छत्तीसगढ़ में अधूरी सड़कों का काम पकड़ेगा रफ्तार; कैबिनेट ने दी करोड़ों की राहत
2026-10-28 08:20 AM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण, नवीनीकरण और मरम्मत के लंबित कार्यों को गति देने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद् ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। डामर (बिटुमिन) की कीमतों में हुई असाधारण वृद्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े अनुबंधकों को मूल्य राहत यानी क्षतिपूर्ति देने का फैसला किया है। इसके तहत ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के कार्यों के लिए 130.88 करोड़ रुपये का बजटीय अनुदान दिया जाएगा। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क कार्यों के लिए लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। इस फैसले के तहत कुल अनुमानित राहत 200.88 करोड़ रुपये से 230.88 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। सरकार का उद्देश्य बढ़ती निर्माण लागत के कारण प्रभावित सड़क परियोजनाओं को दोबारा गति देना और निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा कराना है।
ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए 130.88 करोड़ रुपये की राहत
मंत्रिपरिषद् के निर्णय के अनुसार, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित सड़क निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन की बढ़ी हुई कीमतों की भरपाई की जाएगी। इसके लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि में अनुबंधकों द्वारा वास्तव में खरीदी और निर्माण कार्य में उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा के आधार पर राहत राशि तय की जाएगी। राज्य शासन इसके लिए बजट से 130.88 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में उपलब्ध कराएगा।
लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों को भी मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण कार्यों को भी राहत के दायरे में शामिल किया है। इसका लाभ उन अनुबंधों को मिलेगा, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं। ऐसे कार्यों में 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खरीदे और इस्तेमाल किए गए बिटुमिन पर मूल्य राहत प्रदान की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए सरकार को लगभग 70 करोड़ से 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होने का अनुमान है।
डामर महंगा होने से प्रभावित सड़क परियोजनाओं को मिलेगी गति
डामर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री है। इसकी कीमतों में असाधारण बढ़ोतरी से निर्माण लागत पर असर पड़ता है। विशेष रूप से पहले से तय दरों पर काम करने वाले अनुबंधकों के लिए लागत में बढ़ोतरी चुनौती बन सकती है। मंत्रिपरिषद् के इस निर्णय से ऐसी परियोजनाओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका काम बढ़ती लागत के कारण प्रभावित हुआ है। सरकार का मानना है कि क्षतिपूर्ति मिलने से अनुबंधकों को काम जारी रखने में सहायता मिलेगी और लंबित डामरीकरण कार्यों में तेजी आएगी।
निर्धारित समय-सीमा में सड़क निर्माण पूरा करने पर जोर
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण लागत में राहत देना नहीं, बल्कि सड़क परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराना भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। साथ ही कृषि उत्पादों के परिवहन, स्थानीय व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में सड़क नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्रिपरिषद् के अनुसार, बिटुमिन की बढ़ी कीमतों पर राहत देने से भारत सरकार द्वारा निर्धारित सड़क निर्माण संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। यह निर्णय विशेष रूप से उन निर्माण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें डामरीकरण का काम बाकी है। राहत का वास्तविक लाभ पात्र अनुबंधों, निर्धारित अवधि और खरीदी तथा उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा के अनुसार मिलेगा। आने वाले समय में इस फैसले का असर सड़क निर्माण कार्यों की प्रगति और लंबित परियोजनाओं के पूरा होने की स्थिति से स्पष्ट होगा।