"पेइंग गेस्ट" में नजर आया मध्यमवर्गीय परिवार के जीवन का संघर्ष
2025-05-18 10:59 PM
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रायपुर। रंग संस्कार महोत्सव के समापन अवसर पर मंचित लेखक महेंद्र आर्य की कहानी का नाट्य रूपांतरण "पेइंग गेस्ट" एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार के जीवन, संघर्ष और रिश्तों की जटिलताओं को मार्मिक ढंग से दर्शाने में सफल नजर आई। नाटक की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने घर का एक कमरा पेइंग गेस्ट को किराए पर देते है।
परिवार के सदस्य- पिता जो एक शिप कंपनी में काम करते हैं, गृहिणी मां सुनीता और कॉलेज में पढ़ने वाले भाई-बहन कुणाल और नेहा सब मिलकर एक सामान्य जीवन जीने की कोशिश करते हैं। राहुल नाम का पेइंग गेस्ट धीरे-धीरे परिवार में घुल-मिल जाता है। लेकिन नेहा और कुणाल के दोस्त अभिमन्यु के साथ हुई एक झड़प के बाद मां सुनीता के मन में राहुल को लेकर संदेह पैदा हो जाता है।
नाटक में भावनात्मक उलझनों और संदेहों को बहुत ही स्वाभाविक तरीके से दिखाया गया है। कहानी में मोड़ तब आता है जब दादा जी का आगमन होता है और वे पूरे मामले की सच्चाई सामने लाते हैं। इसके साथ ही ड्राइवर और नौकर द्वारा की जा रही डकैती की योजना का खुलासा नाटक को एक रोमांचक मोड़ देता है। इन नाटक में भरोसे, गलतफहमी और मानवीय रिश्तों की गहराई को समझने का मौका दर्शकों को मिला। यह नाटक दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे छोटी मोटी घटनाएं हमारे जीवन में बड़े प्रभाव डाल सकती हैं और रिश्तों को दिशा दे सकती हैं।