RTO के ई-चालान के नाम पर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, APK फाइल भेजकर लगाते थे चूना, रायपुर पुलिस ने…
2026-02-12 01:41 PM
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रायपुर|। राजधानी रायपुर की विधानसभा थाना पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए राजस्थान में बैठकर देशभर में ठगी करने वाले साइबर गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान राजस्थान निवासी पृथ्वी कुमार बिश्नोई उर्फ राहुल और नरसिंह सिंह के रूप में हुई है। पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, विधानसभा थाना क्षेत्र निवासी धर्मेंद्र सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर “RTO e-challan” के नाम से एक एसएमएस प्राप्त हुआ। एसएमएस में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से 4.52 लाख रुपए की राशि कट गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक 8/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(डी) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया। गूगल, बैंक, मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों तथा टेलीग्राम से प्राप्त डिजिटल इनपुट्स के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की गई। इसके बाद रायपुर पुलिस की टीम ने राजस्थान में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे यूट्यूब और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “Task Complete”, “Instant Bonus”, “Referral Bonus” जैसे आकर्षक ऑफर दिखाकर लोगों को Winmate और Wingo जैसे फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे। ये ऐप प्ले स्टोर या किसी अधिकृत ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते थे।
पुलिस के अनुसार, जैसे ही यूजर इन फर्जी ऐप्स को इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल से बड़ी संख्या में धोखाधड़ी वाले एसएमएस भेजे जाने लगते थे। इन एसएमएस में हैकिंग लिंक होते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता, उसका मोबाइल हैक हो जाता और आरोपी बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कर लेते थे।
ठगी की रकम को इस तरह लगाते थे ठिकाने
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ठगी की रकम को ट्रेसिंग से बचाने के लिए वे Swiggy और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। ठगी से प्राप्त रकम से विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पतों पर सामान मंगवाया जाता था, जिससे लेन-देन की वास्तविक प्रकृति छिपी रहे।