रायपुर
प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन
रायपुर/प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, कवि और उपन्यासकार तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल (89 वर्ष) का आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था।एम्स प्रबंधन ने 4 बजकर 58 मिनट पर उनके निधन की पुष्टि की। विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन विरल रचनाकारों में थे, जिनकी भाषा अत्यंत सरल होते हुए भी गहरी संवेदना, मानवीय करुणा और दार्शनिक गहराई से भरपूर थी। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने आम आदमी के जीवन, अकेलेपन और संघर्ष को असाधारण ढंग से शब्द दिए। उनका जाना सिर्फ साहित्य जगत ही नहीं, बल्कि पूरी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक युग का अंत है।
"भारतीय भाषा उत्सव” नवीन कन्या कालेज की छात्राओं ने बनाया पोस्टर
रायपुर। डॉ. राधा बाई शास नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में प्राचार्य डॉ.प्रीति मिश्रा के मार्गदर्शन में भारतीय भाषा विकास समिति के द्वारा भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष में "भारतीय भाषा उत्सव "शीर्षक से पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। विविध भारतीय भाषाओं से संबंधित पोस्टर छात्राओं द्वारा बनाया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रितु खोपे बीकॉम अंतिम वर्ष, द्वितीय स्थान पर दामिनी यादव बीए तृतीय वर्ष, तृतीय स्थान पर दीक्षा देवांगन एमए तृतीय सेमेस्टर हिंदी रही। पोस्टर प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ. रूपा सल्होत्रा विभागाध्यक्ष गणित, डॉ.नम्रता शर्मा विभागाध्यक्ष भूगोल थे। इस अवसर पर डॉ मनीषा शर्मा वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रही। भारतीय भाषा विकास समिति के संयोजक डॉ.ज्योति मिश्रा ने बताया कि भारतीय भाषा दिवस भारत की समृद्ध भाषाई विविधता का उत्सव मनाने और विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
यह दिन आधुनिक तमिल कविता के अग्रदूत, महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सदस्य डॉ. सीमा रानी प्रधान, डॉ.श्वेता अग्निवंशी, डॉ.श्रद्धा मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
स्वास्थ्य मंत्री ने किया जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण, नई ओपीडी व एनआईसीयू का किया शुभारंभ
रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक संजीव झा एवं सहायक संचालक डॉ. सुरेंद्र पाम्भोई उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय में नवनिर्मित ओपीडी हॉल एवं नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार हेतु 10 बेड के अत्याधुनिक एनआईसीयू वार्ड का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा 10 बेड के एनआईसीय से अब क्षेत्र के नवजात शिशुओं को क्रिटिकल केयर हेतु बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
स्वास्थ्य मंत्री मंत्री ने जीवनदीप समिति के माध्यम से स्वीकृत कार्यों की जानकारी लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय मोहबे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप जीवनदीप समिति से समयबद्ध स्वीकृतियाँ देना सराहनीय कदम है, जिससे अस्पताल की सेवाएँ निरंतर सुदृढ़ हुई हैं। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.के. मरकाम, सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक उत्कर्ष तिवारी, जिला अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार, आरएमओ डॉ. संदीप साहू सहित जिला चिकित्सालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मेगा हेल्थ कैंप का समापन.... राज्यपाल बोले- स्वास्थ्य शिविर सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल
रायपुर। आयुर्वेदिक कॉलेज रायपुर में आयोजित पांच दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैंप के समापन अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि यह आयोजन केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की जीवंत मिसाल है। ऐसे शिविर समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करते हैं और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के लिए आज भी बेहतर इलाज एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर गरीब, वंचित और आयुष्मान कार्ड से वंचित लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने इस जनकल्याणकारी पहल के लिए शिविर के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि स्वास्थ्य छत्तीसगढ़ का संकल्प केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह शिविर उस दिशा में उठाया गया ठोस कदम है।
