सीएसआईआर - एनआईएससीपीआर और केएएमपी ने विज्ञान संचार पर कार्यशाला का आयोजन किया
नईदिल्ली। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के “एक सप्ताह एक प्रयोगशाला” कार्यक्रम के तीसरे दिन विज्ञान संचार पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां 50 से अधिक शिक्षक इस कार्यक्रम में शामिल हुए और विशेषज्ञों द्वारा विज्ञान संचार के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर में जिज्ञासा प्रशिक्षण और मानव संसाधन प्रभाग के प्रमुख, सीबी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शर्मिष्ठा बनर्जी ने अपने संबोधन में विज्ञान शिक्षकों को संबोधित करते हुए छात्रों को अंतर्विषयक विज्ञान पढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी और गणित सहित सभी विषय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और हमें इसे प्रभावी तरीके से अपने छात्रों को बताना होगा।
केएएमपी में संचालन और मूल्यांकन की प्रमुख अरिका माथुर, ने सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर और एनसीपीएल की एक पहल - नॉलेज एंड अवेयरनेस मैपिंग प्लेटफॉर्म (केएएमपी) पर बेहद रोचक प्रस्तुति प्रस्तुत की। केएएमपी का लक्ष्य छात्रों में जन्मजात प्रतिभा और कौशल को उजागर करना है और शिक्षक इस प्रयास को लेकर काफी उत्साहित दिखें।
कार्यशाला में विज्ञान संचार और नागरिकों की जिम्मेदारियों के बारे में बताते हुए सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक और 'साइंस रिपोर्टर' पत्रिका के संपादक हसन जावेद खान ने कहा, '' हमारे देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वो विज्ञान को लेकर फैली गलत और फर्जी सूचनाओं के बारे में और अधिक जागरूकता फैलाये।''
'साइंस रिपोर्टर' पत्रिका की एसोसिएट एडिटर सोनाली नागर ने शिक्षकों को लोकप्रिय विज्ञान लेखन की बारीकियों का प्रशिक्षण देते हुए एक प्रस्तुति दिखाई। कार्यशाला, हसन जावेद खान द्वारा दिए गए लोकप्रिय विज्ञान लेखन कार्य के साथ समाप्त हुई।
सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की संघटक प्रयोगशालाओं में से एक है। यह साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान और अध्ययन पर केंद्रित विज्ञान संचार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता है।