रायपुर
छत्तीसगढ़ सहित 9 राज्यों में धूल भरी आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी
रियल एस्टेट के कर्मचारी के साथ डूमरतराई में लूटपाट
जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक
रायपुर। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जशपुर जिले में खाद, बीज एवं कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि एवं सहकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उप संचालक कृषि एमआर भगत ने बताया कि किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दे रहा है।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इससे किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है और समय तथा परिवहन व्यय दोनों में कमी आई है।
वर्तमान में जिले की 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 3,681 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार 6,836 क्विंटल धान बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए खाद एवं बीज का भंडारण लगातार बढ़ाया जा रहा है।
कृषि ऋण वितरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसमें 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद तथा 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इस सहायता से किसानों को समय पर कृषि निवेश करने और खेती की लागत वहन करने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार निरीक्षण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, हरी खाद एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।
हाउसिंग बोर्ड की करोड़ों की जमीन पर निजी बिल्डर का कब्जा, चला बुलडोजर!
रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रायपुर के सेजबहार फेस-1 कॉलोनी में बड़ी कार्रवाई करते हुए हाउसिंग बोर्ड की भूमि को अतिक्रमणमुक्त करा लिया है। यहां एक निजी बिल्डर द्वारा बिना अनुमति के अवैध रूप से सड़क का निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे मंडल की टीम ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले रसूखदार बिल्डरों को बख्शा नहीं जाएगा। मंडल द्वारा मुक्त कराई गई इस भूमि पर भविष्य में नई आवासीय परियोजना विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों और मध्यम वर्ग के परिवारों को किफायती दरों पर आवास मिलने का रास्ता साफ होगा।
यह मामला वर्ष 2006 से जुड़ा है, जब दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के आदेश पर ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई थी। इस जमीन पर कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवास बनाए जाने थे, जिनमें से 1366 आवासों का निर्माण तो हो गया, लेकिन भूमि विवाद के कारण 79 आवासों का निर्माण रुक गया था।
हाल ही में जब राजस्व अभिलेखों के आधार पर मंडल ने अपनी करीब 18 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कराया, तो पता चला कि एक निजी बिल्डर इस विवादित हिस्से पर अवैध कब्जा कर सड़क बना रहा है। इसके बाद कार्यपालन अभियंता श्री नितेश कश्यप और संपदा अधिकारी श्री अमृत लाल बरमन के नेतृत्व में पहुंची अधिकारियों की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को हटा दिया।
कुल आवंटित भूमि: ग्राम सेजबहार और दतरेंगा की 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) जमीन।
प्रस्तावित आवास: योजना के तहत कुल 1435 एलआईजी मकानों का निर्माण होना था।
निर्मित आवास: स्वीकृत ले-आउट के तहत कुल 1366 आवासों का निर्माण पूरा किया गया।
लंबित आवास: भूमि विवाद के चलते 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका था, जिस पर बिल्डर की नजर थी।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अधिकारियों के मुताबिक, मुक्त कराई गई यह भूमि मंडल की अत्यंत महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही विभाग अब इस पूरी पॉकेट पर एक नई आवासीय परियोजना की रूपरेखा तैयार कर रहा है, ताकि क्षेत्र का व्यवस्थित विकास हो सके।
डॉ. रमन सिंह द्वारा छत्तीसगढ़ की जैन विरासत का उल्लेख समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षणः जैन इंटरनेशनल फोरम
रायपुर। ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विशाल सामाजिक एवं धार्मिक गरिमा से संपन्न कार्यक्रम में जैन आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वी भगवंतों की पावन उपस्थिति के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रीगण, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, अनेक प्रदेश मंत्री, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ऐसे पवित्र, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के मंच से पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ. रमन सिंह ने सिरपुर, आरंग, मल्हार सहित छत्तीसगढ़ की प्राचीन जैन विरासत एवं पुरातात्विक धरोहरों का हजारों समाजबंधुओं के समक्ष सम्मानपूर्वक उल्लेख किया जाना जैन समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक क्षण है।