राज्यपाल डेका ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस शिविर में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 42 से अधिक प्रतिष्ठित अस्पतालों के 55 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क सेवाएँ प्रदान कीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जाँच, आधुनिक कैंसर स्क्रीनिंग, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत सुविधाओं का आम नागरिकों तक पहुँचना वास्तव में सराहनीय है। जयपुर फुट और कृत्रिम अंगों जैसी सेवाओं ने दिव्यांगजनों के जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार किया है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, एक्यूपंक्चर और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का समावेश हमारे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के सुंदर समन्वय को दर्शाता है। सभी चिकित्सा पद्धतियों किए जा रहे उपचार ने इस शिविर को और अधिक प्रभावी बना दिया है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाया है और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब वर्ग के लिए इलाज को सरल किया है।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह, ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोग इनके प्रति जागरूक नहीं होते। ऐसे शिविरों के माध्यम से समय रहते बीमारी की पहचान होती है, जिससे उपचार संभव हो पाता है। राज्यपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में मानवीय संवेदना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है। इसलिए जो चिकित्सा के क्षेत्र में आते हैं वे इसे व्यवसाय न बनाएं बल्कि सेवा का क्षेत्र माने।
मुख्यमंत्री साय आज तीन दिवसीय राज्य युवा महोत्सव का करेंगे शुभारंभ
रायपुर। तीन दिवसीय राज्य युवा महोत्सव का आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री अरुण साव शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता करेंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव में 14 विधाओं में 3 हजार युवा अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 8 दलीय, 6 एकल विधाओं में प्रतियोगिताएं होगी। प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागी राष्ट्रीय युवा उत्सव में भागीदारी करेंगे. छग की मेजबानी में होने वाले पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की लॉन्चिंग होगी। विधानसभा स्पीकर डॉ रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज रायपुर और बिलासपुर के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे. सीएम सुबह 11:30 बजे Chhattisgarh Skill Tech कार्यक्रम में शामिल होंगे. दोपहर 3 बजे रायपुर के स्वामी विवेकानंद एथलेटिक स्टेडियम पहुंचेंगे. 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शिरकत करेंगे. शाम 4.10 बजे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के हेलीपेड से बिलासपुर रवाना होंगे. शाम 06:30 बजे राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र, बहतराई बिलासपुर पहुंचेंगे. जहां वे राज्य युवा महोत्सव का उद्घाटन करेंगे. रात 08:45 बजे पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में आयोजित कवि सम्मेलन में शामिल होंगे।
महतारी वंदन योजना बनी प्रदेश की महिलाओं का मजबूत संबल, हर माह की आर्थिक सहायता से बदली जिंदगी
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई महतारी वंदन योजना राज्यभर में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की निश्चित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जा रही है,अब तक 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि 22 किश्तों में उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। जिससे घरेलू खर्चों की चिंता कम हुई है और महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है।
कबीरधाम जिले के ग्राम मझगांव की निवासी सतरूपा गंधर्व, जो मजदूरी पर निर्भर परिवार से हैं, इस योजना से लाभान्वित होकर आत्मविश्वास के साथ जीवन यापन कर रही हैं। तीन बच्चों की मां सतरूपा को अब तक 22 किस्तों में कुल 22,000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। वे बताती हैं कि इस राशि से बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री, घरेलू जरूरतें और व्यक्तिगत आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो पा रही हैं। नियमित सहायता से उनके पास बचत भी रहने लगी है, जिससे आकस्मिक खर्चों की चिंता समाप्त हो गई है।
बलरामपुर जिले के विकासखण्ड वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम रघुनाथनगर की निवासी ओमलता भी महतारी वंदन योजना से लाभान्वित होकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ी हैं। साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली ओमलता को योजना के तहत प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता मिल रही है। अब तक उन्हें 22,000 रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। वे बताती हैं कि इस सहयोग से वे घर के छोटे-छोटे खर्च स्वयं वहन कर पा रही हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में स्थायित्व और सम्मान लाने वाली पहल है। उन्होंने बताया कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अब अपने परिवार की आवश्यकताओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। मंत्री राजवाड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचे।
