रायपुर मेकाहारा के डॉक्टरों ने किया कमाल, दिल से चिपकी कैंसर की गांठ निकाली, मरीज स्वस्थ
2026-11-01 10:30 AM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल कैंसर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग और हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने 60 वर्षीय मरीज की छाती में हृदय की प्रमुख रक्त वाहिकाओं के पास स्थित कैंसरयुक्त गांठ को करीब चार घंटे के ऑपरेशन में निकाल दिया। यह गांठ हृदय की बड़ी रक्त वाहिकाओं, बाएं फेफड़े और हृदय की बाहरी झिल्ली से चिपकी हुई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही और सुधार होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों के अनुसार मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है। कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि मरीज की उम्र और बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी के बाद लंबे समय तक उसकी नियमित निगरानी की गई। फॉलोअप के दौरान मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और वर्तमान में वह सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।
जानकारी के अनुसार रायपुर निवासी 60 वर्षीय मरीज छाती में लगातार दर्द और भारीपन की शिकायत लेकर मेकाहारा के कैंसर सर्जरी विभाग की ओपीडी में पहुंचा था। इससे पहले मरीज ने एक निजी अस्पताल में बायोप्सी कराई थी, जिसमें इनवेसिव थाइमोमा (Invasive Thymoma) की पुष्टि हुई थी। यह थाइमस ग्रंथि से संबंधित एक प्रकार का ट्यूमर है, जो आसपास के ऊतकों और अंगों तक फैल सकता है। मरीज मेकाहारा पहुंचने से पहले कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी करवा चुका था। इसके बावजूद छाती में मौजूद गांठ की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने आगे की जांच और उपचार की योजना बनाई। मरीज की बीमारी की गंभीरता और गांठ की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन कराया गया। जांच में छाती के अगले हिस्से यानी एंटीरियर मीडियास्टिनम में लगभग 5 × 4.3 × 2.5 सेंटीमीटर आकार की गांठ दिखाई दी। यह गांठ हृदय से जुड़ी प्रमुख रक्त वाहिकाओं महाधमनी और पल्मोनरी आर्टरी के बेहद करीब स्थित थी।
दिल की बड़ी रक्त वाहिकाओं से चिपकी थी कैंसरयुक्त गांठ
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांठ की संवेदनशील स्थिति थी। यह हृदय की प्रमुख रक्त वाहिकाओं के साथ-साथ बाएं फेफड़े और हृदय की बाहरी झिल्ली से भी चिपकी हुई थी। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव और आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का जोखिम था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. साहू से परामर्श किया। दोनों विभागों के विशेषज्ञों ने मरीज की जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के बाद संयुक्त रूप से सर्जरी करने का निर्णय लिया।
चार घंटे तक चला ऑपरेशन, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने मीडियन स्टर्नोटॉमी तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक में छाती के मध्य भाग से ऑपरेशन करके अंदर मौजूद अंगों तक पहुंच बनाई जाती है। ऑपरेशन के दौरान लगभग 5 × 4 सेंटीमीटर आकार की गांठ एसेन्डिंग एओर्टा, पल्मोनरी आर्टरी, बाएं फेफड़े और पेरीकार्डियम से चिपकी हुई पाई गई। डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानी के साथ गांठ को आसपास के महत्वपूर्ण अंगों से अलग किया। चिकित्सकों ने कैंसरयुक्त गांठ को हृदय की बाहरी झिल्ली के एक हिस्से और बाएं फेफड़े के कुछ हिस्से के साथ सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग चार घंटे का समय लगा। ऑपरेशन के दौरान मरीज को दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्जरी के दौरान कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई और ऑपरेशन निर्धारित योजना के अनुसार पूरा किया गया।
लंबे फॉलोअप के बाद सामान्य जीवन जी रहा मरीज
सर्जरी के बाद मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने और स्थिति स्थिर रहने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. आशुतोष गुप्ता के अनुसार मरीज की उम्र और ऑपरेशन की जटिलता को ध्यान में रखते हुए लंबे समय तक नियमित फॉलोअप किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मरीज पूरी तरह ठीक है और सामान्य लोगों की तरह अपना जीवन जी रहा है। इस सफल सर्जरी में कैंसर सर्जरी और हृदय-छाती सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों विभागों ने मिलकर संवेदनशील अंगों के पास स्थित कैंसरयुक्त गांठ को निकालने की चुनौती पूरी की।
इन डॉक्टरों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस जटिल ऑपरेशन में कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता और हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. साहू के नेतृत्व में चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने कार्य किया। टीम में डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सोनम, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. आशीष मालव, डॉ. गौरव और डॉ. अक्षय शामिल रहे। ऑपरेशन के दौरान निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. संकल्प ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेकाहारा में हुई यह सर्जरी जटिल कैंसर मामलों के उपचार में विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के संयुक्त प्रयास का महत्वपूर्ण उदाहरण है। अस्पताल की टीम ने हृदय और फेफड़ों के बेहद करीब स्थित कैंसरयुक्त गांठ को निकालकर मरीज को सामान्य जीवन में लौटने में मदद की है।