जैन इंटरनेशनल फोरम के महासचिव और यूनेस्को वोलंटीएर प्रवीण प्रकाशचंद जैन ने बताया कि डॉ. रमन सिंह जी का यह उद्बोधन केवल जैन समाज का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बहुआयामी सभ्यतागत विरासत का अभिनंदन है। सिरपुर, आरंग और मल्हार जैसे स्थलों में जैन धर्म की प्राचीन, शांतिपूर्ण और गौरवशाली उपस्थिति रही है। इन धरोहरों को इस ऐतिहासिक अवसर पर, इतने बड़े सार्वजनिक एवं राष्ट्रीय महत्व के मंच से प्रतिध्वनित किया जाना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और पुरातात्विक विरासत से जोड़ने वाला प्रेरणादायी प्रयास है। डा सिंह के प्रति आभार इसलिए भी जरुरी है की उन्होंने उपस्तिथि युवाओं और समाजजनों का अवहां किया की इन स्थलों के संरक्षण, शोध, दस्तावेजीकरण, जन-जागरण और पर्यटन-परिपथ से जोड़ने की दिशा में समाज, शासन, पुरातत्व विशेषज्ञों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों को मिलकर कार्य करना चाहिए। जैन इंटरनेशनल फोरम की ओर से कार्यक्रम में CA विकास जैन, चंद्रकांत लुंकड, हर्ष बैद, उत्तम संख्लेचा, अमित बरडिया, ने भी उपथित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल और लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर किया उन्हें नमन
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के लोकभवन आगमन पर उनका आत्मीय स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और ओम बिड़ला ने लोकभवन में वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
लोक भवन में उपस्थित विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना एवं लोक भवन के अन्य अधिकारियों कर्मचारियों ने भी रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि दी।
मानसून का माहौल बनने वाला है छत्तीसगढ़ में, अगले 5 दिनों तक बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी विदर्भ और तेलंगाना होते हुए दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश तक समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक द्रोणिका सक्रिय है। वहीं पूर्वी विदर्भ और उससे लगे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं: रमेन डेका
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।
कफ सीरप अब डॉक्टर पर्ची दिखाने पर ही मिलेगी
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से कफ सीरपों के जिम्मेदार वितरण और बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इन कदमों के जरिए भारत सरकार, कफ सीरपों की बिक्री पर अपनी निगरानी बढ़ा रही है. बीते साल अक्टूबर में मिलावट वाली कफ सीरप के चलते कई बच्चों की मौत होने के बाद सरकार ने इस मामले में सख्ती बढ़ाई है.
मुकुट नगर में आवारा पशुओं का आतंक, सांड के हमले में युवक घायल
कॉलोनीवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि आवारा पशुओं और कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि सड़क पर चलना अब सुरक्षित नहीं रह गया है और हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इस कारण क्षेत्र में रहने वाले लोग लगातार प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। नगर निगम प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन घटना के बाद लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।
भारतीय जैन संगठना ने अंतर्राष्ट्रीय फादर्स डे का आयोजन महाराष्ट्र मंडल के सभागार में गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन महानगर अध्यक्ष वैभव जी गोलछा ने किया तथा प्रकाश चंदजी चोपड़ा ने आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के चौड़ीकरण के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भूमि लेन-देन पर रोक
रायपुर : राष्ट्रीय राजमार्ग-130 (कटघोरा-शिवनगर-अम्बिकापुर) के उन्नयन एवं फोरलेन निर्माण कार्य को सुचारू और समयबद्ध रूप से पूरा करने के उद्देश्य से कलेक्टर अजीत वसंत ने प्रभावित क्षेत्रों में भूमि के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण, खाता विभाजन तथा व्यपवर्तन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जिले में प्रस्तावित बायपास, री-अलाइनमेंट और मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी है। भूमि अर्जन के दौरान लगातार हो रहे क्रय-विक्रय, नामांतरण और खाता विभाजन से स्वामित्व सत्यापन, हिस्सेदारी निर्धारण और मुआवजा तय करने में जटिलताएं उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
आदेश के तहत प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने से लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक राष्ट्रीय राजमार्ग-130 की मध्य रेखा से दोनों ओर 50-50 मीटर की सीमा के भीतर स्थित तहसील उदयपुर के ग्राम साल्ही, गुमगा, डांड़गांव, मनोहरपुर, दावा, विशुनपुर, पण्डरीडांड़, सोनतराई, डूमरडीह, उदयपुर, झिरमिटी और जजगा, तहसील लखनपुर के ग्राम अमगसी, अंधला, जुड़वानी, केंवरा, केंवरी, लहपटरा, रजपुरीकला और सिंगीटाना तथा तहसील अम्बिकापुर के ग्राम भिट्ठीकला, जोगीबांध, माझापारा, मेन्ड्राकला, सांड़बार, सुन्दरपुर और उदयपुर ढाब की भूमि प्रतिबंधित श्रेणी में रहेगी।
इसके अलावा नगर पंचायत लखनपुर, ग्राम पंचायत हंसडांड़ और ग्राम पंचायत कुंवरपुर के प्रस्तावित री-अलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली सम्पूर्ण भूमि पर भी क्रय-विक्रय, हस्तांतरण, खाता विभाजन एवं व्यपवर्तन पर रोक लागू रहेगी। यह निर्णय राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के चौड़ीकरण एवं फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और विवादरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित अमल, ग्रामीणों की मांगों को मिली स्वीकृति
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है।
उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है।
राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।
शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
30 स्कूली बसों की जांच... चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण और 45 स्कूल संचालक को नोटिस
रायपुर। स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।
विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें। जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने संबंधी राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य की प्रमुख नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में प्रवाहित हो रही नदियों के पुर्नजीवन हेतु किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। नदियों का संरक्षण से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में बैठक में जिलों के कलेक्टरों से नदियों के कैचमेंट एरिया में बनायी गई विविध जल संरक्षण एवं संचयन की कार्य योजनाओं को लेकर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि हाईकोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार नदियों के पुनर्जीवित एवं पुनरूद्धार के कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे जनउपयोगी कार्यों को लिया जाए जो भविष्य में नदियों के आस-पास रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो। मुख्य सचिव ने नदियों के कैचमेंट एरिया में किए जाने वाले कार्यों से स्थानीय सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से जोड़ने के लिए कहा। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिले से उद्गम होने वाली नदियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी रखी जाए। जिससे नदियों के बारे में छात्रों को जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं का भ्रमण नदियों के उद्गम स्थल पर कराया जाए और नदियों की जानकारी के संबंध में छात्रों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। कलेक्टर ने नदियों के उद्गम स्थलों पर मेला उत्सव जैसे आयोजनों को करने के लिए भी कहा। बैठक में कलेक्टर रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिले में स्थित नदियों की वास्तविक स्थिति और संचालित कार्ययोजनाओं एवं परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टरों को नदियों के संरक्षण, संवर्धन के लिए जिला स्तरीय समितियों के संबंध में जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नदियों के कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण, जल ग्रहण, वाटर रिचार्ज और आवश्यकतानुसार जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीरामजी, कैम्पा, नरेगा, डीएमएफ सहित अन्य मदो से विविध कार्ययोजना बनाने कहा है। नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार कर कार्यवाही करने कहा है। इसी तरह से नदियों में किसी भी तरह के अपशिष्ट नहीं डाले जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए है। बैठक में प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण के संबंध में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसी तरह से एनआईटी के प्रोफेसर जल विज्ञानी श्री इश्तियाक अहमद ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नदी जल संरक्षण और पर्यावरण सहित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन, खनिज, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए।
कथासरित्सागर... 70 मिनट की प्रस्तुति में नजर आई 11वीं सदी
रायपुर। इस संसार में कुछ नियत है तो वो है मात्र परिवर्तन... और हर परिवर्तन के पीछे कह कहानी छुपी होती है। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मंचित नाटक कथा में 11वीं शताब्दी के महाकवि सोमदेव की कालजयी रचना कथासरित्सागर पर आधारित इन नाटक का प्रारंभ देवादिदेव महादेव द्वारा माता पार्वती को कथा सुनाने से शुरू होती है। जिसमें सात कथाएं हैं इन सात कथा की हर कथा के भीतर 100 कथाएं। उन्हीं में एक कथा मगध के राजा नंद की थी। नाट्य संस्था रंगभूमि की इस प्रस्तुति का निर्देशन किशोर वैभव ने किया।
नाटक के प्रारंभ में महादेव माता पार्वती को ऐसी कथा सुनाने है, जिसे आज तक किसी ने नहीं सुनी थी। लेकिन गण पुष्पदंत माल्यवान की मदद से शुक का रुप धारण कर कथा सुन लेता है। इतनी ही नहीं पुष्पदंत ने यह कथा अपनी पत्नी को भी सुना दी। एक दिन माता पार्वती पुष्पदंत की पत्नी को एक कथा सुनाना शुरू करती है, तभी पुष्पदंत की पत्नी जया बताती है उसे यह कथा पहले से पता है। इस बात से माता पार्वती क्रोधित होती है जया से पुछती है कि तुमने यह कथा किससे सुनी और फिर वह महादेव का आह्वान करती है और पुष्पदंत और माल्यवान को धरती पर जन्म देने का श्राप देती है। यहां से कथा नई दिशा में बढ़ जाती है।
इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक में सूत्रधार और पुष्पदंत की भूमिका हेमंत यादव, शिव की भूमिका निलेश पटेल, माता पार्वती की भूमिका अक्षदा मातुरकर, माल्यवान एवं सोमदत्त की भूमिका में आदित्य अखंड नजर आए। वहीं राजा नंद की भूमिका के साथ आदित्य दास ने न्याय किया। रानी की भूमिका आस्था जांगड़े, वररूचि की भूमिका विजय शर्मा ने निभाई। संगीत चैतन्य मोड़क, प्रकाश संयोजन लोकेश साहू तथा अभिकल्पना और निर्देश किशोर वैभव का रहा। पूरे आयोजन में विशेष सहयोग और मार्गदर्शन आचार्य रंजन मोड़क ने दिया।