दिव्यांगजनों के साथ देश, समाज और परिवार खड़ा है- राज्यपाल डेका
रायपुर : छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम तथा महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रवण एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के कौशल उन्नयन शिविर का राज्यपाल रमेन डेका ने आज अवलोकन किया और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे दिव्यांगजनों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल डेका ने कहा कि दिव्यांगजन अकेले नहीं हैं, उनके साथ पूरा देश, समाज और परिवार खड़ा है। यह शिविर केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना ही सच्चा सशक्तिकरण है। दिव्यांगता बाधा नहीं, क्षमता का माध्यम बने।
राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांग भाई-बहनों की चुनौतियाँ अक्सर समाज की नजरों से ओझल रह जाती हैं, जबकि उनकी क्षमताएँ असाधारण होती हैं। हमारी व्यवस्थाएँ ऐसी होनी चाहिए कि दिव्यांगता बाधा न बने, बल्कि उनकी प्रतिभा और सामर्थ्य को सामने लाने का माध्यम बने।
उन्होंने कहा कि समर्थ भारत और विकसित भारत @2047 का संकल्प तभी साकार होगा, जब दिव्यांगजनों को समान अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भरता मिले। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सहायता के साथ-साथ स्वावलंबन पर जोर देता है।
राज्यपाल ने दिव्यांगजनों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें और आगे चलकर दूसरों को भी रोजगार देने का माध्यम बनें। उन्होंने कहा कि आप में गिरने के बाद उठने की शक्ति है और समाज आपकी इस यात्रा में आपके साथ है।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सेवा भावना और संवेदना मजबूत है। दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए संस्थाओं और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए रैंप, सुलभ शौचालय, बाधा-रहित भवन, स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विदेशों की तरह हमें भी दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता का वातावरण बनाना होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शिविर दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा और वे विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
जैनम मानस भवन नया रायपुर में यह कौशल उन्नयन शिविर 23 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए 1000 से अधिक श्रवण एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो इस आयोजन की व्यापकता और प्रभाव को दर्शाता है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम, रायपुर के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया तथा महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्प जैन ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की संचालक रोक्तिमा यादव, अन्य अधिकारी, संस्था पदाधिकारी, दिव्यांगजन एवं छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बस्तर संभाग में महिलाएं डेयरी व्यवसाय से बन रही हैं आत्मनिर्भर
रायपुर : रोजगार और स्वरोजगार के माध्यम से लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए बस्तर संभाग में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। एनडीडीबी के माध्यम से कांकेर और कोण्डागांव जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत संचालित की जा रही। इस योजना में जनजातीय महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि इस योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 01 जून 2025 को कोण्डागांव जिले के भोंगापाल गांव से इस योजना शुभारंभ किया था।
बस्तर संभाग के कोण्डागांव एवं कांकेर जिले के 125 हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान पर दुधारू पशु प्रदाय के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 47 महिलाओं के आवेदन पत्र बैंक से ऋण स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से 24 महिलाओं को 36 दुधारू पशु वितरित किया गया है। हितग्राहियों को अच्छे नस्ल की दुधारू गाय प्रदान करने हेतु एनडीडीबी डेयरी सर्विसेस द्वारा साहीवाल नस्ल की गाय (8-10 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन क्षमता) राजस्थान एवं पंजाब क्षेत्र से चिन्हित कर अनुसूचित जनजाति महिलाओं को वितरण किया जा रहा है।
