देश-विदेश
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ने दिल्ली स्थित विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की
इस बातचीत का फोकस विकसित भारत: विजन 2047 के अनुरूप मंत्रालय की कई पहलों पर रहा, जिसमें डिजिटल रूपांतरण, हरित गतिशीलता (मोबिलिटी), समावेशी वृद्धि और टिकाऊ विकास के माध्यम से विश्व स्तरीय सड़क नेटवर्क की परिकल्पना की गई है
नई दिल्ली | भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन ने नई दिल्ली स्थित विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।
इस दौरान सचिव ने पिछले दशक में भारत के राजमार्ग क्षेत्र और परिवहन क्षेत्र में हुए प्रमुख विकास को रेखांकित किया। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण विस्तार, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग और टिकाऊ अभ्यासों को बढ़ावा देना शामिल है।

इसके अलावा उन्होंने भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी सोच के बारे में भी जानकारी दी, जो राष्ट्रीय रोडमैप- विकसित भारत: विजन 2047 में शामिल है, जिसमें डिजिटल रूपांतरण, हरित गतिशीलता (मोबिलिटी), समावेशी वृद्धि और टिकाऊ विकास द्वारा संचालित विश्व स्तरीय सड़क नेटवर्क की परिकल्पना की गई है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारत ने ‘भारत में आदिवासी शिक्षा : समस्याएं, नीतियां और परिप्रेक्ष्य’ पर खुली चर्चा का आयोजन किया
आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष विजया भारती सयानी ने सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील ऐसी शिक्षा प्रणाली का आह्वान किया जो आदिवासी समुदायों की विविध विरासत को जोड़ती हो और सम्मान करती हो
चर्चा में आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली विशिष्ट शैक्षिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने और उनका समाधान करने के लिए विश्वविद्यालयों में आदिवासी-केंद्रित शोध की आवश्यकता बताते हुए प्रयोगसिद्ध डेटा की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया
नई दिल्ली | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने नई दिल्ली में अपने परिसर में ‘भारत में आदिवासी शिक्षा: समस्याएं, नीतियां और परिप्रेक्ष्य’ पर हाइब्रिड मोड में एक खुली चर्चा का आयोजन किया। इस चर्चा की अध्यक्षता करते हुए आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष विजया भारती सयानी ने सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील ऐसी शिक्षा प्रणाली का आह्वान किया जो आदिवासी समुदायों की विविध विरासत को जोड़े और सम्मान करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने और उनकी सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे भौगोलिक अलगाव, भाषाई अंतर, गरीबी और पर्याप्त प्रगति तथा विभिन्न सरकारी पहलों के बावजूद कम उम्र में विवाह जैसी जारी कुप्रथाओं को दूर किया जा सकेगा।

विजया भारती सयानी ने कहा कि आयोग सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वकालत करने, वर्तमान कार्यक्रमों का आकलन करने और आदिवासी शिक्षा में समावेशिता तथा समान विकास को बढ़ावा देने के लिए किसी भी तरह की खामियों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए सरकारी निकायों, गैर सरकारी संगठनों और आदिवासी समूहों के बीच सहयोगात्मक निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इससे पहले, अपने उद्घाटन भाषण में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के महासचिव भरत लाल ने आदिवासी शिक्षा की खामियों पर प्रकाश डाला और इन समुदायों में शैक्षिक परिणामों को बढ़ाने और उनके उत्थान के लिए लक्षित कार्यक्रम लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में कम साक्षरता दर और पढ़ाई के दौरान ही स्कूल छोड़ देने की उच्च दर अक्सर विशिष्ट चुनौतियों की वजह से होती हैं। इन चुनौतियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक अपर्याप्त पहुंच, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक पाठ्यक्रम की कमी, खराब शिक्षक-छात्र अनुपात और अपर्याप्त शैक्षिक बुनियादी ढांचा शामिल हैं।
लाल ने न्यायसंगत और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन खामियों को दूर करने के महत्व पर जोर दिया, ताकि प्रत्येक आदिवासी बच्चे को सफल होने का समान अवसर मिले। उन्होंने आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में आदिवासी प्रतिनिधित्व में सुधार लाने, लक्षित छात्रवृत्ति कार्यक्रम चलाने, मेंटरशिप और प्रारंभिक पाठ्यक्रमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि शैक्षिक विभाजन को पाटा जा सके और आदिवासी छात्रों को इन प्रतिष्ठित संस्थानों में उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद मिल सके।
इससे पहले, खुली चर्चा का अवलोकन करते हुए, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संयुक्त सचिव देवेंद्र कुमार निम ने आदिवासी छात्रों के बीच स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने की उच्च दरों और घटते सकल नामांकन अनुपात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसकी वजहों की पहचान करने, मौजूदा नीतियों का विश्लेषण करने, अधिक समावेशी शैक्षिक प्रणाली को आकार देने और भारत में आदिवासी आबादी के लिए एक उज्जवल और न्यायसंगत भविष्य सुनिश्चित करने के लिए विविध दृष्टिकोणों का पता लगाने के लिए लक्षित प्रयास करने और व्यापक चर्चा का आह्वान किया।
इस बैठक में आदिवासी शिक्षा में खामियों तथा चुनौतियों की पहचान करना, मौजूदा नीतियों तथा कार्यक्रमों का विश्लेषण करना और दृष्टिकोण तथा आगे के तरीकों की खोज करने जैसे कई प्रमुख एजेंडे शामिल थे। चर्चाओं के केंद्र में आदिवासी समुदायों के लिए शैक्षिक पहुंच में लगातार बाधाओं, जैसे भौगोलिक अलगाव, भाषाई अंतर और सामाजिक-आर्थिक मुद्दे थे। आश्रम विद्यालयों और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) जैसी मौजूदा पहलों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया ताकि सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके।
