रायपुर

मिथ्या चारित्र, ख्याति, पूजा और लाभ की चाहत ही संसार के दुखों का मूल कारण: मुनि श्री आगम सागर जी महाराज

रायपुर। संत शिरोमणि चर्याशिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं वर्तमाचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से उनके आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ का पावन 'समयोपदेश वर्षायोग 2026' श्री दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ, बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में भक्तिभाव के साथ संपन्न हो रहा है। 18 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात् रायपुर जैन समाज को पूज्य मुनि संघ के सानिध्य में धर्म-गंगा में स्नान करने का यह दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ है।

समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अध्यक्ष, ट्रस्टी गण नरेंद्र जैन गुरुकृपा,प्रभात जैन,सनत जैन, भरत जैन,संजय जैन,संजय नायक,दिलीप जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि आज 3 सितंबर गुरुवार को प्रातःकालीन धर्मसभा में पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने 'छह ढाला' की तीसरी ढाल एवं तत्त्वार्थ सूत्र की कक्षा में संगोष्ठी लेते हुए मिथ्या चारित्र और आत्म-कल्याण के मार्ग पर ओजस्वी मंगल देशना दी।

मुनि श्री ने प्रवचन में बताया कि ख्याति, पूजा और लाभ की लालसा ही मिथ्या चारित्र है। इसी मिथ्या चारित्र के कारण जीव बार-बार इस संसार चक्र में जन्म लेकर असीम कष्ट भोगता है। आत्मा का वास्तविक हित सच्चा सुख प्राप्त करने में है, और सच्चा सुख वही है जो आकुलता से रहित हो। पूज्य मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि संसार के समस्त सुखों में आकुलता जुड़ी हुई है। चाहे मनुष्य गति हो, देव गति हो या पशु गति, आकुलता हर जगह विद्यमान है। केवल मोक्ष मार्ग ही एक ऐसा मार्ग है जो पूर्णतः आकुलता से रहित है। सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र ही मुक्ति की मंजिल तक पहुँचने के एकमात्र साधन हैं। पंचम काल की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहा कि पूर्व में मनुष्य की आयु 120 वर्ष मानी जाती थी, जो अब निरंतर घट रही है और आने वाले समय में और भी कम हो जाएगी। समय निरंतर कम हो रहा है, इसलिए जीव को शीघ्र ही सही मार्ग चुन लेना चाहिए। रास्ता सही होना चाहिए, गति भले ही कम या अधिक हो, यदि दिशा सही है तो मंजिल अवश्य प्राप्त होगी।

प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम में आज प्रातः 7:30 बजे मूलनायक भगवान जी का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य त्रिकाल चौबीसी में प्रतिमा जी विराजमान करने वाले पुण्यार्जक परिवार सी.ए. विनय कुमार जैन, श्रीमती सरोज जैन, अदिश जैन, श्रीमती अंजना जैन एवं आनवी जैन परिवार (अमलीडीह, रायपुर) को प्राप्त हुआ। वहीं मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य विमल कुमार जैन, श्रीमती सुषमा जैन एवं  अंशुल जैन परिवार को मिला।

प्रातः 8:00 बजे मुनि श्री आगम सागर जी महाराज द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र एवं छह ढाला की कक्षा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्वाध्याय का लाभ लिया। प्रातः 9:30 बजे नवधाभक्ति के साथ मुनि संघ को आहारदान कराने का परम सौभाग्य पुण्यार्जक परिवारों को प्राप्त हुआ: मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज को आहारदान का सौभाग्य श्रीमती प्रज्ञा माधव जैन (जैन बाड़ा) को मिला। मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज को आहारदान कराने का सौभाग्य रोशनी दीदी एवं शौर्य दीदी (बाबूलाल टॉकीज परिवार, मंदिर कार्यालय के सामने) को प्राप्त हुआ। एलक श्री धैर्य सागर जी महाराज को आहारदान का सौभाग्य श्रीमती पुष्पादेवी बंशीलाल जैन (जैन बाड़ा) को मिला। एलक श्री स्वागत सागर जी महाराज को आहारदान कराने का सौभाग्य श्रीमती रीता निर्मल जैन, श्रीमती आशु नीरज जैन (अलका रेस्टोरेंट परिवार, निज निवास गणेश राम नगर) को प्राप्त हुआ।

सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर एवं श्री दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति ने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से भावभरा आह्वान किया है कि 18 वर्षों के पश्चात प्राप्त हुए इस दुर्लभ अवसर को व्यर्थ न जाने दें। सांसारिक व्यस्तताओं के बीच अपनी आत्मा के कल्याण हेतु समय निकालें और प्रतिदिन अपने पूरे परिवार के साथ मंदिर जी पहुँचकर जिन-वाणी, स्वाध्याय, आरती एवं गुरु-सेवा का पुण्यार्जन करें।