रायपुर

नियमितीकरण की मांग के बीच सुलग रही विरोध की ज्वाला... प्रदेशभर के अनियमित कर्मचारियों ने दिखाई ताकत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नियमितीकरण की मांग सालों से लंबित है। हजारों लोग सरकारी विभागों में इस बात की आस लगाकर सेवाएं दे रहे हैं, देर—सवेर उनकी नौकरी पक्की हो जाएगी, तो आने वाला वक्त सुरक्षित हो जाएगा, उनके परिवार और बच्चों की दिक्कतें कम हो जाएंगी, लेकिन अब भी यह उनके लिए महज दिवास्वप्न की तरह है। 

नियमितीकरण की मांग एक या दो साल पुरानी नहीं है, बल्कि मांग करते हुए इन संवि​दा कर्मियों ने दो से तीन सरकारों को बदलते देख लिया है। उनकी आस कांग्रेस सरकार से इसलिए ज्यादा है, क्योंकि चुनाव से पहले इस बात का घोषणा की गई थी कि सरकार आने के बाद उन्हें नियमितीकरण का लाभ मिलेगा, लेकिन कांग्रेस सरकार का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, लेकिन घोषणा पर अमल नहीं हो पाया है। 

सालों से नियमितीकरण की मांग को लेकर डटे इन हजारों संविदा कर्मियों ने एक बार फिर एकजुटता के साथ अपनी ताकत दिखाने का फैसला लेते हुए सोमवार को नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। यहां एक सभा लेने के बाद प्रदर्शनकारी रैली निकालकर शहर की ओर बढ़े तो पुलिस ने बीच रास्ते में बैरीकेड्स लगाकर रोक दिया।

इस बीच कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई। कर्मचारियों की मांग है कि जो जिस विभाग में काम कर रहा है, उन्हें नियमित किया जाए। प्रदर्शन में विकलांग कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों के लेकर पहुंची थीं।

मुख्‍यमंंत्री ने किया है आश्‍वस्‍त

सीएम भूपेश बघेल ने बजट सत्र के दौरान संविदा कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़ी घोषणा नहीं की थी, जिसके चलते उनमें निराशा का भाव आ गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि अभी सत्र आखिरी नहीं हुआ है। अब मानसून सत्र आने वाला है, ऐसे में एक बार फिर संविदा कर्मी इस बात की आस लगाए बैठे हैं। वहीं उनकी मांग पूरी हो सके, इसलिए इस बार पहले से ही आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है, ताकि सीएम बघेल मानूसन सत्र में उनके नि​यमितीकरण की मांग को पूरी कर दें।