दुग्ध महासंघ द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग अंतर्गत 95 कार्यशील दुग्ध समितियों के 4006 दुग्ध प्रदायकों के माध्यम से 15060 लीटर दूध प्रतिदिन संकलित किया जाकर, लगभग 8000 लीटर दूध प्रतिदिन कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर जिलों में विपणन किया जा रहा है।
बस्तर संभाग में सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए आगामी 5 वर्षाे में 400 नयें ग्रामों को दुग्ध समिति के माध्यम से जोड़ा जायेगा। जिसमें लगभग 9000 दूध प्रदायक जुड़ेगें एवं 48 हजार लीटर दूध संकलन किया जायेगा। इसके अतिरिक्त 28 हजार लीटर क्षमता के दुग्ध शीतलीकरण केन्द्रों एवं एक 1 लाख लीटर क्षमता का नवीन दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना बस्तर जिले में किया जायेगा।
यह योजना राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एन.डी.डी.बी.) की सहायक कंपनी एन.डी.डी.बी. डेयरी सर्विसेस की मदद से कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकार 2 दुधारू पशुओं की लागत राशि रूपये 1.40 लाख पर 50 प्रतिशत अनुदान 70 हजार प्रदान किया जा रहा है, शेष 40 प्रतिशत बैंक ऋण एवं 10 प्रतिशत राशि हितग्राही को वहन करना होता है।
अनुसूचित जनजाति महिला किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक (CRGB) के साथ एक समझौता ज्ञापन निष्पादित किया है, जो रियायती ब्याज दर पर 4 साल की अवधि के लिए ऋण प्रदान करता है। दुग्ध महासंघ द्वारा ऋण की किश्त हितग्राही किसानों के दूध बिल से कटौती कर बैंक में जमा किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, योजना अंतर्गत हितग्राहियों को एक वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क सहायता प्रदान किया जा रहा है, जिसमें- गाय की बीमा (एक साल के लिए), पशु स्वास्थ्य निगरानी उपकरण, 5 किलोग्राम साइलेज चारा, 2 किलोग्राम पशु आहार, एवं 50 ग्राम खनिज मिश्रण प्रति पशु प्रतिदिन प्रदान किया जा रहा है। पशु प्रेरण से पहले एवं बाद में वैज्ञानिक पशु प्रबंधन प्रणाली पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशु प्रजनन एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है।
बरसात में मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या से मिलेगी स्थायी राहत
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन के दो वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ में आधारभूत ढांचे को सशक्त करने की दिशा में लगातार ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले को बड़ी सौगात देते हुए बरसात के मौसम में मार्ग अवरुद्ध होने और गांवों का संपर्क टूटने की वर्षों पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
प्रदेश सरकार ने जशपुर जिले में 22 उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण के लिए 109 करोड़ 09 लाख रुपये तथा 215 छोटे पुल-पुलिया निर्माण के लिए 20 करोड़ 93 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इन निर्माण कार्यों से जिले के ग्रामीण, वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षभर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की स्वीकृति से जिले के प्रमुख मार्गों पर उच्चस्तरीय पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें केराकोना–बैगाटोली, चलनी–परसाडीपा, अलोरी–मतलोगा, जशपुर–सन्ना, जशपुर नगर मुख्य मार्ग, बगीचा–आरा, बगीचा–रेंगले, कलीबा–टांगरबहार, बांसापतरा–दुलदुला, गुलझरिया–बम्हनी, कुनकुरी–रनपुर, भालुमुंडा–खजूरखाट, बोडाझापर–चटकपुर, धौरासांड–दाइजबहार, डुमरबहार–तमता, घुघरी–ढोढरअम्बा, कोतबा–लवाकेरा सहित दुलदुला क्षेत्र के विभिन्न मार्ग शामिल हैं। इन पुलों के निर्माण से नदी-नालों पर निर्भर मार्गों में वर्षभर सुगम और सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने गांव-टोला और पारा को मुख्य मार्गों से जोड़ने के उद्देश्य से जिले में 215 छोटे पुल-पुलिया निर्माण को भी स्वीकृति दी है। इन कार्यों पर 20 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत आएगी। इससे किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों और आम नागरिकों को खेतों, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और पंचायत मुख्यालयों तक हर मौसम में आसान पहुंच मिलेगी।
अब तक बरसात के दिनों में कई क्षेत्रों में पुल-पुलिया के अभाव में संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, जिससे आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता था। नए पुलों और पुलियों के निर्माण से न केवल जान-माल की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति मिलेगी। साथ ही दूरी और समय की बचत से आमजन को सीधा लाभ प्राप्त होगा।
जशपुर जिले को मिली इस ऐतिहासिक सौगात पर क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि दो वर्षों के सुशासन के परिणाम अब जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और सड़कों-पुलों के माध्यम से जशपुर जिला विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।
