जा रहा है कि आग की शुरुआत शाम करीब पांच बजे एक मस्जिद नुमा झोपड़ी से हुई। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। आरोप है कि पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करने में देरी हुई और सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियां मौके पर पहुंच सकीं। इस देरी ने आग को और भी विकराल बना दिया और नुकसान कई गुना बढ़ गया।
दमकल की जंग और प्रशासन की चुनौती
आग की भयावहता को देखते हुए लखनऊ फायर ब्रिगेड की 22 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। डीजी फायर सुजीत पांडेय, पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर, जिलाधिकारी विशाख जी, एसडीआरएफ की टीम और डॉक्टरों की टीम को तुरंत बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद रात करीब 10 बजे आग पर काबू पाया। आग को और फैलने से रोकने के लिए बस्ती के आसपास बने 30 पक्के मकानों को भी खाली कराया गया, ताकि किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।
कैमरे में कैद होती टूटती जिंदगियां
मौके पर पहुंचे फोटोजर्नलिस्ट विकास यादव के लिए यह सिर्फ एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक परीक्षा बन गई। उनके कैमरे में सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि बिखरती जिंदगियों की सच्चाई कैद हो रही थी। प्लास्टिक की छतें मोमबत्ती की तरह पिघल रही थीं और टीन की चादरें आग की तपिश से कांप रही थीं। हर क्लिक के साथ दर्द और बेबसी का एक नया चेहरा सामने आ रहा था, जो इस त्रासदी की गहराई को बयां कर रहा था।
उजड़ती दुनिया और टूटते सपने
इस हादसे का सबसे ज्यादा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ा, जिनके लिए ये झुग्गियां ही उनकी पूरी दुनिया थीं। एक बुजुर्ग महिला की आंखों में सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की कमाई जलने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। वह बार-बार यही कह रही थी कि सब कुछ चला गया, कुछ भी नहीं बचा। वहीं एक छोटा बच्चा अपनी मां का दामन थामे चुपचाप आग को देख रहा था, मानो वह अभी समझ ही नहीं पा रहा कि उसकी दुनिया कैसे उजड़ गई।
आग और इंसान के बीच जंग
दमकल विभाग की गाड़ियां लगातार आग बुझाने में जुटी थीं, लेकिन आग जैसे हर कोशिश को चुनौती दे रही थी। धुएं और लपटों के बीच लोग अपने-अपने स्तर पर संघर्ष कर रहे थे। कोई बाल्टी से पानी डाल रहा था, तो कोई अपने सामान को बचाने की कोशिश में जुटा था। यह पूरा मंजर मानो इंसान और आग के बीच चल रही एक बेकाबू जंग का प्रतीक बन गया था, जहां हर कोई अपनी दुनिया बचाने की जिद में लगा था।
खामोशी में गूंजती चीखें
एक व्यक्ति अपनी जलती झोपड़ी के सामने खड़ा सब कुछ देख रहा था। उसकी आंखों में आंसू नहीं थे, शायद इसलिए क्योंकि दर्द इतना गहरा था कि आंसू भी साथ छोड़ चुके थे। जब आग की लपटें शांत हुईं, तो पीछे बचा सिर्फ राख, धुआं और एक गहरी खामोशी। लेकिन उस खामोशी में भी उन लोगों की चीखें गूंज रही थीं, जिनकी दुनिया कुछ ही पलों में उजड़ गई।
सियासी हलचल और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने जिलाधिकारी से फोन पर बात की और राहत-बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दी जाए और घायलों का तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन पर देरी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई और मौके पर अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई।
डिप्टी सीएम का दौरा और राहत की कवायद
आग लगने की सूचना मिलते ही डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी विशाख जी और पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर से बातचीत कर राहत और बचाव कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। विकास नगर सेक्टर 12 के मिनी स्टेडियम से कुछ दूरी पर करीब तीन बीघा खाली जमीन पर वर्षों से लोग झोपड़ियां बनाकर रह रहे थे, लेकिन बुधवार की शाम ने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी।
एक हादसा, जो सिर्फ खबर नहीं
यह हादसा सिर्फ एक आगजनी की घटना नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की जिंदगी का सच है, जो एक ही पल में बदल गई। जिनके पास कभी एक छत थी, अब उनके पास सिर्फ राख और यादें बची हैं। लखनऊ की इस त्रासदी ने न सिर्फ एक बस्ती को जलाया है, बल्कि इंसानी संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। अब सवाल सिर्फ राहत का नहीं, बल्कि उन जिंदगियों को फिर से बसाने का है, जो इस आग में पूरी तरह उजड़ गईं।