बाढ़ में फंसे लोगों की जान बचाने खुद गहरे पानी में उतरी क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की विधायक पत्नी
डेस्क। गुजरात में लगातार हो रही बारिश ने भारी तबाही मचा रखी है, खबरों के मुताबिक अभी तक वहां बारिश के कहर से 25 से ज्यादा लोगों जान चली गई है। जामनगर उत्तर से भाजपा विधायक रिवाबा जडेजा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो गहरे पानी में उतरी दिख रही हैं, लोग उनके इस काम की खूब सराहना कर रहे हैं।
પ્રકૃતિને પહોંચી ન વળીએ પણ આપણા લોકોનો બચાવ કરી મદદ તો જરૂર કરી શકીએ ???? pic.twitter.com/tkKAVHcVyr
— Rivaba Ravindrasinh Jadeja (@Rivaba4BJP) August 28, 2024
इस वीडियो में रिवाबा गहरे पानी में उतरकर बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने का काम कर रही हैं। रिवाबा बचाव कर्मियों के साथ पानी में जाकर लोगों की मदद कर रही हैं। लोग रिवाबा जडेजा के इस काम की खूब तारीफ कर रहे हैं वहीं क्रिकेटर रविंद्र जडेजा ने भी पत्नी की तारीफ की है, रेस्क्यू टीमें बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहीं हैं।
राज्य के कुछ हिस्सों में बुधवार को लगातार चौथे दिन भी भारी बारिश जारी है। वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाकों में से 17,800 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जान गंवाने वालों में वे सात लोग शामिल हैं जो रविवार को मोरबी जिले के हलवद तालुका के धवना गांव के पास एक पुल को पार करते समय एक ट्रैक्टर ट्रॉली के बह जाने के बाद लापता हो गए थे। इस पुल से होकर पानी बह रहा था। उन्होंने बताया कि उनके शव बरामद कर लिए गए हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से होने वाली सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर सैद्धांतिक स्वीकृति
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में नदी जोड़ो परियोजनाओं, विशेषकर केन-बेतवा लिंक परियोजना के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री पाटिल को बताया कि मध्यप्रदेश राज्य नदी-जोड़ो अभियान में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश संयुक्त रूप से महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम कर रहे हैं, जो विश्व में अपने प्रकार की अद्वितीय परियोजना है। मध्यप्रदेश में इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 10 जिलों को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की सुविधा प्राप्त होगी। बुंदेलखंड एक ऐसा क्षेत्र है जिसने कभी भी अपनी संप्रभुता दिल्ली सल्तनत अथवा मुगल शासकों के अधीन नहीं की परंतु पानी के अभाव में दुर्भाग्यवश यह क्षेत्र संसाधनहीन हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा परियोजना के माध्यम से इस क्षेत्र का चहुमुखी विकास होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री ने राज्य को दौधन बांध एवं लिंक नहर के भू-अर्जन एवं पुनर्विस्थापन के लिये केन्द्र से प्राप्त होने वाली शेष 1150 करोड़ रूपए की राशि शीघ्र जारी करवाने को आश्वस्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुरोध किया कि स्वीकृत केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत वर्तमान में प्रावधानित दमोह- पन्ना उद्वहन सिंचाई योजना से 90,100 हैक्टेयर सिंचाई के स्थान पर लगभग 2,50,000 हैक्टेयर की मध्यप्रदेश की पत्ने एवं ब्यरमा सिंचाई परियोजना को शामिल किया जाना उचित होगा। इस संबंध में संशोधित डीपीआर राज्य शासन द्वारा भेजी जा रही है, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजस्थान के साथ भारत सरकार द्वारा स्वीकृत 70,000 करोड़ रुपए की पार्वती-कालीसिंध चंबल परियोजना के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है जो समीपवर्ती राज्यों के साथ नदियां जोड़ने के अलावा अन्तर्राज्यीय नदियों को जोड़ने पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि कान्ह और गंभीर नदियों को जोड़ने का प्रारंभिक तौर पर प्रस्ताव बनाया जा रहा है, जिसे केंद्रीय मंत्री ने सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है।
सकारात्मक सोच से उद्योगों के विकास का समन्वित प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल नीतियों और वातावरण के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी स्वागत व अभिनंदन का भाव रहेगा। प्रदेश में सकारात्मक सोच के साथ औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। ग्वालियर आरआईसी में 8 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे 35 हजार से अधिक रोजगार के नवीन अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर 1586 करोड़ रूपए की लागत से प्रदेश में 47 नई औद्योगिक इकाइयों का सिंगल क्लिक से भूमिपूजन और लोकार्पण किया। यह कॉन्क्लेव विरासत, इतिहास और उद्योग की थीम पर केन्द्रित है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल कॉन्क्लेव मात्र कहने के लिये रीजनल हैं, हकीकत में यह कॉन्क्लेव राज्य स्तरीय है। इन औद्योगिक इकाइयों के प्रांरभ होने से स्पंदन पूरे प्रदेश में होना है। मंच पर 5 औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटन पत्र भी प्रदान किए गए। इसके साथ ही ग्वालियर-चंबल जिले के 8 जिला स्तरीय इंडस्ट्री फेसिलिटेशन सेंटर का शुभारंभ किया गया। ये केन्द्र ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया, गुना और अशोकनगर में आज से ही प्रांरभ हो गए हैं। कॉन्क्लेव में मेक्सिको, जाम्बिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में निजी क्षेत्र में बड़ा चिकित्सालय भी खोला जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कॉन्क्लेव के आयोजन के पीछे यह भाव भी है कि उद्योगपति प्रदेश की विशेषताओं को आकर स्वयं देखें और मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापना का निर्णय लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज ग्वालियर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य अतिथियों के साथ इस वर्ष की तृतीय रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का ग्वालियर में दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में राजमाता श्रीमती विजयाराजे सिंधिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के उद्योग विकास की संभावनाओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनुकूलता से उद्यमशीलता का विकास और तीव्र गति से संभव है। उद्योग और निवेश की दृष्टि से ग्वालियर प्रमुख केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने इंदौर की हुकुमचंद मिल के श्रमिकों को मुआवजा राशि दिलवाने का कार्य किया गया है। यह कार्य अनेक वर्ष से लंबित था। रुग्ण औद्योगिक इकाइयों की समस्याएं भी हल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब ऐसे अन्य मामलों के लिए जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। जे.सी. मिल ग्वालियर की समस्या भी हुकुमचंद मिल की तर्ज पर हल की जाएगी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 234 नए शहरों/कस्बों में निजी एफएम रेडियो शुरू करने को मंजूरी दी
इस कदम से मातृभाषा में स्थानीय कंटेंट को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है
कवर किए गए नए क्षेत्रों में कई आकांक्षी, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और सीमावर्ती क्षेत्र भी शामिल हैं
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने निजी एफएम रेडियो चरण-3 नीति के अंतर्गत 234 नए शहरों में 730 चैनलों के लिए 784.87 करोड़ रुपये के अनुमानित आरक्षित मूल्य के साथ तीसरे बैच की आरोही (बढ़ती हुई बोली) ई-नीलामी करवाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

शहरों/कस्बों की राज्यवार सूची और नई नीलामी के लिए स्वीकृत निजी एफएम चैनलों की संख्या अनुलग्नक के रूप में यहां संलग्न है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को छोड़कर एफएम चैनल के वार्षिक लाइसेंस शुल्क (एएलएफ) के रूप में सकल राजस्व का 4 प्रतिशत लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। ये 234 नए शहरों/कस्बों के लिए लागू होगा।
234 नए शहरों/कस्बों में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत से उन शहरों/कस्बों में एफएम रेडियो की अधूरी मांग पूरी होगी, जो अभी भी निजी एफएम रेडियो प्रसारण से अछूते हैं और मातृभाषा में नए/स्थानीय कंटेंट पेश करेंगे।
इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय बोली और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल को बढ़ावा मिलेगा। अनुमोदित किए गए ऐसे कई शहर/कस्बे आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हैं। इन क्षेत्रों में निजी एफएम रेडियो की स्थापना से इन क्षेत्रों में सरकारी पहुंच और सुदृढ़ होगी।
वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय मिशन : प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने सफलतापूर्वक एक दशक पूरा किया
पीएमजेडीवाई ने गरीबों को आर्थिक मुख्यधारा में शामिल किया और हाशिये के समुदायों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
जन-धन, मोबाइल एवं आधार को लिंक करते हुए सहमति आधारित पाइपलाइन वित्तीय समावेशन परिवेश का एक सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को पात्र लाभार्थियों के खाते में त्वरित, निर्बाध एवं पारदर्शी तरीके से हस्तांतरित करने में सक्षम बनाया है और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
पीएमजेडीवाई न केवल मिशन मोड में शासन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अगर सरकार लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हो तो वह क्या हासिल कर सकती है: वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी
पीएमजेडीवाई की शुरुआत के बाद से अब तक 53.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिली बैंकिंग सुविधा
पीएमजेडीवाई खातों में कुल जमा रकम 2,31,236 करोड़ रुपये है

पीएमजेडीवाई खाते मार्च 2015 में 15.67 करोड़ से 3.6 गुना बढ़कर 14 अगस्त 2024 तक 53.14 करोड़ हो गए
करीब 55.6 प्रतिशत जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं और लगभग 66.6 प्रतिशत जन-धन खाते ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में हैं
पीएमजेडीवाई खाताधारकों को 36.14 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) आज सफलतापूर्वक एक दशक पूरा कर रही है।
नई दिल्ली | पीएमजेडीवाई दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन कार्यकम है। वित्त मंत्रालय अपने वित्तीय समावेशन प्रयासों के जरिये हाशिए के समुदायों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करने का निरंतर प्रयास करता रहा है।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा, “वित्तीय समावेशन एवं सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक बैंकिंग सेवाओं तक सभी की आसान पहुंच आवश्यक है। यह गरीबों को आर्थिक मुख्यधारा में एकीकृत करता है और हाशिए के समुदायों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “बैंक खाते, लघु बचत योजनाएं, बीमा एवं ऋण सुविधा सहित तमाम सार्वभौमिक, सस्ती एवं औपचारिक वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हुए पीएम जन-धन योजना ने पिछले एक दशक में देश के बैंकिंग एवं वित्तीय परिदृश्य को बदल दिया है।”
