छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय स्तर पर कृषि वैज्ञानिकों की बैठक.....कृषि अनुसंधान में उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. जे एस उरकुरकर का सम्मान

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में समन्वित कृषि प्रणाली पर अखिल भारतीय समन्वित कृषि अनुसंधान परियोजना की तीन दिवसीय वार्षिक समूह बैठक चल रही है।  इस समूह बैठक में इस परियोजना के अंतर्गत संचालित देश के 74 अनुसंधान केन्द्रों के कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए हैं। आयोजन के दूसरे दिन 29 जनवरी को उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली  एवं माननीय कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय रायपुर द्वारा डॉ. जे एस उरकुरकर पूर्व संचालक अनुसंधान को सम्मानित किया गया। उनको यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर की परियोजना में चीफ साइंटिस्ट के पद पर उनके द्वारा किए गए अनुसंधान कार्य के लिए दिया गया। बतादें कि डॉ. जे एस उरकुरकर महाराष्ट्र मंडळ रायपुर के आजीवन सभासद है। आयोजन के दौरान डॉ. जे एस उरकुरकर के अलावा दो अन्य चीफ साइंटिस्ट डॉ एमसी Bhambari और डॉ जीपी पाली को भी सम्मानित किया गया। 

वार्षिक समूह बैठक के शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. एसके चौधरी थे तथा अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। इस तीन दिवसीय वार्षिक समूह बैठक का आयोजन भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, मोदीपुरम, मेरठ) तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस बैठक में समन्वित कृषि प्रणाली परियोजना के अंतर्गत देश भर के विभिन्न केन्द्रों में संचालित अनुसंधान गतिविधियों, समन्वित कृषि प्रणाली के विभिन्न मॉडलों, चुनौतियों तथा संभावनाओं पर विचार-मंथन किया जाएगा तथा भविष्य हेतु रणनीति तैयार की जाएगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली आज के दौर में पूरे विश्व की आवश्यकता है और दुनिया के विभिन्न देशों में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली के माध्यम से कृषि के उपलब्ध संसाधनों का समुचित तथा प्रभावी उपयोग हो पाता है, उत्पादकता बढ़ती है तथा खेती की लागत कम होती है।   

कृषि विवि के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि कृषि एवं कृषकों के विकास के समन्वित कृषि प्रणाली एक बेहतरीन मॉडल है। इस प्रणाली के तहत किसान के पास उपलब्ध समस्त संसाधनों - मानव संसाधन, पशु संसाधन, यंत्र एवं उपकरण, बीज, खाद, उर्वरक, सिंचाई जल आदि का समुचित उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल को और अधिक सफल बनाने के लिए इसमें कृषि के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स आदि का भी उपयोग किया जाना चाहिए।