रायपुर

अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार को संदेश देने... पकड़ी आंदोलन की राह... हजारों की तादाद में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़

रायपुर। प्रदेशभर में संचालित महाविद्यालयों में सालों से सेवाएं देने वाले अतिथि व्याख्याताओं ने अपने भविष्य के अंधकार को दूर करने के लिए सरकार के सामने अपनी मांगों को अलग—अलग तरीकों से कई बार रखा है। अब तक इन अतिथि व्याख्याताओं के सालों की मेहनत और समर्पण का सही मायने में उन्हें कोई भी सुखद परिणाम नहीं मिला है। हद तो यह है कि इन्हें पूरे सालभर के लिए भी रोजगार नहीं मिलता। साल के 4 महीने बेरोजगारी के दिन काटने मजबूर इन अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार से कई बार गुहार लगाई है। 
 
आज एक बार फिर छत्तीसगढ़ के इन उच्च शिक्षित हजारों युवाओं ने सरकार को संदेश देने के लिए नवा रायपुर के धरना स्थल तूता में एकजुट होने का निर्णय लिया। तूता में जमा हुई हजारों युवा अतिथि शि​क्षकों की मौजूदगी इस बार ऐतिहासिक है। 
 

 
प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य संवारने वाले इन अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांग में सरकार से ज्यादा कुछ नहीं मांगा है। बल्कि सामान्य सी मांगे हैं, जिसमें एकमुश्त वेतन और नौकरी की सुरक्षा प्रमुख रूप से शामिल है। 
 
दरअसल, इन अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति का जो आदेश जारी किया जाता है, उसमें सेवाकाल अधिकतम 8 माह का होता है, तो इनको जो वेतन मिलता है डेलीवेजेस के मुताबिक देय होता है। ऐसे में इनके लिए तय अधिकतम वेतन भी इन्हें नसीब नहीं हो पाता है। ऐसे में एक अतिथि व्याख्याता आखिर कैसे अपने परिवार का पालन पोषण करेगा। इन्हीं विषयों पर ध्यान आकृष्ट कराने इन अतिथि व्याख्याताओं ने हर स्तर पर अपनी मांगों को रखा है, लेकिन अब तक इनकी किसी भी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया है।