सीतारमण ने कहा, “इस कार्यक्रम की सफलता इसी बात से परिलक्षित होती है कि जन-धन खाते खोलकर 53 करोड़ लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया जा चुका है। इन बैंक खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये जमा हुए है और इसके परिणामस्वरूप 36 करोड़ से अधिक निःशुल्क रुपे कार्ड जारी किए गए हैं जो 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान करते हैं। गौरतलब है कि यह खाता खोलने के लिए कोई शुल्क या रखरखाव शुल्क नहीं लिया जाता है और इसके लिए खाते में न्यूनतम शेष राशि को बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं है।”
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “यह जानकर खुशी हो रही है कि 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण अथवा कस्बाई क्षेत्रों में खोले गए हैं और 55 प्रतिशत खाते महिलाओं द्वारा खोले गए हैं।”
सीतारमण ने कहा, 'जन-धन, मोबाइल और आधार को लिंक करते हुए तैयार की गई सहमति आधारित पाइपलाइन वित्तीय समावेशन परिवेश के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में शामिल है। इसने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को पात्र लाभार्थियों के खाते में त्वरित, निर्बाध एवं पारदर्शी तरीके से हस्तांतरित करने में सक्षम बनाया है और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है।'
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा, “पीएमजेडीवाई महज एक योजना ही नहीं है बल्कि यह एक परिवर्तनकारी अभियान है, जिसने बैंकिंग सेवाओं से वंचित तमाम लोगों को वित्तीय आजादी प्रदान की है और उनमें वित्तीय सुरक्षा की भावना पैदा की है।”
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 14 अगस्त 2024 तक खोले गए खातों की कुल संख्या 53.13 करोड़ है। इसमें 55.6 प्रतिशत (29.56 करोड़) जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं और 66.6 प्रतिशत (35.37 करोड़) जन-धन खाते ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में हैं।
उत्तराखंड में मौसम पहले से बेहतर : केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया
नई दिल्ली | उत्तराखंड में मौसम पहले से बेहतर होने के बाद एक बार फिर केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है | अधिकारियों के अनुसार, पैदल मार्ग सोमवार को तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से फिर से खोल दिया गया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 31 जुलाई की रात को उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में हुई भारी बारिश में व्यापक क्षति के बाद गौरीकुंड से केदारनाथ तक का मार्ग पिछले 26 दिनों से बंद था | 19 किलोमीटर का यह मार्ग 29 स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था और मलबे के कारण सड़क अवरुद्ध हो थी।
रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने कहा कि मार्ग अब घोड़ों और खच्चरों के लिए भी पूरी तरह से फिर से खोल दिया गया है, जिनका उपयोग तीर्थयात्रियों को मंदिर तक ले जाने के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा कि मार्ग के माध्यम से घोड़ों और खच्चरों पर राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी फिर से शुरू हो गई है | मार्ग पर बारिश के कारण हुए भूस्खलन के कारण हजारों लोग फंसे हुए थे, जिसके कारण प्रशासन को निजी हेलिकॉप्टरों के अलावा भारतीय वायुसेना के चिनूक और एमआई17 हेलीकॉप्टरों की मदद से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू करना पड़ा था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की निगरानी में सप्ताह भर चले बचाव अभियान के दौरान तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों सहित 11,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया था।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत और सिंगापुर के बीच मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल होंगी
नई दिल्ली | केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत और सिंगापुर के बीच मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल होंगी। भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने चांगी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्मला सीतारमण का स्वागत किया। इस दौरान सिंगापुर में भारत की उप उच्चायुक्त पूजा टिल्लू भी मौजूद रहीं।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि “यह बैठक दोनों पक्षों को अपनी रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने और इसे आगे बढ़ाने व व्यापक बनाने के लिए नए रास्तों की पहचान करने में सक्षम बनाएगी।” बता दें कि आईएसएमआर भारत-सिंगापुर द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक नया एजेंडा निर्धारित करने के लिए स्थापित एक उच्च स्तरीय व्यवस्था है। आईएसएमआर की दूसरे राउंड बैठक में भारत और सिंगापुर अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने और नए आयाम तलाशने पर चर्चा करेंगे।

दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक जैसे विचार रखते हैं और कई मंचों जैसे, ईस्ट एशिया समिट, जी-20, कॉमनवेल्थ, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन और इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम के सदस्य हैं। सिंगापुर भारत के लिए एफडीआई का एक प्रमुख स्रोत रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में, सिंगापुर भारतीय बाजारों में 11.77 अरब डॉलर के निवेश के साथ एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत था। अप्रैल 2000 से मार्च 2024 तक सिंगापुर से एफडीआई का कुल प्रवाह 159.94 अरब डॉलर था।
भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल भी होंगे। इस दौरान, भारतीय मंत्री अपने समकक्षों के साथ बातचीत करेंगे। भारत और सिंगापुर के बीच आईएसएमआर की पहली बैठक सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुई थी।