जानिए रायपुर में आज सोने की कीमत
रायपुर। अगर आप सोने में इनवेस्ट करने के बारे में सोच रहे हैं या अपने लिए सोने की ज्वैलरी खरीदना चाहते हैं, तो आप खरीदारी से पहले रायपुर में सोने की कीमत जरूर जान लें। रायपुर में 22 दिसंबर को सोने की कीमत 1,33,880 रुपये प्रति 10 ग्राम 24 कैरेट है। वहीं 22 कैरेट की कीमत 1,22,630 रुपये है।
TODAY GOLD & SILVER RATE
999 24CT - 1,33,880
916 22CT - 1,22,630
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सौजन्यः प्रगति ज्वेलर्स, सुंदर नगर रायपुर
एलुमनी मीट.... 65, 75, 85 और 2000 बैच के पूर्व छात्र पहुंचे... पुराने दिनों को किया याद
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी–NIT) रायपुर में 21 दिसंबर 2025 को एलुमनी एसोसिएशन, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (GEC–NIT) रायपुर द्वारा वार्षिक पूर्व छात्र मिलन समारोह–2025 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संस्थान के गोल्डन टॉवर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) एन. वी. रमना राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में 1965, 1975, 1985 एवं 2000 बैच के पूर्व छात्र, एलुमनी एसोसिएशन के पदाधिकारी, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी शामिल हुए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से निर्मित दो स्मार्ट कक्षा कक्षों एवं एक आधुनिक कॉन्फ्रेंस कक्ष का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ औपचारिक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। एलुमनी एसोसिएशन जीईसी–एनआईटी रायपुर के अध्यक्ष उमेश चितलांगिया ने कहा कि पूर्व छात्र मिलन समारोह संस्थान और एलुमनी के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने स्मार्ट कक्षाओं, छात्र सहायता, बीमा कवरेज एवं डिजिटल परिवर्तन जैसी एलुमनी-समर्थित पहलों की जानकारी दी।
संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि एलुमनी के सहयोग से 20 स्मार्ट कक्षाओं का विकास किया जा चुका है तथा 20 और कक्षाओं को स्मार्ट बनाने की योजना है। उन्होंने पूर्व छात्रों से संस्थान के विकास में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। विभिन्न बैचों के पूर्व छात्रों ने संस्थान के प्रति अपने अनुभव साझा करते हुए मेंटरिंग, तकनीकी उन्नयन एवं संस्थागत विकास में सहयोग पर बल दिया।
अपने संबोधन में निदेशक प्रो. (डॉ.) एन. वी. रमना राव ने एलुमनी योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर की समग्र छात्र विकास एवं भविष्य–उन्मुख दृष्टि को रेखांकित किया। उन्होंने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility–CSR) योजना से निर्मित छात्रावास सहित प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान एवं बैच–वार सम्मान प्रदान किए गए। समारोह का समापन पूर्व छात्रों द्वारा शिक्षकों के सम्मान के साथ हुआ।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े दिव्यांग युवक–युवती परिचय सम्मेलन में हुई शामिल विकलांग नहीं, दिव्यांगजन कहकर करें संबोधन”
रायपुर : महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा का अभिन्न अंग हैं और उनके प्रति संवेदनशील सोच व सम्मानजनक भाषा का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। वे अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद (छत्तीसगढ़ प्रांत) के तत्वावधान में आशीर्वाद भवन, बैरन बाजार, रायपुर में आयोजित 16वें राज्य स्तरीय विवाह योग्य युवक–युवती परिचय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
मंत्री राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मेलन केवल परिचय का मंच नहीं, बल्कि दिव्यांग युवक–युवतियों को गरिमापूर्ण वैवाहिक जीवन की ओर अग्रसर करने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने जानकारी दी कि सम्मेलन में सहमति बनने वाले जोड़ों का सामूहिक विवाह 28 फरवरी 2026 एवं 01 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें सामान्य युवक–युवतियाँ भी शामिल हुए, जो दिव्यांगजनों से विवाह के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे आए। यह सामाजिक समावेशन और समानता की दिशा में प्रेरक पहल है।
मंत्री राजवाड़े ने कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक अपील करते हुए कहा कि “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांगजन” शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मान और आत्मबल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “दिव्यांगजन” शब्द के प्रयोग का आग्रह किया है। शब्द हमारी सोच और संवेदना को दर्शाते हैं, इसलिए समाज को सम्मानजनक भाषा अपनानी चाहिए।
