नईदिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा गंगा नदी पुनरुद्धार के लिए एकीकृत और व्यापक ड्रेन मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और स्मार्ट एसटीपी निगरानी तंत्र के माध्यम से नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी संचालित पहल की जा रही है प्रौद्योगिकी आधारित नदी पुनरुद्धार कार्य को गति प्रदान करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में अधिकार संपन्न कार्य समूह-ईटीएफ की 17वीं बैठक हुई। बैठक में नमामि गंगा कार्यक्रम के तहत आंकडों पर आधारित निर्णय लेने तथा निगरानी तंत्र और अनुपालन ढांचे मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें जल निकासी मानचित्रण और सीवेज उपचार ढांचे की बेहतर निगरानी पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी तथा विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इनमें जल संसाधन सचिव वी एल कंथा राव, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव अशोक के के मीणा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-एनएमसीजी महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल, जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार गौरव मसालदन, एनएमसीजी के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक बृजेंद्र स्वरूप, तकनीकी कार्यकारी निदेशक अनूप कुमार श्रीवास्तव; प्रशासनिक कार्यकारी निदेशक एसपी वशिष्ठ, वित्त कार्यकारी निदेशक भास्कर दासगुप्ता, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक-उत्तर प्रदेश जोगिंदर सिंह, शहरी विकास प्रधान सचिव बिहार संदीप, पश्चिम बंगाल स्वच्छ गंगा राज्य मिशन की परियोजना निदेशक नंदिनी घोष, झारखंड के परियोजना निदेशक श्री सूरज तथा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में केन्द्र सरकार के विद्युत मंत्रालय, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
जल शक्ति मंत्री ने प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए वर्तमान वर्ष में प्रदूषण नियंत्रण की 15 अवसंरचना परियोजनाएं पूरी होने की सराहना की और इसे गंगा पुनरुद्धार के निरंतर प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहतर समन्वय, प्रभावी निगरानी और केन्द्रित कार्यान्वयन दर्शाता है, जिससे नदी के दीर्घकालिक पुनरुद्धार का मजबूत आधार तैयार हुआ है। इसमें उत्तर प्रदेश छह परियोजनाएं पूरी कर अग्रणी रहा, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल ने क्रमशः चार और तीन परियोजनाएं पूरी की। उत्तराखंड और दिल्ली ने भी एक-एक परियोजना पूर्ण की।
बैठक में उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल, पैलियो-चैनल आधारित एक्विफर मैपिंग जैसे नवीन और अनुसंधान-आधारित समाधान अपनाने, जैव उपचार और नवीन सीवरेज उपचार परियोजनाओं, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य संबंधित पहल पर जोर दिया गया। ये पहल संवहनीय और अनुकूल नदी प्रबंधन ढांचे के लिए आवश्यक हैं।
पाटिल ने सभी राज्यों को राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप उपचारित जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग नीति शीघ्रता से पूरी करने के निर्देश दिये। नीतिगत प्रावधानों, स्पष्ट निर्धारित लक्ष्यों और अनुकूल परिस्थिति निर्मित कर राज्यों में उपचारित जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
पाटिल ने उत्तर प्रदेश में गंगा नदी की जल निकासी प्रणाली (प्राकृतिक और मानव निर्मित) मानचित्रण और विश्लेषण मॉड्यूल तथा जियोटैग्ड वीडियोग्राफी के साथ जीआईएस-आधारित विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड विकसित करने हेतु हवाई सर्वेक्षण परियोजना के कार्यान्वयन प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नमामि गंगा परियोजना के अंतर्गत अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित समर्थन के लिए उन्नत भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के लिए इस पहल का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गंगा के मुख्य मार्ग पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन क्षमता के हवाई सर्वेक्षण पूरे हो गये हैं, जिससे सटीक भू-स्थानिक डेटासेट तैयार हुआ है। इन्हें 2डी और 3डी विज़ुअलाइज़ेशन क्षमता वाले लाइव जीआईएस-आधारित ड्रेन डैशबोर्ड में समेकित किया जा रहा है।