भारतीय तटरक्षक ने समन्वित अभियान में रात के समय साहसिक बचाव कार्य करते हुए 11 लोगों की जान बचाई
नई दिल्ली | भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) ने 26 अगस्त, 2024 को रात के समय एक चुनौतीपूर्ण खोज एवं बचाव अभियान के दौरान संकट में फंसे एमवी आईटीटी प्यूमा के चालक दल के 11 सदस्यों को बचाया। मुंबई में पंजीकृत यह सामान्य मालवाहक जहाज कोलकाता से पोर्ट ब्लेयर जाने के रास्ते में था, जब वह कथित तौर पर सागर द्वीप (पश्चिम बंगाल) से लगभग 90 समुद्री मील दक्षिण में डूब गया।
शुरुआत में, समुद्री खोज एवं बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) चेन्नई को 25 अगस्त, 2024 को देर शाम एक संकट संबंधी संकेत प्राप्त हुआ। कोलकाता स्थित आईसीजी के क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तर पूर्व) ने तुरंत आईसीजी के दो जहाजों और एक डोर्नियर विमान को उक्त स्थल पर भेजा। रात के समय उपयोग योग्य उन्नत सेंसरों से सुसज्जित डोर्नियर विमान ने भटकते हुए जीवनरक्षक नौकाओं को ढूढ़ लिया और उसे संकट में फंसे चालक दल की ओर से जीवित रहने संबंधी सूचक लाल रोशनी दिखाई दी।

विमान द्वारा निर्देशित, आईसीजी के जहाज उन निर्देशांकों पर पहुंचे जहां जीवित बचे लोगों के साथ दो जीवनरक्षक नौका एकसाथ बंधे हुए पाए गए। चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद, आईसीजी के जहाज सारंग और अमोघ ने, डोर्नियर विमान के साथ, 25 अगस्त की देर रात और 26 अगस्त की सुबह चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, एक समन्वित समुद्री-हवाई बचाव कार्य को पूरा किया।
विकसित और समृद्ध लद्दाख के निर्माण के विज़न को साकार करने की दिशा : गृह मंत्रालय ने संघशासित प्रदेश में 5 नए ज़िलों के गठन को मंज़ूरी दी
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, 5 नए जिलों – ज़ंस्कार, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग – में प्रशासन के सुदृढ़ होने से स्थानीय लोगों को उनके द्वार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा
मोदी सरकार लद्दाख के लोगों के लिए अपार संभावनाओं का सृजन करने के प्रति कटिबद्ध है
नये जिलों के निर्माण से सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाएं लोगों तक आसानी से पहुंचेंगी और अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित होंगे
यह महत्वपूर्ण निर्णय लद्दाख के सर्वांगीण विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के एक विकसित और समृद्ध लद्दाख के निर्माण के विज़न को साकार करने की दिशा में, गृह मंत्रालय ने संघशासित प्रदेश में 5 नए ज़िलों के गठन को मंज़ूरी दे दी है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि इस निर्णय से 5 नए ज़िलो – ज़ंस्कार, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग – में प्रशासन के सुदृढ़ होने से स्थानीय लोगों को उनके द्वार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। इन पांच जिलों के गठन के बाद अब लद्दाख में, लेह और कारगिल को मिलाकर, कुल सात जिले हो जायेंगे।

लद्दाख क्षेत्रफल के हिसाब से एक बहुत बड़ा संघशासित क्षेत्र है। वर्तमान में लद्दाख में दो जिले हैं - लेह और कारगिल। यह भारत के सबसे कम जनसंख्या वाले भूभागों में से एक है। अत्यंत कठिन और दुर्गम होने के कारण, वर्तमान में जिला प्रशासन को ज़मीनी स्तर तक पहुँचने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन जिलों के गठन के बाद अब केन्द्र सरकार और लद्दाख प्रशासन की सभी जनहित योजनाएं लोगों तक आसानी से पहुँच सकेंगी और अधिक से अधिक लोग उनका लाभ उठा सकेंगे। गृह मंत्रालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय लद्दाख के सर्वांगीण विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
पांच नए जिलों के गठन की “सैद्धांतिक स्वीकृति” देने के साथ ही गृह मंत्रालय ने लद्दाख प्रशासन को नए जिलों के गठन से संबंधित विभिन्न पहलुओं, जैसे, मुख्यालय, सीमाएं, संरचना, पदों के सृजन, जिला निर्माण से सम्बंधित कोई अन्य पहलू आदि के आंकलन के लिए एक समिति बनाने और उसे तीन महीने के अन्दर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। उक्त समिति की रिपोर्ट प्राप्ति के बाद, संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख इस रिपोर्ट के आधार पर नए जिलों के निर्माण के सम्बन्ध में अंतिम प्रस्ताव गृह मंत्रालय को आगे की कार्यवाही के लिए भेजेगा।
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार लद्दाख के लोगों के लिए अपार संभावनाओं का सृजन करने के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है।
भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म के मार्ग पर चलने का दिया संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमे धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। भगवान श्रीकृष्ण ने 11 साल की उम्र में शिक्षा का महत्व बतलाया और कर्म के आधार पर शिक्षा का पाठ भी पढ़ाया है। हमारा सनातन धर्म अदभुत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जन्माष्टमी पर्व की पूर्व संध्या पर पन्ना के श्री जुगल किशोर मंदिर परिसर में संस्कृति विभाग के श्री कृष्ण पर्व के कार्यक्रम में शामिल हुए और भगवान श्री जुगल किशोर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने प्रदेश की जनता के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना भी की। साथ ही मंदिर परिसर में भगवान श्री कृष्ण के जीवन प्रसंग से जुड़े प्रसंगों का बाल कलाकारों द्वारा प्रदर्शित झांकी का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आमजन जन्माष्टमी उत्सव आनंद और उल्लास के साथ मनाएं और श्रीकृष्ण भगवान के जीवन का स्मरण करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में धार्मिक स्थलों का विकास कर नया स्वरूप दिया जा रहा है। साथ ही बेहतर शिक्षा के