रायपुर

न्याय की अवधारणा का प्रदेश छत्तीसगढ़... फैसलों पर मुहर लगाते मुख्यमंत्री भूपेश... खुशहाल है प्रदेश का जन-जन

रायपुर। छत्तीसगढ़ एक युवा राज्य है, जिसके गठन को महज 22 वर्ष हुए हैं। प्राकृतिक धन-संपदा, अनुकूल जलवायु और उपजाऊ जमीन से लबरेज इस प्रदेश को एक वक्त था, जब गरीब और पिछड़ा के साथ ही नक्सलगढ़ के तौर पर पहचाना जाता था। बीते 22 सालों में छत्तीसगढ़ ने प्रगति के कई सोपान तय किए हैं, तो बहुत कम समय के भीतर देश में अपनी अलग पहचान बनाने में भी सफलता हासिल की है। अब छत्तीसगढ़ को ’न्याय की अवधारणा’ वाला राज्य कहा जाता है। और इसका श्रेय प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जाता है, जिन्होंने प्रदेश के किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, चरवाहों और स्व सहायता समूह की महिलाओं के मर्म को समझा और उनके लिए न्याय योजना की नींव रखी। 

छत्तीसगढ़ आज से नहीं, बल्कि अरसे से ’धान का कटोरा’ कहला रहा है, पर उस धान की पैदावार करने वाले किसान की मेहनत को कभी वैसी सराहना नहीं मिली, जिसकी उन्हें अपेक्षा थी।  इस बात को एक किसान ही समझ सकता था। चार साल पहले जब प्रदेश का किसान मुखिया बना, तब शायद किसी ने सोचा भी नहीं था, इस बार छत्तीसगढ़ को गरीबों का मसीहा मिल गया है। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सत्ता की कमान संभालने के साथ सबसे पहला फैसला किसानों के हक में लिया और एक झटके में एक साथ 16 लाख किसानों को कर्ज से मुक्त कर दिया। यह एक ऐसा साहस था, जिसकी पुनरावृत्ति शायद ही कोई कर पाए। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के किसानों की व्यथा को समझने के साथ ही उनके बेहतर भविष्य और अच्छी आमदनी पर विचार किया। फिर एक और बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने की घोषणा कर दी। 
 

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए यह किसी दिवास्वप्न से कम तो नहीं था, लेकिन अपनी घोषणा को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धरातल पर उतारा और प्रदेश की पहली न्याय योजना जिसे ’किसान न्याय योजना’ का नाम दिया, उस पर अमल करते हुए प्रदेश के किसानों को इसका लाभ बीते चार सालों से दिया जा रहा है। वहीं अब तक जहां किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदी हो रही थी, उसे बढ़ाकर 20 क्विंटल किए जाने की भी घोषणा कर दी गई है। 

किसानों के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के गरीब भूमिहीन मजदूरों और पशुपालक वर्ग के हित पर ध्यान दिया। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ’गोधन न्याय योजना’ की नींव रखी। इस योजना के तहत सरकार ने 2 रुपए किलो गोबर खरीदने की योजना बनाई। इससे जहां पशुपालकों को लाभ मिलने लगा, तो प्रदेश के गोधन की सुरक्षा और संधारण की भी शुरुआत हो गई। जिसके बाद सीएम बघेल ने गौमुत्र के जरिए भी गरीबों को आर्थिक न्याय प्रदान करना शुरु कर दिया। 
 

छत्तीसगढ़ की ’गोधन न्याय योजना’ देश के लिए मिसाल बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से व्यक्तिगत चर्चा कर चुके हैं, तो देश के कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस योजना को लेकर छत्तीसगढ़ का अध्ययन किया है और कई प्रदेशों में इस योजना को लागू भी कर दिया गया है। 

’गोधन न्याय योजना’ की वजह से केवल पशुपालक, चरवाहे और मजदूर ही पल्लवित नहीं हो रहे हैं, बल्कि इसका लाभ स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी मिलने लगा है। सरकार पशुपालकों से जो गोबर खरीद रही है, उसका उपयोग स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट बनाने में कर रही हैं, गोबर से पेंट बनाया जा रहा है, गोबर के दिए बिक रहे हैं, तो दूसरे उपयोग भी हो रहे हैं। कुल मिलाकर जिस गोबर की कीमत नहीं थी, अब वहीं गोबर कीमती हो गया है और लोगों के लिए आर्थिक लाभ का कारण बन चुका है। जिसका श्रेय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरगामी सोच को जाता है।