रायपुर

कार्यशालाः NEP के बारे में कार्यालय स्टाफ का भी जानना जरूरी.. बच्चे पहले इनसे ही करते हैं संपर्कः आयुक्त

रायपुर। NEP (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) को लेकर  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मालवीय मिशन शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान, एकेडमिक विभाग एवं उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में  विश्वविद्यालय से संबद्ध समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्य व नोडल अधिकारी के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।  मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त डॉ संतोष कुमार देवांगन ने सभी का अभिवादन करते हुए NEP के क्रियान्वयन के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि महाविद्यालय में शिक्षकों के साथ कार्यालय स्टाफ को भी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव तथा एनईपी के संबंध में जानकारी होना आवश्यक है। क्योंकि छात्र सर्वप्रथम इन्हीं कर्मचारियों के संपर्क में आते है और जानकारियां लेते है।

उन्होंने देश-प्रदेश के शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश की प्रगति में आप सब की भागीदारी अनिवार्य है। कुछ सुदूरवर्ती महाविद्यालय के प्राचायों का उदाहरण भी प्रस्तुत किया जो इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं मंच से उनका आभार भी व्यक्त किया गया।  उन्होंने सभी से महाविद्यालय की समस्याओं से अवगत कराने कहा वहीं आश्वासन भी दिया कि आपकी समस्याओं का समाधान उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा किया जाएगा। शिक्षा एवं स्वास्थ्य के साथ  छत्तीसगढ़ अंचल  के कुछ विशेष जनजाति जिसमें कमार, मुरिया, अबूझमाड़ की संस्कृति पर भी शोध हेतु प्रोत्साहन दिया एवं आवश्यक अनुदान प्रदान करने की बात कही। उन्होंने कोरबा क्षेत्र में हाथियों से होने वाले नुकसान, सिकल सेल समस्या के समाधान, राजनांदगांव में आर्सेनिक समस्या हेतु शोध कार्य पर बल दिया। इसके साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ अंचल में विशिष्ट कार्य करने वाले महाविद्यालयों को उच्च शिक्षा विभाग से क्रमशः 10 लाख, 6 लाख एवं 4 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की बात कही।

विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि देश के सतत विकास के लिए एनईपी में इनोवेशन, रिसर्च, स्किल, और नॉलेज इन चार बातों पर विशेष बल दिया गया है। इसके लिए बाउंड्री फ्री एजुकेशन और बाउंड्री फ्री रिसर्च की बात इसमें कही गई है। उन्होंने कहा इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें धैर्य के साथ धीरे-धीरे स्टेप आगे बढ़ाना होगा और कुछ वर्षों के पश्चात हमें इसका सकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा। इस क्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय में लागू की गई नवीन योजनाएं एवं अनुदान जो शोध एवं नवाचार हेतु लागु की गई उसकी जानकारी दी।

मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रीति के सुरेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति एक दूरदर्शी रोड मैप है, इस मूर्त वास्तविकता में शिक्षक की भागीदारी है व शिक्षा के मूल ढांचे का विस्तार है। उन्होंने कहा कौशल विकास और सतत मूल्यांकन पर चर्चा हेतु यह कार्यशाला आयोजित है जिसमें यह महती भूमिका निभाएगा। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अम्बर व्यास ने कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन समय की मांग है ताकि विभिन्न तरह के कौशल एवं गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। इसके साथ-साथ इसकी चुनौतियों समस्याओं की समीक्षा आवश्यक है जिसमें यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण योगदान देगा।