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लोकरंग हमारी सांस्कृतिक धरोहर को परिचित कराने का सराहनीय प्रयासः राज्यपाल

भोपाल। लोकरंग हमारे लोक मूल्यों, कलात्मक समृद्धता को उजागर कर युवाओं और बच्चों को हमारी सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराने का सराहनीय प्रयास है। लोकरंग सबके साथ, विश्वास और प्रयासों से भारत के गौरवपूर्ण अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करेगा। उक्त बातें मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने रवीन्द्र भवन परिसर में आयोजित पाँच दिवसीय 39वें लोकरंग पर्व के शुभारम्भ अवसर पर कहीं।

राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम कला के विभिन्न स्वरूपों द्वारा नैतिक मूल्यों, मान्यताओं को संरक्षित कर हमारी सांस्कृतिक विविधताओं के भावनात्मक एकत्व को मज़बूत बनाते हैं। विविधता में एकता हमारे देश की संस्कृति है, जिसमें हजारों वर्षों की हमारी लोक संस्कृति की मान्यताएं, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन की निरंतरता का विशाल खजाना छुपा है। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विविधता सही अर्थों में हमारे देश की धरोहर है, इसका निरंतर संरक्षण और विकास सुनिश्चित करना हम सभी का कर्तव्य है।

राज्यपाल पटेल ने इस वर्ष समारोह में महान संत शिरोमणि रविदास जी का जीवन, उनकी वाणी को नृत्य-नाट्य में प्रस्तुत किये जाने, पारम्परिक बैगा समुदाय की ख्यात चित्रकार पद्मश्री सुश्री जोधइया बाई के सृजित चित्रों की प्रदर्शनी 'चित्रकथा' के संयोजन, प्रदेश गोण्ड और भील जनजाति के पारम्परिक चित्रकारों उनकी कलात्मकता के प्रदर्शन का मंच भी प्रदान किये जाने और प्रदेश एवं अन्य राज्यों के लगभग 300 पारम्परिक शिल्पियों के लिए कार्यशाला, उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का मंच उपलब्ध कराने के लिए आयोजकों की सराहना की। उन्होंने नृत्य, गायन और वादन कला रूपों की प्रस्तुतियों के साथ ही जनजातीय लोक अंचलों के व्यंजन से परिचित कराने के लिए आयोजित स्वाद मेले के आयोजन को सराहनीय बताया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति की विशेषता वसुधैव कुटुंबकम की है। हमारी संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखती है। अनेकता में एकता भारत की विशेषता है। हमारे देश में हर त्यौहार और पर्व आनंद और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। लोकरंग कार्यक्रम हमारे आनंद और उल्लास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत लगातार प्रगति के नए सोपानों को छू रहा है। देश में विभिन्न कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। हमारे देश में विभिन्न कला और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, जो अपनी विशिष्ट शैलियों के माध्यम से एक-दूसरे को जोड़े हुए हैं।

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