रायपुर

एनआईटी रायपुर और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के बीच संस्थागत सहयोग के लिए एमओयू

रायपुर। सहयोग और अनुसंधान के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर (एनआईटी रायपुर) और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान सीएसआईआर-सीआरआरआई, नई दिल्ली ने 27 फरवरी 2024 को डॉ. (प्रो.) एन.वी. रमना राव, निदेशक, एनआईटी रायपुर और डॉ. (प्रो.) मनोरंजन परिदा, निदेशक, सीएसआईआर-सीआरआरआई, नई दिल्ली ने डॉ. एस. वेलमुरुगन, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीआरआरआई नई दिल्ली, डॉ. राजेश के.त्रिपाठी, डीन (योजना एवं विकास), डॉ. पी. दीवान, डीन (अनुसंधान एवं परामर्श), और डॉ. डी. सान्याल, डीन (संकाय कल्याण),की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए । इस दौरान एनआईटी  एमओयू नोडल अधिकारी, संकाय सदस्य और वैज्ञानिक मौजूद रहे | 

 

इस समझौता ज्ञापन का प्राथमिक उद्देश्य परिवहन संरचना, वास्तुकला और शहरी नियोजन के क्षेत्रों में उन्नत सहयोगात्मक अनुसंधान के क्षेत्र में एनआईटी रायपुर और सीएसआईआर-सीआरआरआई नई दिल्ली के बीच सहयोग स्थापित करना है। अपनी बौद्धिक क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, संस्थान के संकाय सदस्य और वैज्ञानिक उद्योग की जरूरतों के अनुसार अनुसंधान और शिक्षण के लिए कौशल  प्रणाली विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
एमओयू की शर्तों के तहत, दोनों संस्थान बौद्धिक संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अपनी महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं को साझा करने पर सहमत हुए । इस दौरान दोनो संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के अवसर तलाशेंगे और उनके लिए बाहरी फंडिंग की तलाश करेंगे। दोनो संस्थान छात्रों को उद्योग के लिए तैयार करने के लिए प्रशिक्षण देने में सक्रिय रूप से संलग्न रहेंगे। इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के लिए संस्थानों द्वारा आवश्यक समर्थन और सहायता भी प्रदान की जाएगी। दोनों संस्थानों में आपसी हित और उपलब्ध विशेषज्ञता के आधार पर अल्पकालिक पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाओं और सम्मेलनों जैसी संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियां तैयार की जाएंगी।

यह समझौता प्रारंभ में 5 वर्षों के लिए वैध है और इसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है। इस एमओयू पर हस्ताक्षर तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग सहयोग में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए दोनों संस्थानों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह रणनीतिक साझेदारी निस्संदेह दोनों संस्थानों की वृद्धि और विकास में योगदान देगी और बड़े पैमाने पर छात्रों, वैज्ञानिकों, संकायों और उद्योग को लाभान्वित करेगी।