छत्तीसगढ़ में बिजली का नया दौर, बैटरी में स्टोर होगी सौर ऊर्जा, रात में भी मिलेगी सप्लाई
2026-11-01 09:25 AM
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रायपुर : देश में सौर और पवन ऊर्जा के तेजी से बढ़ते उत्पादन के बीच बिजली को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की राष्ट्रीय विद्युत योजना के तहत वर्ष 2030 तक देश में 208 गीगावाट घंटे (GWh) क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य दिन में उत्पादित होने वाली अतिरिक्त हरित बिजली को बैटरियों में संग्रहित कर रात के समय या बिजली की अधिक मांग होने पर उसका इस्तेमाल करना है। इस पहल में छत्तीसगढ़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां राजनांदगांव जिले में 120 मेगावाट घंटे क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना संचालित होने की जानकारी दी गई है। बिजली भंडारण की नई तकनीक से सौर और पवन ऊर्जा की उपयोगिता बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित विद्युत क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2030 तक 208 गीगावाट घंटे बैटरी स्टोरेज का लक्ष्य
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में एक मेगावाट घंटे से अधिक क्षमता वाली कुल 798 मेगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 35.8 गीगावाट घंटे क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन बताई गई हैं। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की मदद से दिन में सौर ऊर्जा संयंत्रों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को संग्रहित किया जा सकता है। जब रात में सौर उत्पादन बंद हो जाता है या मौसम के कारण पवन और सौर ऊर्जा का उत्पादन कम होता है, तब संग्रहित बिजली का उपयोग किया जा सकता है। इस तकनीक से बिजली की अधिकतम मांग के दौरान ग्रिड पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही फ्रीक्वेंसी रेगुलेशन, वोल्टेज नियंत्रण और ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां उपयोगी साबित हो सकती हैं।
राजनांदगांव में 120 MWh की बैटरी स्टोरेज परियोजना
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 120 मेगावाट घंटे क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना संचालित होने की जानकारी दी गई है। यह परियोजना प्रदेश में नई ऊर्जा तकनीक के उपयोग का उदाहरण है। सौर और पवन ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इनका उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। बैटरी स्टोरेज इस अंतर को कम करने में सहायक हो सकता है। इस व्यवस्था के जरिए अधिक उत्पादन वाले समय की बिजली को सुरक्षित रखकर जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है। इससे अक्षय ऊर्जा को बिजली ग्रिड के साथ जोड़ने की क्षमता बढ़ती है। केंद्र सरकार ने ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को अवसंरचना का दर्जा दिया है। इसके अलावा वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं के माध्यम से ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ समाचार
SECL का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावाट के पार
कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार की योजना बनाई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028-29 तक 700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी ग्राउंड माउंटेड, रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं पर काम कर रही है। संचालित, निर्माणाधीन और प्रस्तावित परियोजनाओं को मिलाकर उसका सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावाट से अधिक बताया गया है। सूरजपुर जिले के भटगांव कोलियरी और बिश्रामपुर क्षेत्र में कुल 40 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड सौर संयंत्र संचालित हैं। इनमें भटगांव का 20 मेगावाट, गोरखनाथपुर का 8 मेगावाट और शिवनंदनपुर का 12 मेगावाट क्षमता वाला संयंत्र शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन संयंत्रों से अब तक 90 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो चुका है। SECL भटगांव, बिश्रामपुर, जोहिला और सोहागपुर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार कर रही है।
अब जलाशयों पर भी लगेंगे सोलर पैनल
छत्तीसगढ़ में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के प्रबंध संचालक संजीव कटियार के अनुसार, इसके लिए जल संसाधन विभाग के साथ संभावित जलाशयों का आकलन किया जा रहा है। फ्लोटिंग सोलर तकनीक में पानी की सतह पर विशेष प्लेटफॉर्म स्थापित किए जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और उत्पादित बिजली को केबलों के माध्यम से ग्रिड तक पहुंचाया जाता है। इस प्रकार की परियोजनाओं से जमीन की आवश्यकता कम हो सकती है और उपलब्ध जलाशयों का ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है। हालांकि किसी विशेष जलाशय में परियोजना स्थापित करने का निर्णय तकनीकी और पर्यावरणीय आकलन पर निर्भर करेगा।
26 साल में छत्तीसगढ़ की बिजली क्षमता में बड़ा विस्तार
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय नवंबर 2000 में प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 1,360 मेगावाट थी। सितंबर 2026 तक यह बढ़कर 2,978.70 मेगावाट हो गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ताप विद्युत क्षमता 1,240 मेगावाट से बढ़कर 2,840 मेगावाट पहुंच गई। वहीं जल विद्युत क्षमता 120 मेगावाट से बढ़कर 138.70 मेगावाट हुई। इस प्रकार कुल स्थापित क्षमता में लगभग 119 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग भी तेजी से बढ़ी है। राज्य गठन के समय अधिकतम मांग 1,334 मेगावाट थी, जो सितंबर 2026 तक 7,083 मेगावाट तक पहुंच गई। यह लगभग 431 प्रतिशत की वृद्धि है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच अक्षय ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण तकनीक का विस्तार भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। छत्तीसगढ़ में बैटरी स्टोरेज, सौर ऊर्जा और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की दिशा में हो रहे प्रयास बिजली क्षेत्र को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से हरित ऊर्जा की उपलब्धता और ग्रिड प्रबंधन में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।