छत्तीसगढ़

एनआईटी रायपुर में पाँचवें जनजातीय गौरव वर्ष का गरिमामय समापन, आदिवासी नायकों के योगदान को मिली नई पहचान

रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर ने  आज पाँचवें जनजातीय गौरव वर्ष के समापन सत्र का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया। कार्यक्रम में भारत की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर, सामाजिक योगदान तथा स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नायकों की भूमिका को विशेष रूप से स्मरण किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे, जिससे परिसर में उत्साह और सम्मान का माहौल रहा।

समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ जनजातीय पारंपरिक स्वास्थ्य एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष, विकास मरकाम थे। मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरांगे ने उपस्थित जनों को संबोधित किया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी, कुलसचिव डॉ. एन. डी. लोंढे, तथा वरिष्ठ संकाय सदस्य—अनुराग जैन, डॉ. आशुतोष मंडावी, डॉ. मीना मुर्मू, डॉ. निशा नेताम, डॉ. सी. के. ठाकुर, डॉ. अनुज शुक्ला, डॉ. सी. जटोथ, डॉ. देबोराज मुचारे और डॉ. अनिल मांझी—कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद नृत्यम क्लब द्वारा आकर्षक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया गया। आदिवासी समुदायों के छात्रों ने भी छत्तीसगढ़ी आदिवासी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। स्वागत भाषण में डॉ. सुकेश्नी तिर्की ने भारत की आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपराओं और विरासत का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कुलसचिव डॉ. एन. डी. लोंढे ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले जनजातीय गौरव वर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को आदिवासी संस्कृति के सम्मान और संरक्षण के लिए प्रेरित किया। निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी ने कहा कि आदिवासी समुदायों के पास औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का अद्वितीय ज्ञान है, जिससे समाज को निरंतर लाभ मिलता रहा है। उन्होंने प्रकृति-सम्मत जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया और आयोजन समिति की सराहना की।

मुख्य वक्ता वैभव सुरांगे ने कहा कि भारत के कई ऐतिहासिक नगरों और क्षेत्रों के विकास की नींव आदिवासी शासकों ने रखी थी। उन्होंने वर्ष 2021 में भारत सरकार द्वारा 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किए जाने को आदिवासी गौरव के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने तिलका मांझी, वीर नारायण सिंह और अन्य आदिवासी नायकों के योगदान को याद किया।

मुख्य अतिथि विकास मरकाम ने कहा कि लम्बे समय तक आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएँ इतिहास के हाशिये पर रहीं, इसलिए जनजातीय गौरव वर्ष का आयोजन इन गुमनाम नायकों को उचित सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे नायकों की कहानियों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।

समारोह में अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त करने वाले आदिवासी छात्रों और जनजातीय गौरव वर्ष के अंतर्गत आयोजित प्रश्नोत्तरी, चित्रकला आदि प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. निशा नेताम के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।