लिए नवीन शिक्षा नीति लागू की गई है। देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में इस नीति को लागू किया गया है। नई शिक्षा नीति में धार्मिक शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। इससे निश्चित ही सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। पाठ्यक्रम में श्रीराम, श्रीकृष्ण के पाठ को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पन्ना के सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव मदद की जाएगी। छतरपुर में गत दिवस हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना सबके लिए बराबर है। किसी भी हालत में कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना की धरती को रत्नगर्भा बताया। साथ ही कहा कि बुन्देलखण्ड वीरता का परिचायक है। उन्होंने धार्मिक नगरी पन्ना के मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। मध्यप्रदेश के प्रत्येक नगरीय निकायों में गीता भवन की स्थापना की बात भी कही। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित पन्ना जिले में भगवान राम के आगमन से जुड़े स्थलों को विकसित करने के साथ ही श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को भी तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। सभी उपस्थितजनों को जन्माष्टमी और हरछठ पर्व की शुभकामनाएं दीं
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु वाणिज्य पर द्विपक्षीय बैठक की अध्यक्षता की
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में शामिल होने के लिए तैयार हैं
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और एसएमआर सहयोग के माध्यम से भारत वैश्विक जलवायु लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान करेगा: डॉ. सिंह
नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी भवन में आयोजित अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु वाणिज्य पर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर प्रकाश डाला गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि गगनयान मिशन से भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में शामिल होने के लिए तैयार हैं, जो भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने में, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में इस साझेदारी के महत्व पर जोर दिया, जो वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भारी उद्योग, परिवहन और बिजली उत्पादन को कार्बन मुक्त करने की भारत की रणनीति की आधारशिला बताया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह मिशन स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है। मजबूत नीतिगत ढांचे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत एक टिकाऊ और लचीले ऊर्जा भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी की संभावना पर कार्य कर रही है, शोध एवं विकास में निवेश कर रही है, तथा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) की तैनाती का समर्थन करने के लिए विनियामक ढांचों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि एसएमआर भारत के स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, ऊर्जा आत्मनिर्भरता में योगदान देंगे तथा जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।
भारत के "अनुसंधान" राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एनएसएफ) के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने में दोनों संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "पंचामृत" जलवायु कार्य योजना के महत्व के बारे में बताया, जिसमें गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को 1 बिलियन टन तक कम करने और अंततः वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. ए. के. सूद ने भारत-अमेरिका साझेदारी के महत्व को दोहराते हुए कहा कि यह केवल ज्ञान के आदान-प्रदान के संबंध में नहीं है, बल्कि ऐसे समाधानों का सह-निर्माण करने के बारे में है जो भविष्य को साकार रूप प्रदान करेंगे। उन्होंने सतत विकास और आर्थिक समृद्धि के लिए नए रास्ते प्रशस्त करने के लिए सहयोग की क्षमता पर जोर दिया।
पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. रवि चंद्रन ने समुद्री ऊर्जा और कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की प्रगति पर प्रकाश डाला, जबकि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने बायोमास से ऊर्जा रूपांतरण और पहली और दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन के सफल कार्यान्वयन पर भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
प्रो. अभय करंदीकर ने डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) और मशीन लर्निंग सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत की प्रगति के बारे में जानकारी साझा की, और इन क्षेत्रों में नवाचार के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक डॉ. एन कलैसेल्वी ने लिथियम-आयन बैटरी विकास और स्वदेशी बैटरी निर्माण में भारत की प्रगति पर चर्चा की और टिकाऊ और परिपत्र ऊर्जा भंडारण समाधान बनाने के महत्व पर जोर दिया।
उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति के अंतर्राष्ट्रीय जलवायु नीति के वरिष्ठ सलाहकार जॉन पोडेस्टा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग के उप सचिव डेविड टर्क कर रहे हैं।
बैठक का समापन दोनों देशों द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों में अपने सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि के साथ हुआ, जिसमें आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रौद्योगिकी प्रगति में वैश्विक नेतृत्व को बढ़ाने में आपसी हितों का समावेश शामिल थे।
क्लासमेट का अपहरण, एक घंटे तक कार में बंधक बनाकर की मारपीट
