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जनजातीय कार्य मंत्रालय, सीएसआईआर और आईजीआईबी का सिकल सेल रोग के लिए

नईदिल्ली।  जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) तथा सीएसआईआर -जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी) के सहयोग से जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अंतर्गत 14 मई 2026 को सीएसआईआर-आईजीआईबी नई दिल्ली में सिकल सेल रोग के लिए भारत की पहली स्वदेशी सीआरआईएसपीआर -आधारित जीन थेरेपी “बिरसा-101”— पर कार्यशाला का आयोजन किया।

जनजातीय गरिमा उत्सव माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन से प्रेरित विकसित भारत की यात्रा का एक महीने तक चलने वाला उत्‍सव है। इस उत्सव का पहला सप्ताह “विकास के प्रेरक के रूप में प्रौद्योगिकी” को समर्पित है, जिसमें नवाचार से होने वाले परिवर्तन तथा जनजातीय विकास और कल्याण को गति देने वाली तकनीकी उपलब्धियों पर ज़ोर दिया जाएगा।

बिरसा-101”, जिसका नाम भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में रखा गया है, भारत के उभरते जैव-प्रौद्योगिकी एवं जीनोमिक अनुसंधान तंत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पहल सिकल सेल रोग के उन्मूलन हेतु भारत सरकार की ओर से निरंतर किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाती है, क्योंकि यह रोग देश के अनेक क्षेत्रों में जनजातीय आबादी को असमान रूप से प्रभावित करता है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय कल्याण पर केंद्रित अनुसंधान, नवाचार तथा किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के अंतर्गत इस परियोजना को लगभग 3.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को बेहतर बनाने हेतु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वदेशी नवाचार के उपयोग के महत्व पर ज़ोर दिया और अंतिम छोर तक किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।

सीएसआईआर- टीकेडीएल की निदेशक श्रीमती विश्वजननी सत्तिगेरी ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) के अंतर्गत से भारत की पारंपरिक औषधीय ज्ञान प्रणालियों, विशेष रूप से जनजातीय ज्ञान परंपराओं के विशाल भंडार के संरक्षण और सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

डॉ. देबोज्योति चक्रवर्ती ने “बिरसा-101” तथा सीआरआईएसपीआर-आधारित जीन-संपादन प्रौद्योगिकियों पर एक विस्तृत तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने वर्ष 2017 से भारतीय पहल की प्रगति का विवरण प्रस्तुत करते हुए सिकल सेल रोग के लिए स्वदेशी एवं किफायती जीन-संपादन उपचार पद्धति विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया।

 

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