कार्यक्रम में विधायक माननीय पुरंदर मिश्रा, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक, चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विनोद पाण्डेय, अग्रवाल समाज अध्यक्ष विजय अग्रवाल, कार्यक्रम संयोजक विरेंद्र पाण्डेय, राजेश अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक समावेशन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखते हैं।
पत्रकारों की लेखनी केवल सूचना का माध्यम ही नहीं, पर्यटन को प्रोत्साहन देने का एक सशक्त साधन भी - मुख्यमंत्री
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राजस्थान के अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण से लौटने के उपरांत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के दल ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर पत्रकारों ने 15 से 20 दिसम्बर तक राजस्थान भ्रमण के दौरान वहां की विधायिका, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा पर्यटन के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, ताकि अन्य राज्यों के शासन-प्रशासन, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े नवाचारी प्रयासों को पत्रकारों के दृष्टिकोण से समझा जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन भ्रमणों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर छत्तीसगढ़ में भी नई और प्रभावी पहल शुरू की जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे इस यात्रा के अनुभवों को यात्रा-वृत्तांत के रूप में लिपिबद्ध करें, जिससे यह आम पर्यटकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की लेखनी केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यटन को प्रोत्साहन देने का एक सशक्त साधन भी है।
प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से बस्तर धरती पर स्वर्ग के समान है, किंतु नक्सलवाद लंबे समय तक इसके विकास में एक बड़ी बाधा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में राज्य सरकार पूरी दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन को राज्य की नई उद्योग नीति में शामिल किया गया है। इसके तहत सुदूर वनांचलों में होम-स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पर्यटक ग्रामीण परिवारों के साथ रहकर उनकी संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को नजदीक से अनुभव कर सकें। इससे पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में छत्तीसगढ़ के धुड़मारास को शामिल किया जाना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि इन पर गंभीरता से विचार कर उन्हें अमल में लाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा हमारी लोकसंस्कृति और अस्मिता का जीवंत दस्तावेज – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम द्वारा आयोजित “छत्तीसगढ़ रजत जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा की विकास यात्रा, उपलब्धियों और उज्ज्वल भविष्य पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि छालीवुड की सशक्त नींव रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने निगम के प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय राजेश अवस्थी का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उनका असामयिक निधन न केवल छत्तीसगढ़ी सिनेमा, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा आज एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने निगम की वर्तमान अध्यक्ष सुश्री मोना सेन को एक अनुभवी, कर्मठ और समर्पित कलाकार बताते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में छालीवुड का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी फिल्में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की संस्कृति, कला और पहचान को और अधिक सशक्त रूप में स्थापित करेंगी।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1957 से प्रदेश में फिल्मों के निर्माण का सिलसिला प्रारंभ हुआ। उन्होंने भूलन कांदा उपन्यास पर आधारित फिल्म “भूलन द मेज” को प्राप्त राष्ट्रीय पुरस्कार को पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा की जड़ें लोक संस्कृति, लोककथाओं और सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ी हैं, जो इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा हमारी लोकसंस्कृति और अस्मिता का जीवंत दस्तावेज है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्मों के विकास को लेकर पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में छालीवुड का भविष्य स्वर्णिम है और फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए निगम के पुनर्गठन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म “मोर छइंहा भुइंया” के निर्माता सतीश जैन को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस फिल्म ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के समग्र और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
