“विश्व पृथ्वी दिवस पर विज्ञान, कौशल और उद्यमिता का प्रेरक संगम”
रायपुर। रायपुर विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) के अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान एवं जल संसाधन प्रबंधन अध्ययनशाला में 22 अप्रैल को उत्साह, ज्ञानवर्धन और रचनात्मक ऊर्जा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभागीय शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य संस्थानों के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं आम नागरिक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और प्रदर्शनी का लाभ उठाया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र पटेल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्हें उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने तथा विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास, आंतरिक संरचना तथा मानव समाज के लिए उपयोगी संसाधनों का सजीव एवं वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण किया। इसमें औद्योगिक खनिज, रत्न खनिज, जल संपदा, भूजल संरक्षण, पर्यावरण भूविज्ञान तथा खनिज एवं भूजल सर्वेक्षण में GIS के उपयोग को सरल रूप में समझाया गया। साथ ही भूभौतिकी तकनीकों, शोध उपकरणों, आधुनिक स्वचालित यंत्रों एवं उपग्रह आधारित भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विधियों का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।
भूविज्ञान म्यूजियम में भारत के विभिन्न चट्टानों, खनिजों एवं महत्वपूर्ण जीवाश्मों के समृद्ध नमूनों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। रॉक वर्कशॉप के माध्यम से चट्टानों की पहचान एवं अध्ययन की व्यावहारिक प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई, जिससे आगंतुकों को विषय की गहन समझ प्राप्त हुई।
विशेष आकर्षण के रूप में विभाग के B.Voc. Gem & Jewellery Industry Professional कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने अपनी व्यावसायिक दक्षता का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान रत्न तराश (Gem Cutting) की लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन, आधुनिक उपकरणों द्वारा रत्नों की पहचान, आभूषण निर्माण कला (Jewellery Making) की प्रक्रिया का प्रदर्शन तथा बहुमूल्य एवं अर्द्ध-कीमती रत्नों के नमूनों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही विभिन्न पारंपरिक आभूषण निर्माण कलाओं-जैसे कुंदन, पोलकी, मीनाकारी, थीवा, टेंपल ज्वेलरी एवं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी आभूषण-का परिचय एवं उनकी निर्माण तकनीकी विशेषताओं को बताते हुए रत्न-आभूषण उद्योग में रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसरों की जानकारी भी प्रदान की गई।
यह आयोजन पृथ्वी एवं उसके संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभागाध्यक्ष डॉ. के. आर. हरी, डॉ. निनाद बोधंकर, डॉ. विकास स्वर्णकार, डॉ. कोरसा मुन्ना, श्री अंशुमन बेहेरा एवं B.Voc. कार्यक्रम के प्रभारी फैकल्टी श्री एस. एस. पंडित सहित विभाग के समस्त कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं का अभूतपूर्व योगदान रहा।