स्वर्ण जड़ित दसवें रथ में जमीन से निकले बालक का नाम पड़ा दशरथः अभिषेक बक्षी
- महाराष्ट्र मंडल में रामायण के पात्रों पर चर्चा
रायपुर। रामायण के पात्रों पर चर्चा होनी हो और राजा दशरथ का उल्लेख न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। राजा दशरथ के जन्म की अद्भुत कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा नवरात्र पर आयोजित रामायण के पात्रों की चर्चा में अभिषेक बक्षी ने प्रभु श्रीराम के पिता राजा दशरथ और रामायण के विशेष पात्र धोबी पर चर्चा की। उन्होंने राजा दशरथ के जन्म की कथा श्रोताओं को सुनाई।
अभिषेक बक्षी ने बताया कि एक बार राजा दशरथ के पिता राजा अज जंगल में भ्रमण करने के लिए गए थे, तो उन्हें एक बहुत ही सुंदर सरोवर दिखाई दिया उस सरोवर में एक कमल का फूल था जो अति सुंदर प्रतीत हो रहा था। उस कमल को प्राप्त करने के लिए राजा सरोवर में चले गए, किंतु यह क्या राजा अज जितना भी उस कमल के पास जाते वह कमल उनसे उतना ही दूर हो जाता और राजा अज उस कमल को नहीं पकड़ पाए। अंततः आकाशवाणी हुई कि हे राजन! आप नि:संतान हैं आप इस कमल के योग्य नहीं है।
इस भविष्यवाणी ने राजा अज के हृदय में एक भयंकर घात किया था। राजा अज अपने महल में लौट आए और चिंता ग्रस्त रहने लगे क्योंकि उन्हें संतान नहीं थी, जबकि वह भगवान शिव के परम भक्त थे। भगवान शिव ने उनकी इस चिंता को ध्यान में लिया। और उन्होंने धर्मराज को बुलाया और कहा कि तुम ब्राह्मण बनकर अयोध्या नगरी पहुंचो। एक दिन वे ब्राह्मण राजा अज के दरबार में गए और उनसे अपनी दुर्दशा का जिक्र कर भिक्षा मांगने लगे। राजा अज ने अपने खजाने में से उन्हें सोने की अशर्फियां देनी चाही, लेकिन ब्राह्मण नहीं कहते हुए मना कर दिया कि यह प्रजा का है आप अपने पास जो है, उसे दीजिए तब राजा अज ने अपने गले का हार उतारा और ब्राह्मण को देने लगे किंतु ब्राह्मण ने मना कर दिया कि यह भी प्रजा की ही संपत्ति है।
इस प्रकार राजा अज को बड़ा दुख हुआ कि आज एक गरीब ब्राह्मण उनके दरबार से खाली हाथ जा रहा है तब राजा अज शाम को एक मजदूर का वेष बनाते हैं और नगर में किसी काम के लिए निकल जाते हैं। चलते-चलते वह एक लौहार के यहाँ पहुंचते हैं और अपना परिचय बिना बताए ही वहां विनय कर काम करने लग जाते हैं पूरी रात को हथौड़े से लोहे का काम करते हैं, जिसके बदले में उन्हें सुबह एक टका मिलता है।
राजा एक टका लेकर ब्राह्मण के घर पहुंचते हैं, लेकिन वहां ब्राह्मण नहीं था। उन्होंने वह एक टका ब्राह्मण की पत्नी को दे दिया और कहा कि इसे ब्राह्मण को दे देना। जब ब्राह्मण आया तो ब्राह्मण की पत्नी ने वह टका ब्राह्मण को दिया और ब्राह्मण ने उस टका को जमीन पर फेंक दिया तभी एक आश्चर्यजनक घटना हुई ब्राह्मण ने जहां टका फेंका था वहां गड्ढा हो गया ब्राह्मण ने उस गढ्ढे को और खोदा तो उसमें से सोने का एक रथ निकला तथा आसमान में चला गया इसके पश्चात ब्राह्मण ने और खोदा तो दूसरा सोने का रथ निकला और आसमान की तरफ चला गया इसी प्रकार से, नौ सोने के रथ निकले और आसमान की तरफ चले गए और जब दसवाँ रथ निकला तो उस पर एक बालक था और वह रथ जमीन पर आकर ठहर गया।
ब्राह्मण उस बालक को लेकर राजा अज के दरबार में पहुंचे और कहा राजन, इस पुत्र को स्वीकार कीजिए, यह आपका ही पुत्र है, जो एक टका से उत्पन्न हुआ है। इसके साथ में सोने के नौ रथ निकले जो आसमान में चले गए, जबकि यह बालक दसवें रथ पर निकला, इसलिए यह रथ तथा पुत्र आपका है। इस प्रकार से दशरथ जी का जन्म हुआ था। अभिषेक बक्षी ने धोबी पर चर्चा करते हुए कहा कि रामायण में धोबी का पात्र हमें किसी भी काम को करने के पहले सोचने और उसे समझने की सलाह देते है। दूसरे के कहने पर न चलें, स्वयं निर्णय लें।