भोपाल। कोहेफिजा इलाके में स्थित निजी स्कूल के पास 10 वीं के छात्रों ने साथियों के साथ मिलकर अपने ही क्लासमेट का अपरहण कर लिया। स्कूल में बेंच हटाते समय एक छात्र के चोट लग गई थी, इसी का बदला लेने छात्रों ने स्कूल की छुट्टी के समय स्टेट बैंक चौराहे पर अपने दोस्तों को बुलाया और नाबालिग का अपहरण कर सैफिया कॉलेज ग्राउंड ले गए। वहां करीब एक घंटे तक कार में बंधक बनाकर उसे पीटते रहे।
इस बीच बच्चे के पिता को उसके दोस्तों ने कॉल पर सूचना दी। पिता ने बेटे के मोबाइल पर कॉल किया तो आरोपियों ने उनके साथ भी फोन पर बदसलूकी की। उन्हें सैफिया कॉलेज ग्राउंड बुलाया गया और देख लेने की धमकी दी गई। तब पिता पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे, तो आरोपी छात्र को वहीं छोड़कर अपनी कार से फरार हो गए। पुलिस ने पांच नाबालिग छात्रों के खिलाफ केस दर्ज कर चार लोगों को हिरासत में लिया है।
कोहेफिजा थाना प्रभारी बृजेन्द्र मर्सकोले ने बताया कि 15 वर्षीय नाबालिग शाहजानाबाद इलाके में रहता है। वह इलाके में स्थित टीएम कॉनेवंट स्कूल में 10 वीं का छात्र है। बुधवार सुबह स्कूल में वह बेंच हटा रहा था, तभी उसकी ही क्लास में पढ़ने वाले छात्र के पीठ में मामूली से चोट लग गई। इसी बात को लेकर उनका विवाद हो गया। बदला लेने के नीयत से छात्र ने शनिवार को स्कूल के बाहर अपने दोस्तों को बुला लिया। यहां से छात्रों ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर नाबालिग को स्कॉर्पियो में बैठा कर सैफिया कॉलेज ग्राउंड ले गए।
यहां नाबालिग के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी देकर छोड़कर भाग निकले। पुलिस ने नाबालिग आरोपियों के खिलाफ अपहरण व मारपीट का केस दर्ज कर किया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी छात्र नाबालिग है और कोहेफिजा इलाके के रहने वाले है। चार छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके बाद नाबालिगों को बाल न्यायायलय में पेश किया जाएगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईसीए वार्ता का 10वें दौर का आयोजन सिडनी में पांच ट्रैक पर किया गया
नई दिल्ली | भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (सीईसीए) वार्ता का 10वां दौर 19-22 अगस्त, 2024 को सिडनी में आयोजित किया गया। यह आयोजन माल, सेवा, डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, उत्पत्ति के नियम और कृषि तकनीक के क्षेत्रों में किया गया। इनमें से प्रत्येक ट्रैक पर गहन चर्चा की गई, जिससे शेष प्रावधानों में अभिसरण के लिए स्पष्टता और आपसी समझ का आयुर्भाव हुआ। 10वां दौर 9वें दौर के समापन से लगभग 5 महीने के अंतराल के पश्चात आयोजित किया गया। यद्यपि इन सभी ट्रैक के साथ-साथ अन्य शेष ट्रैक पर अभिसरण लाने के लिए इन दोनों दौर के बीच अंतर-सत्रीय बैठकें आयोजित की गईं।

सभी पांच ट्रैक पर आयोजित की गई वार्ताओं के परिणामों की रिपोर्ट मुख्य वार्ताकारों की संयुक्त बैठक को सौंप दी गई, जिसने उन्हें अपने भविष्य के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रशस्त किया। यह निर्णय लिया गया कि पांच ट्रैक के तहत एक-दूसरे के प्रस्तावों की स्पष्ट समझ को देखते हुए, दोनों पक्षों के ट्रैक लीड अगले दौर से पहले वर्चुअल मोड के माध्यम से वार्ता के लिए कार्य योजना तैयार करेंगे, जिसका आयोजन संभवतः भारत में किया जाएगा।
इसके अलावा, मुख्य वार्ताकारों ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की और भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ईसीटीए) के सकारात्मक प्रभावों के निर्माण के माध्यम से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसे 29 दिसंबर 2022 को कार्य रूप में लाया गया। दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए कि सीईसीए वार्ता दोनों पक्षों के लिए सार्थक लाभ और संतुलित परिणाम प्रदान करे।
सीईसीए वार्ता के माध्यम से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने और निवेश को बढ़ावा देने की व्यवहार्यता की खोज करते हुए, भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईसीए वार्ता के 10वें दौर के अवसर पर ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में ऑस्ट्रेलिया भारत व्यापार परिषद (एआईबीसी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष जोडी मैके, ग्रेन ट्रेड ऑस्ट्रेलिया के सीईओ पैट ओ'शैनसी और अन्य के साथ चर्चा हुई। सिडनी में भारत के सीजी ने भी चर्चा में भाग लिया। ऑस्ट्रेलियाई पक्ष द्वारा यह भी प्रकाश में लाया गया कि वे 23 सितंबर, 2024 को नई दिल्ली में भारत-ऑस्ट्रेलिया कृषि तकनीक फोरम (आईएएटीएफ), ऑस्ट्रेलिया द्वारा एक नवगठित मंच की पहली बैठक का आयोजन प्रस्तावित कर रहे हैं, जिसमें भारतीय कृषि हितधारक जैसे उद्योग, अनुसंधान संस्थान और सरकार द्वारा कृषि तथा बागवानी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ज्ञान साझा करने के अवसरों द्वारा पारस्परिक लाभकारी संबंधों का निर्माण होगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कृषि और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया द्वारा की जा रही शोध गतिविधियों को समझने के लिए सिडनी विश्वविद्यालय और सिकाडा इनोवेशन सेंटर का भी दौरा किया।
ऑस्ट्रेलिया भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापार और रणनीतिक साझेदार है। दोनों देश 14 देशों के इंडो पैसिफिक इकोनॉमिक फोरम फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) और त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (एससीआरआई) का हिस्सा हैं, जिससे क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन मजबूत होने की आशा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईसीए वार्ता का अगला दौर नवंबर 2024 में होने की संभावना है।
इजरायल की स्ट्राइक पर भड़का हिज्बुल्लाह, पलटवार में दाग दिए 320 रॉकेट्स!
