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‘पिनाका’ का प्रहार: भारतीय सेना का बड़ा फैसला, रूसी ‘ग्रैड’ युग का होगा अंत

बदलते युद्ध के दौर में नई ताकत का उदय
नई दिल्ली| दुनिया तेजी से बदल रही है और युद्ध का स्वरूप भी अब पहले जैसा नहीं रहा। तकनीक, सटीकता और तेज प्रतिक्रिया आज की लड़ाई के सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं। ऐसे में भारतीय सेना ने अपनी ताकत को नए स्तर पर ले जाने के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। पुराने रूसी मूल के बीएम-21 ग्रैड रॉकेट लॉन्चरों को सेवा से हटाकर अब पूरी तरह स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है। यह बदलाव सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि सोच और रणनीति का भी है।

रणनीतिक बदलाव: आत्मनिर्भरता और सटीकता की ओर बढ़ता भारत
सेना का यह फैसला आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। अब भारत विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपने ही विकसित सिस्टम पर भरोसा जता रहा है। पिनाका सिस्टम न केवल स्वदेशी है, बल्कि इसकी मारक क्षमता और सटीकता इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है। यह बदलाव युद्ध के मैदान में ‘प्रिसीजन स्ट्राइक’ यानी सटीक निशाने की क्षमता को मजबूत करेगा।

2026 तक बड़ा लक्ष्य: पिनाका रेजिमेंट्स का विस्तार
सैन्य सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना पिनाका की कुल 22 रेजिमेंट तैयार करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। लक्ष्य रखा गया है कि मध्य-2026 तक कम से कम 10 रेजिमेंट पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएं। यह विस्तार पिनाका को भारत की नई इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स की रीढ़ बना देगा और सेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।

122 मिमी प्रोजेक्ट क्यों हुआ पीछे?
दिलचस्प बात यह है कि ग्रैड सिस्टम को बदलने के लिए स्वदेशी 122 मिमी रॉकेट भी विकसित किया गया था, जिसने अपने परीक्षणों में सफलता हासिल की थी। यह रॉकेट लगभग 40 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम था। बावजूद इसके सेना ने इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया। इसकी मुख्य वजह पिनाका सिस्टम की ज्यादा ताकत, बेहतर तकनीक और लंबी दूरी तक सटीक मार करने की क्षमता है। पिनाका के 214 मिमी रॉकेट और इसके गाइडेड वेरिएंट इसे कहीं ज्यादा प्रभावी बनाते हैं।

आधुनिक युद्ध का सबक: अब सटीक वार ही असली ताकत
हाल के वैश्विक संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि अब अंधाधुंध रॉकेट दागने का दौर खत्म हो चुका है। पहले जहां बड़े इलाके में एक साथ हमला करना रणनीति हुआ करती थी, वहीं अब दुश्मन के अहम ठिकानों पर सटीक हमला ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है। आधुनिक रडार और ड्रोन तकनीक के बीच अब वही सेना मजबूत मानी जाती है जो कम संसाधनों में ज्यादा सटीक वार कर सके। इसी सोच के तहत भारतीय सेना अपनी रणनीति को नए सिरे से ढाल रही है।

लॉजिस्टिक्स का सरलीकरण: कम जटिलता, ज्यादा दक्षता
इस बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण सेना की सप्लाई चेन को सरल बनाना भी है। अभी तक सेना को अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट यानी 122 मिमी और 214 मिमी दोनों का प्रबंधन करना पड़ता था। इससे भंडारण, रख-रखाव और आपूर्ति में जटिलताएं बढ़ती थीं। पिनाका पर पूरी तरह शिफ्ट होने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और सेना ज्यादा प्रभावी ढंग से अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेगी।

पिनाका की ताकत: तेज, सटीक और घातक
पिनाका सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार और मारक क्षमता है। यह मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है, जो दुश्मन के ठिकानों को पलभर में तबाह करने की क्षमता रखता है। इसके गाइडेड वेरिएंट जीपीएस और नेविगेशन तकनीक से लैस हैं, जिससे यह 75 किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकता है। पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण यह भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाता है।

भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार भारत
भारतीय सेना का यह फैसला सिर्फ एक सैन्य बदलाव नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति का संकेत है। पिनाका के रूप में भारत ने न केवल अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि अब वह तकनीक और रणनीति दोनों में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह कदम भारत को वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में और मजबूत बना सकता है। 
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