भारी उद्योग मंत्रालय की सतत विकास, स्वच्छता और कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण की दिशा में अनेक पहल
नईदिल्ली। भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) सतत विकास, स्वच्छता (स्वच्छता) और कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण से संबंधित कई पहल सक्रिय रूप से कर रहा है। मंत्रालय ने नेट-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की देश की प्रतिबद्धता के अनुरूप, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने को बढ़ावा देने तथा कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। फेम इंडिया स्कीम-II के अंतर्गत, लगभग 1,016,598 इलेक्ट्रिक वाहनों को लगभग 4,807 करोड़ रुपये की मांग प्रोत्साहन के माध्यम से समर्थन दिया गया है। इससे लगभग 26,041,426 लीटर ईंधन की बचत हुई है और पहले से ही लगभग 37,718,893 किलोग्राम कार्बन की कमी हुई है। समय के साथ आंकड़े बढ़ते रहेंगे। ईवी की बिक्री जहां 2014 में नगण्य थी, वहीं अब इसकी बिक्री कुल वाहन बिक्री का लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ये उपलब्धियाँ सतत विकास के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में इसके सक्रिय दृष्टिकोण को दिखाती हैं।
स्वच्छ और कचरा मुक्त भारत को प्रोत्साहित करने और स्वच्छता को संस्थागत बनाने के भारी उद्योग मंत्रालय के प्रयासों को जारी रखते हुए, 15 सितंबर से 30 सितंबर, 2023 तक विशेष अभियान 3.0 के प्रारंभिक चरण के दौरान लक्ष्यों की पहचान करने में बड़ी सफलता हासिल की गई है। स्क्रैप और अन्य अनावश्यक सामग्री के निपटान के बाद इस वर्ष उल्लेखनीय 5.6 लाख वर्ग फुट जगह खाली होने की आशा है। समीक्षा के लिए 65,944 फाइलों की पहचान की गई है, 33,789 फिजिकल फाइलें हटा दी जाएंगी और 5,017 इलेक्ट्रॉनिक फाइलों को अभियान के मुख्य चरण यानी 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2023 के दौरान बंद करने के लिए लिया जाएगा।
मंत्रालय की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप इसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने स्वयं को एक हरित कंपनी के रूप में स्थापित करने और व्यापार वृद्धि के लिए इसे अपनी रणनीति का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से 'हरित बीएचईएल' नामक एक पहल शुरू की है।.