दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल में शिवाजी महाराज की उपलब्धियों पर चर्चा.... सभासदों ने की छत्रपति शिवाजी की महाआरती

रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज का प्राथमिक लक्ष्य मराठा लोगों के लिए ‘स्वराज’ या स्वशासन स्थापित करना था, ताकि वे बाहरी वर्चस्व से मुक्त हो सकें। उन्होंने आदिल शाही, कुतुब शाही, सल्तनत और मुगल साम्राज्य के प्रभुत्व को सफलतापूर्वक चुनौती दी और वास्‍तव में दक्कन क्षेत्र के मध्य में एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की। इस आशय के विचार महाराष्‍ट्र मंडल में आयोजित छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती के मौके पर अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने व्यक्त किए।
 
मंडल की युवा समिति के सौजन्‍य से प्रतिमाह शिवाजी महाराज की महाआरती की जाती है। इसमें न केवल बड़ी संख्‍या में महाराष्‍ट्र मंडल के सभासद जुटते हैं, बल्कि आरती की थाल लेकर स्‍वयं भी महाआरती में सहभागिता निभाते हैं। तत्‍पश्‍चात उपस्थित जनों को महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। शिवाजी महाराज की मासिक महाआरती के बाद कई वरिष्ठ सदस्‍य अपने संबोधनों में शिवाजी महाराज के संदर्भ में ऐसी- ऐसी जानकारी देते हैं, जिनके बारे में आमजनों को या तो जानकारी ही नहीं होती या आधी- अधूरी जानकारी होती है। अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में काले ने कहा कि शिवाजी महाराज ने न सिर्फ मुगल साम्राज्‍य के वर्चस्‍व को चुनौती दी बल्कि वे लगातार युद्धों की सफलताओं के साथ अपने राज्य के क्षेत्र का काफी विस्तार किया। इसमें वर्तमान महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से भी शामिल थे।
 
युवा समिति की प्रमुख शुचिता देशमुख ने बताया कि शिवाजी महाराज ने तटीय क्षेत्रों और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए नौसेना शक्ति का निर्माण किया। उन्होंने एक मजबूत नौसेना बेड़ा विकसित किया, जिसने तटीय किलों को सुरक्षित रखने और दुश्मन के व्यापार मार्गों को रोकने का काम किया। शिवराया के इस दृष्टिकोण पर चर्चा करें, तो उनकी यह सोच चौंकाने वाली तो थी ही, साथ ही अद्भुत भी थी। शिवाजी महाराज ने पुर्तगालियों, जंजीरा के सिद्धियों और अन्य तटीय शक्तियों के खिलाफ सफल नौसैनिक अभियान चलाया और अपने नौसैनिक गठित करने को ऐतिहासिक भी सिद्ध किया। इससे अरब सागर में मराठा प्रभुत्व स्थापित हुआ। 
 
शुचिता ने कहा कि शिवाजी महाराज ने समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने और नौसैनिक आक्रमणों से बचाव के लिए सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे कई तटीय किलों की किलेबंदी की। उन्‍होंने कुशल शासन के उद्देश्य से कई प्रशासनिक सुधार किए। साथ ही राजस्व संग्रह की एक ऐसी प्रणाली लागू की, जो निष्पक्ष और कुशल थी। इस प्रणाली से उनके राज्य के अंदर आर्थिक स्थिरता भी आई।
 
युवा समिति की रीना बाबर ने अपने संक्षिप्‍त संबोधन में कहा कि शिवाजी महाराज ने न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित न्यायिक प्रणाली की स्थापना की। इसमें निष्पक्ष रूप से न्याय करने वाले न्यायाधीश नियुक्त किए। शिवाजी ने अपने राज्य के अंदर कई समुदायों के बीच सद्भाव को बनाए रखते हुए धार्मिक सहिष्णुता और विविधता को उजागर किया। शिवाजी ने अपने शासन के तहत हिंदुओं, मुसलमानों और अन्य धार्मिक समूहों के अधिकारों और हितों की रक्षा की। 
 
इस मौके पर वरिष्ठ रंगसाधक अनिल श्रीराम कालेले, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, मंडल भवन प्रभारी निरंजन पंडित, शचिंद्र देशमुख, विनोद राखुंडे, रितेश बाबर, रीना बाबर, उरूग्य देशमुख, अमोघ बाबर सहित अनेक सभासद उपस्थित रहे।