एक रोटी गाय के लिए….. छात्रों ने पहले दिन ही उत्साह दिखाया उत्साह
रायपुर। अच्छी शिक्षा और संस्कार का सबसे बड़ा आधार घर और शिक्षा का मंदिर होता है। हर मां घर में रोटी बनाने के बाद पहली रोटी गाय और अंतिम रोटी श्वान को खिलाती है। यह हमारे संस्कार है। कहा जाता है कि पहली रोटी लक्ष्मी अर्थात् गाय को समर्पित करना चाहिए। आज के भागमभाग जिंदगी में कई आधुनिक मां अपने बच्चों को यह संस्कार नहीं दे पाती। पुरानी बस्ती स्थित छत्रपति शिवाजी स्कूल ने बच्चों में य़ह संस्कार डालने के लिए एक रोटी गाय के लिए अभियान शुरू किया। बच्चे अपने टिफिन में एक रोटी एक्स्ट्रा लाएंगे और गाय के लिए स्कूल परिसर में लगी पेटी पर दान करेंगे। जिसे गौशाला भेजकर गायों को खिलाया जाएगा। अभियान के पहले दिन बच्चों ने इसे लेकर खासा उत्साह दिखाया।
छत्रपति शिवाजी स्कूल पुरानी बस्ती और प्रोफेसर कालोनी में विद्यार्थियों ने प्रतिदिन टिफिन के साथ"एक रोटी गाय के लिए" अभियान के तहत बड़े उत्साह से रोटियां लाई। अभियान के शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास थे, जबकि विशेष अतिथि मनोहर गौशाला के संचालक पदम डाकलिया और गौसेवक राजेन्द्र तांबोली थे। महंत रामसुंदर दास ने कहा कि इस उम्र में बच्चों को गाय के लिए रोटी लाने का प्रयास प्रशंसनीय और विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाला है। इसके द्वारा बच्चों के मन में अभी से जीवसेवा का भाव जागृत होगा। गाय को समस्त संसार की माता कहा गया है। हमारे देश की सनातन परंपरा ऋषि और कृषि की रही है और दोनों ही कार्य बिना गौ उत्पाद के संभव नहीं है ।
विशेष अतिथि पदम डाकलिया ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से कहा कि वे अब हमेशा गाय को रोटी खिलाने के भाव को जागृत रखेंगे और जब भी डिब्बे में रोटी डालें तो यह ना समझे कि यह स्टील का एक डिब्बा है बल्कि गाय का मुख समझकर रोटी अर्पित करें। इस अवसर पर स्कूल संचालक मुकेश शाह और प्राचार्या नफीसा रंगवाला ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन मौली चटर्जी व आभार प्रदर्शन मधुलिका मिश्रा ने किया।
शिवाजी स्कूल में आज से यह अभियान शुरू किया गया जिसके तहत विद्यार्थी प्रतिदिन अपने साथ घर से टिफिन में एक रोटी गाय के लिए भी लाएंगे। स्कूल में प्रवेश करते ही सबसे पहले इसके लिए बनाए गए विशेष प्रकार के गोल डिब्बे में रोटी डालेंगे फिर प्रार्थना सभा में शामिल होंगे। इस सेवाभावी पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में जीवदया,जीवसेवा और करुणा की भावना को बढ़ावा देना और देने की खुशी का महत्व समझना है। स्कूल की दोनों शाखाओं में प्रतिदिन जमा होने वाली रोटियां गौशाला के साथ साथ सड़कों पर विचरने वाली गौमाताओं को खिलाई जाएगी ।