एम्स रायपुर में कुष्ठ रोग और माइसेटोमा के निदान एवं उपचार पर विशेषज्ञ मंथन
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के त्वचा रोग विभाग द्वारा कुष्ठ रोग और माइसेटोमा के निदान एवं प्रबंधन पर केंद्रित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय त्वचा रोग, रतिज रोग एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ संघ (आईएडीवीएल) अकादमी ने छत्तीसगढ़ राज्य शाखा और एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के सहयोग से इस कार्यक्रम का संचालन किया। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग, माइसेटोमा सहित अन्य उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के निदान, नैदानिक मूल्यांकन और उपचार के संबंध में चिकित्सकों के ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. एली महापात्रा, जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेणुगा पी.एस.एस., आईएडीवीएल छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल तथा एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली उपस्थित रहे।
वैज्ञानिक सत्रों में कुष्ठ रोग और माइसेटोमा के निदान तथा उपचार से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कुष्ठ रोग में तंत्रिका संवहन परीक्षण, रोग के कारण होने वाली दिव्यांगता के प्रबंधन के लिए उपयुक्त स्प्लिंट का चयन, नमूना संग्रह की तकनीक और माइसेटोमा के निदान में ऊतक विकृति विज्ञान (हिस्टोपैथोलॉजी) की भूमिका पर व्याख्यान दिए। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में कुष्ठ रोग उपचार के इतिहास, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम तथा कुष्ठ रोग नियंत्रण में निजी चिकित्सकों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इन सत्रों में डॉ. नील प्रभा, डॉ. सरवाना सुक्रिया एस., डॉ. जयदीप नंदी, डॉ. अर्चना केचे, डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. डेविड हेनरी और डॉ. संदीप एस. जोगदंड ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया। जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर की डॉ. रेणुगा पी.एस.एस. ने कुष्ठ रोग एवं माइसेटोमा के प्रबंधन पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन किया। वहीं, डॉ. भव्य स्वर्णकार ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी आयोजित की।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए 80 से अधिक चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों को अपने नैदानिक अनुभव साझा करने, रोगों की पहचान में आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा करने तथा प्रभावी उपचार के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का नेतृत्व आयोजन अध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली और आयोजन सचिव डॉ. नील प्रभा ने किया। आयोजन में आईएडीवीएल छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल तथा सचिव डॉ. राकेश पटेल का भी सहयोग रहा।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर कुष्ठ रोग, माइसेटोमा और अन्य उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के प्रभावी निदान एवं प्रबंधन के लिए निरंतर चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञों के बीच समन्वय और ज्ञान के नियमित आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया गया।