दुधाधारी मठ जमीन विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, राज्य सरकार को नोटिस जारी
2026-07-04 08:24 AM
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रायपुर। जिले में अंतरराज्यीय बस स्टैंड के लिए दुधाधारी मठ की जमीन के बदले वैकल्पिक जमीन देने के लंबे समय से लंबित मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। दुधाधारी मठ ट्रस्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। यह पूरा मामला रावणभाठा क्षेत्र में अंतरराज्यीय बस स्टैंड के निर्माण से जुड़ा है, जिसके लिए करीब 30 एकड़ जमीन दुधाधारी मठ ट्रस्ट से ली गई थी। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन सरकार और मठ प्रबंधन के बीच हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी थी कि जमीन के बदले नवा रायपुर में वैकल्पिक भूमि दी जाएगी और बस स्टैंड परिसर में बनने वाले कॉम्प्लेक्स की कुछ दुकानें भी मठ को आवंटित की जाएंगी।
बताया जाता है कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और मठ के प्रमुख महंत रामसुंदर दास के बीच कई दौर की चर्चा के बाद समझौता हुआ था। इसके बाद मठ ने अपनी जमीन सरकार को सौंप दी, लेकिन बदले में जमीन देने की प्रक्रिया समय के साथ आगे नहीं बढ़ सकी। सूत्रों के अनुसार, बाद में नवा रायपुर में जमीन आवंटन पर सहमति तो बनी, लेकिन प्रक्रिया कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इस मुद्दे को लेकर प्रयास होते रहे, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इस दौरान बस स्टैंड निर्माण कार्य भी बीच-बीच में प्रभावित हुआ। बाद में इसके नामकरण को लेकर भी विवाद सामने आया। जिसके बाद इसका नाम दुधाधारी मठ ट्रस्ट से जोड़ा गया।।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने समय-समय पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर जमीन आवंटन की मांग उठाई। इसमें विधानसभा स्तर पर भी चर्चा हुई और तत्कालीन मंत्रियों ने आश्वासन दिया, लेकिन ठोस परिणाम नहीं मिला। वर्तमान में ट्रस्ट का आरोप है कि समझौते के तहत बस स्टैंड परिसर में दुकानें देने की बात तय थी, लेकिन वास्तविक स्थिति में केवल कुछ ही दुकानों का क्रियान्वयन हो सका।
ट्रस्ट का कहना है कि बाद में जब बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू हुई तो वास्तविकता सामने आई कि निर्धारित संख्या में दुकानें पूरी तरह अस्तित्व में नहीं थीं। इन सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई में सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। यह मामला न केवल प्रशासनिक समझौते से जुड़ा है बल्कि वर्षों से लंबित भूमि आवंटन और विकास परियोजना से भी संबंधित है।