किसानों तक ऋण की पहुंच को सुविधाजनक बनाने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम
नईदिल्ली। सरकार ने देश के किसानों तक ऋण की पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 7 फरवरी, 2019 के परिपत्र के माध्यम से गारंटी-मुक्त कृषि ऋण की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये कर दी। इसके अलावा, आरबीआई ने 27 जून 2014 के अपने परिपत्र के माध्यम से बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सलाह दी है कि वे अपनी ऋण मूल्यांकन प्रक्रियाओं/ऋण नीतियों में एक या अधिक क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) से क्रेडिट सूचना रिपोर्ट (सीआईआर) हासिल करने हेतु उपयुक्त प्रावधानों का समावेश करें ताकि व्यवस्था में उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऋण संबंधी निर्णय हों।
वित्तीय सेवाएं विभाग ने दिनांक 04.02.2019 के अपने पत्र के माध्यम से सभी बैंकों को छोटे एवं सीमांत किसानों की कठिनाई और वित्तीय संकट को ध्यान में रखते हुए तीन लाख रुपये तक के केसीसी/फसल ऋण के निपटारे, दस्तावेजीकरण, निरीक्षण, खाता बही शुल्क और अन्य सभी सेवा शुल्क माफ करने की सलाह जारी की है।
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना विभिन्न श्रेणी के किसानों के लिए ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करती है, जिसमें मालिक किसान, काश्तकार, बटाईदार आदि शामिल हैं। केसीसी योजना एटीएम समर्थ रूपे डेबिट कार्ड जारी करने का प्रावधान करती है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ एकमुश्त दस्तावेजीकरण, सीमा में अंतर्निहित लागत वृद्धि और सीमा के भीतर कितनी बार भी निकासी आदि की सुविधाएं शामिल हैं। केसीसी सुविधा अपने-आप में एक ओवरड्राफ्ट सुविधा है जिससे स्वीकृत सीमा तक रूपे डेबिट कार्ड के माध्यम से निकासी की जा सकती है।
जैसा कि बैंकों द्वारा भी सूचित किया गया है, फसल ऋण का मूल्यांकन भूमि क्षेत्र, उगाई गई फसलों और जिला स्तरीय तकनीकी समिति (डीएलटीसी) / राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) द्वारा तय किए गए वित्त के पैमाने के आधार पर किया जाता है। आधार कार्ड पर ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान करने संबंधी कोई दिशानिर्देश उपलब्ध नहीं है। हालांकि, खराब मौसम आदि के कारण मौजूदा केसीसी ऋणों के नए सिरे से व्यवस्थित करने के बाद, राज्य सरकार/ एसएलबीसी के निर्णय के अनुरूप, किसानों को बैंक के पात्रता मानदंडों के अनुसार आवश्यकता-आधारित ऋण लेने की अनुमति है।