एम्स रायपुर में ‘औषधि-ईआर’ का शुभारंभ, आपात सेवाओं के लिए स्वदेशी डिजिटल दवा प्रबंधन प्रणाली
रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के आपातकालीन चिकित्सा विभाग ने “औषधि-ईआर (AUSHADHI-ER)” नामक वेब-आधारित, स्वदेशी ऑनलाइन दवा इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ किया है। यह प्रणाली आपातकालीन सेवाओं में दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा इन्वेंट्री संचालन को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
यह नवाचारी प्रणाली सृजन (एसआरआईजेएन – साइंटिफिक रिसर्च एंड इनोवेशन जंक्शन फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड न्यू बायोमेडिकल टेक्नोलॉजीज) के अंतर्गत विकसित की गई है। सृजन, एम्स रायपुर का एक संस्थागत मंच है, जो नैदानिक सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य एवं जैव-चिकित्सकीय प्रौद्योगिकियों के समन्वय से आवश्यकता-आधारित, स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
औषधि-ईआर की परिकल्पना डॉ. देवेन्द्र कुमार त्रिपाठी द्वारा की गई, जबकि इसका विकास डॉ. रोशन मैथ्यू एवं डॉ. नमन अग्रवाल द्वारा किया गया। यह प्रणाली आपातकालीन विभाग में दवा इन्वेंट्री प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान के रूप में तैयार की गई है। पूर्व में दवा स्टॉक का प्रबंधन भौतिक अभिलेखों एवं मैनुअल रजिस्टरों के माध्यम से किया जाता था, जिससे वास्तविक समय में स्टॉक की स्थिति की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती थी और कई बार आवश्यकता से अधिक इंडेंटिंग की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी—जो आपातकालीन सेवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती थी।
iECS परियोजना के अंतर्गत विकसित यह प्रणाली पूर्णतः पेपरलेस एवं स्वचालित है, जो वास्तविक समय में स्टॉक प्रविष्टि, निगरानी एवं रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करती है। इसमें ग्रीन, येलो और रेड रंग आधारित संकेतकों के साथ स्वचालित ई-मेल अलर्ट की व्यवस्था की गई है, जिससे समय पर दवाओं की पुनःपूर्ति सुनिश्चित होती है और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
वर्तमान में यह प्रणाली एम्स रायपुर के आपातकालीन विभाग (ग्राउंड फ्लोर) में दवा इन्वेंट्री प्रबंधन के लिए लागू की गई है। भविष्य में इसे उपभोग्य सामग्रियों (कंज़्यूमेबल्स) तक विस्तारित किया जाएगा तथा चरणबद्ध रूप से ट्रॉमा इंटेंसिव केयर यूनिट (ट्रॉमा आईसीयू) एवं आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर में भी लागू करने की योजना है।
इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि औषधि-ईआर सृजन की उस परिकल्पना का सशक्त उदाहरण है, जिसमें फ्रंटलाइन नैदानिक आवश्यकताओं को स्वदेशी और स्केलेबल डिजिटल समाधानों में परिवर्तित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार पारदर्शिता, दक्षता और रोगी सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों के लिए एक नई मिसाल स्थापित करते हैं।
वार्षिक उत्सव में बच्चों ने दी एकल और समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुति
रायपुर। राणास पब्लिक स्कूल रोहिणीपुरम का वार्षिक उत्सव आज दीनदयाल उपाध्याय नगर के सामुदायिक भवन सेक्टर 2 में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रूपेन्द्र साहू नेवी ऑफिसर (रिटायर्ड) और अध्यक्षता प्रोफेसर लक्ष्मी शंकर निगम रिटायर्ड कुलपति शंकराचार्य एवं ICFAI विश्वविद्यालय ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत केबी राणा एवं निमिषा राणा ने किया। प्रोफेसर लक्ष्मी शंकर निगम ने अपने संबोधन में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ बच्चों के समुचित विकास के लिए जो कार्य राणा पब्लिक स्कूल द्वारा किया जा रहा है उसके लिए समस्त स्टाफ को बधाई दिया और भविष्य में भी इसी प्रकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित किए।
राणा एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष केबी राणा ने अपने उदबोधन में स्कूल के प्रारम्भ से अब तक लगभग 3 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए जानकारी दी कि बहुत जल्दी कक्षा 8वीं तक की मान्यता छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मिल जाएगी। वार्षिक उत्सव में बच्चों द्वारा एकल नृत्य, समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई और वर्ष भर होने वाले खेल और अन्य प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण अतिथियों के करकमलों से प्रदान किया गया।
आभार प्रदर्शन निमिषा राणा एवं मंच संचालन विभूति शर्मा ने किया। इस अवसर पर राणास एजूकेशन सोसायटी के डायरेक्टर कृष्ण कुमार निगम, कुलदीप निगम वृद्धाश्रम माना कैम्प के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार निगम , प्रीति निगम , आशीष निगम , समस्त शिक्षक के अतिरिक्त बड़ी संख्या में बच्चों के पालकगण उपस्थित रहे।