छत्तीसगढ़

यूट्यूबर दोस्त से मिलने 14 साल का बालक घर से गहने व पैसे लेकर भागा

रायपुर। अपने यूट्यूबर दोस्त से मिलने के लिए महाराष्ट्र के तिरोडा से एक 14 वर्षीय बालक ने घर छोड़ दिया। वह घर से चुपचाप गहने और नकदी लेकर कोलकाता के लिए रवाना हो गया। घरवालों को बिना बताए निकलने के पीछे लड़के का अपने माता-पिता से नाराज होना बताया। हालांकि, सफर के दौरान उसकी संदिग्ध हरकतों के चलते रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने उसे राजनांदगांव में पूछताछ के बाद उसके इरादों और घर से चोरी की गई संपत्ति का खुलासा हुआ।

राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर 1 पर तैनात आरपीएफ टीम, जिसमें प्रभारी निरीक्षक तरुणा साहू और अन्य अधिकारी शामिल थे, गाड़ी संख्या 18029 शालीमार एक्सप्रेस की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान उन्होंने एसी कोच के पास एक डरे-सहमे लड़के को देखा। आरपीएफ को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद उसे रोककर पूछताछ की गई। गोल-मोल जवाब देने के कारण लड़के को राजनांदगांव आरपीएफ पोस्ट लाया गया।

आरपीएफ द्वारा पूछताछ में पता चला कि नाबालिग गोंदिया से शालीमार एक्सप्रेस में कोलकाता जाने के लिए निकला था। उसके पास एक काले रंग का बैग था। जब बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें 54,500 रुपये नकद, लगभग 4,33,000 रुपये के सोने-चांदी के गहने और एक ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन मिला, जिसकी कीमत 13,000 रुपये थी. बैग में मौजूद संपत्ति की कुल कीमत लगभग 5 लाख रुपये आंकी गई। लड़के ने स्वीकार किया कि यह संपत्ति उसने अपने घर से चुराई थी।

नाबालिग ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपने माता-पिता से नाराज होकर गुस्से में घर छोड़कर निकल गया था। उसका इरादा कोलकाता जाकर अपने एक यूट्यूबर दोस्त से मिलने का था। उसने कोलकाता का टिकट पहले ही बुक करवा लिया था और गुस्से में घर से पैसे और गहने उठा लिए थे। उसकी मानसिक स्थिति और उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए आरपीएफ ने मामले को संवेदनशील तरीके से संभाला।

पूछताछ और संपत्ति के सत्यापन के बाद आरपीएफ ने लड़के के परिजनों को सूचना दी। उसके माता-पिता के राजनांदगांव पहुंचने पर नाबालिग को सुरक्षित रूप से उनके हवाले कर दिया गया। यह घटना एक ओर बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करती है, तो दूसरी ओर डिजिटल प्रभाव और सामाजिक संपर्क के प्रभाव को भी उजागर करती है। आरपीएफ की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से न केवल चोरी की घटना को रोका गया, बल्कि एक बच्चे को संभावित खतरों से भी बचाया जा सका।