डेस्क। इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध बढ़ता जा रहा है। इजरायली हमले से भड़के लेबनान ने उत्तरी इजरायल की ओर कम से कम 320 रॉकेट दागे हैं। हालांकि, आयरन डोम ने उत्तरी इजराइल में लेबनानी रॉकेटों को रोकने का प्रयास किया। अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हिज्बुल्लाह को सबक सिखाने के लिए सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई है।
इजरायल पर हमले को लेकर हिज्बुल्लाह की तरफ से भी बयान आया है. हिज्बुल्लाह का कहना है कि उसने इजराइल पर 320 से अधिक रॉकेट दागे हैं. हालांकि, इजरायल की तरफ से अभी 150 रॉकेट की पुष्टि की गई है. हिज्बुल्लाह ने कहा कि इजराइल के 11 सैन्य ठिकानों पर यह हमला किया गया।
हिज्बुल्लाह से खतरे को देखते हुए इजरायली सेना ने रविवार को लेबनान में अग्रिम हमलों की घोषणा कर दी इजरायल ने कहा कि हिज्बुल्लाह के हमलों की तैयारी का पता लगाने के बाद ये हमले किए गए. आईडीएफ ने हिज्बुल्लाह आतंकवादी संगठन की पहचान की है, जो इजरायली क्षेत्र की ओर मिसाइल और रॉकेट दागने की तैयारी कर रहा है. इजरायली रक्षा बलों ने एक बयान में कहा कि इन खतरों के जवाब में आईडीएफ लेबनान में आतंकी ठिकानों पर हमला कर रहा है. इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तेल अवीव में बेन गुरियन हवाई अड्डे से आने-जाने वाली उड़ानों को निलंबित कर दिया गया है. आईडीएफ ने कहा कि हिज्बुल्लाह ने अभी लेबनान से इजरायली क्षेत्र की ओर 150 से अधिक गोले दागे हैं, जिन्हें रोकने का प्रयास किया गया है.
भारतीय डाक द्वारा दीन दयाल स्पर्श योजना से विद्यार्थियों के बीच डाक टिकट संग्रह में रुचि पैदा होगी : पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव
'दीन दयाल स्पर्श योजना' छात्रवृत्ति कार्यक्रम में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 सितंबर, 2024 है
नई दिल्ली | डाक टिकट संग्रह में रुचि रखने वाले शौकिया डाक टिकट संग्राहकों को जल्द ही प्रोत्साहन मिलेगा। भारतीय डाक विभाग ने डाक टिकट संग्रह को प्रोत्साहन देने और शिक्षा प्रणाली की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से, विद्यार्थियों के बीच डाक टिकट संग्रह के लिए रुचि पैदा करने के शौक के रूप में टिकटों के प्रति अभिरुचि और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक डाक टिकट छात्रवृत्ति कार्यक्रम दीन दयाल स्पर्श योजना शुरू की है। उत्तर गुजरात क्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि कक्षा 6 से 9 तक के उन मेधावी विद्यार्थियों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की छात्रवृत्ति देने का प्रस्ताव है, जिनका शैक्षणिक रिकॉर्ड अच्छा है और साथ ही जिन्होंने टिकट संग्रह को एक शौक के रूप में अपनाया है। इस छात्रवृत्ति योजना में लाभार्थियों के चयन के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 सितंबर, 2024 है।

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह छात्रवृत्ति अखिल भारतीय स्तर पर प्रदान की जाएगी और प्रत्येक डाक सर्कल कक्षा 6, 7, 8 और 9 के प्रत्येक 10 विद्यार्थियों को अधिकतम 40 छात्रवृत्तियां प्रदान करेगा। छात्रवृत्ति की राशि 500 रुपये प्रति माह की दर से 6000 रुपये प्रति वर्ष होगी, जो त्रैमासिक आधार पर प्रदान की जाएगी। पोस्टमास्टर जनरल यादव ने कहा कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र होने के लिए, व्यक्ति को भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्कूल का विद्यार्थी होना चाहिए। संबंधित स्कूल में एक डाक टिकट संग्रह क्लब होना चाहिए और प्रत्याशी को क्लब का सदस्य होना चाहिए। यदि किसी स्कूल में डाक टिकट संग्रह क्लब नहीं है, तो उस स्कूल के किसी विद्यार्थी के नाम पर भी विचार किया जा सकता है, जिसके पास अपना खुद का डाक टिकट संग्रह का जमा खाता है। डाकघरों में डाक टिकट संग्रह जमा खाता केवल 200 रुपये की राशि से खोला जा सकता है। छात्रवृत्ति के लिए चयन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्याशी ने अपनी अंतिम परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड/कुल अंक प्राप्त किए हों। अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) उम्मीदवारों के लिए 5 प्रतिशत की छूट होगी।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि छात्रवृत्ति के लिए चयन 30 सितंबर को मंडल स्तर पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्नों की डाक टिकट संग्रह लिखित प्रश्नोत्तरी में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। इस प्रश्नोत्तरी में मंडल स्तर पर चयनित विद्यार्थियों को अंतिम चयन के लिए नवंबर, 2024 के पहले सप्ताह तक डाक टिकट संग्रह प्रोजेक्ट संबंधित मंडल में जमा करना होगा। इसके लिए मंडल स्तर पर डाक अधिकारियों और प्रतिष्ठित डाक टिकट संग्राहकों की एक समिति भी गठित की जाएगी। चयनित विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के साथ डाकघर या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में एक संयुक्त खाता खोलना होगा।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इस छात्रवृत्ति का उद्देश्य बच्चों में छोटी उम्र से ही डाक टिकट संग्रह का शौक इस तरह विकसित करना है कि यह उन्हें दिलचस्प काम, आरामदायक अनुभव और तनाव मुक्त जीवन भी प्रदान करे, क्योंकि डाक टिकट संग्रह भी शिक्षाप्रद सिद्ध होते हैं।