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120 किमी दूर बैठे दुश्मन पर सटीक प्रहार, भारतीय सेना को मिलने जा रही पिनाका LRGR की नई ताकत

नई दिल्ली| भारत की सैन्य शक्ति को एक और बड़ा स्वदेशी हथियार मिलने की तैयारी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) ने सफल परीक्षणों के बाद भारतीय सेना में शामिल होने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा लिया है। 120 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह अत्याधुनिक रॉकेट न केवल दुश्मन के ठिकानों को लंबी दूरी से निशाना बनाएगा, बल्कि युद्धक्षेत्र में भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को भी नई ऊंचाई देगा। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की मंजूरी के बाद अब इसे सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट्स में शामिल करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

सटीकता बनेगी सबसे बड़ी ताकत
पिनाका LRGR की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण सटीकता है। DRDO और आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के अनुसार परीक्षणों के दौरान इस रॉकेट ने केवल 2 से 3 मीटर का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया। इसका अर्थ है कि यह अपने निर्धारित लक्ष्य के बेहद करीब जाकर प्रहार कर सकता है। इस क्षमता के कारण भारतीय सेना सीमा पार मौजूद बंकरों, कमांड सेंटरों, हथियार भंडारों और सैनिक जमावड़ों जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को अत्यंत सटीकता के साथ निशाना बना सकेगी।

बिना नए लॉन्चर के मिलेगा बड़ा फायदा
इस प्रणाली की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए सेना को नए लॉन्चर या विशेष वाहनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही कम दूरी वाले पारंपरिक रॉकेट और नए 120 किलोमीटर रेंज वाले LRGR दोनों दागे जा सकेंगे। इससे सेना का लॉजिस्टिक बोझ कम होगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और युद्ध के दौरान ऑपरेशनल लचीलापन भी बढ़ेगा।

दुश्मन की गहराई तक पहुंचेगी मार
पिनाका LRGR को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उड़ान के दौरान लगभग 45 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचता है और फिर लक्ष्य की ओर तेजी से नीचे आता है। यह विशेषता इसे पहाड़ों, घाटियों या मजबूत संरचनाओं के पीछे छिपे ठिकानों पर भी प्रभावी हमला करने में सक्षम बनाती है। यानी दुश्मन के लिए केवल प्राकृतिक बाधाओं या किलेबंद संरचनाओं के पीछे छिप जाना अब पर्याप्त नहीं होगा।

मिशन के अनुसार बदलेगा हथियार का स्वरूप
इस रॉकेट में 110 किलोग्राम तक का वॉरहेड लगाया जा सकता है। इसकी बहुउद्देश्यीय क्षमता इसे विभिन्न प्रकार के सैन्य अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। बंकरों और मजबूत संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए PCB वॉरहेड का इस्तेमाल किया जा सकता है। बड़े इलाके में व्यापक नुकसान पहुंचाने के लिए थर्मोबैरिक वॉरहेड लगाया जा सकता है। सैनिकों के बड़े जमावड़े को निशाना बनाने के लिए क्लस्टर म्यूनिशन का उपयोग किया जा सकता है, जबकि हथियार डिपो और सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट करने के लिए हाई एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड (HEPF) वॉरहेड लगाया जा सकता है।

विदेशी विकल्पों के मुकाबले किफायती समाधान
पिनाका LRGR की तुलना अक्सर इजराइल के EXTRA रॉकेट सिस्टम से की जा रही है, लेकिन लागत के मामले में भारतीय प्रणाली कहीं अधिक किफायती साबित हो रही है। जहां विदेशी रॉकेट की कीमत लगभग 2.4 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बताई जाती है, वहीं पिनाका LRGR की अनुमानित लागत करीब 1.5 करोड़ रुपये है। कम लागत का मतलब है कि भारतीय सेना इन्हें बड़ी संख्या में शामिल कर सकती है और अपनी मारक क्षमता को व्यापक स्तर पर बढ़ा सकती है।

चांदीपुर में सफल परीक्षण से खुला रास्ता
दिसंबर 2025 में ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज से इस रॉकेट का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया था। परीक्षण के दौरान इसने 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सटीकता से भेदकर अपनी क्षमता साबित की। इसके बाद रक्षा अधिग्रहण परिषद ने परियोजना को मंजूरी दी और अब इसे सेना में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

आत्मनिर्भर भारत की रक्षा शक्ति का नया अध्याय
पिनाका LRGR केवल एक नया रॉकेट नहीं है, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है। यह स्वदेशी तकनीक पर आधारित प्रणाली देश की लंबी दूरी की हमलावर क्षमता को मजबूत करेगी और भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारतीय सेना को रणनीतिक बढ़त दिला सकती है।
 

आज जब दुनिया की सेनाएं अधिक सटीक, तेज और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की ओर बढ़ रही हैं, तब पिनाका LRGR भारत को उसी कतार में खड़ा करता है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह रॉकेट कितनी दूर तक मार कर सकता है, बल्कि यह भी है कि क्या आने वाले समय में ऐसी स्वदेशी तकनीकें भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से अजेय बना पाएंगी? 

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