दिव्य महाराष्ट्र मंडल

तीन दिवसीय रंग संस्कार महोत्सव में नजर आएंगे कला के विविध रंग

- राजधानी रायपुर में 16 से 18 मई तक होगा आयोजन

- रंग मंदिर गांधी मैदान में होगी आयोजन.. शामिल होंगे सीएम साय

- समापन समारोह में आएंगे मुंबई से फिल्म कलाकार मनोज जोशी

रायपुर। रंग साधक अशोक चंद्राकर की स्मृति में संस्कार भारती छत्तीसगढ़ द्वारा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के सहयोग से तीन दिवसीय रंग संस्कार महोत्सव का आयोजन रंग मंदिर सिटी कोतवाली में 16 से 18 मई तक किया जा रहा है। इस अवसर पर पुण्यश्लोका अहिल्या बाई होल्कर की त्रिशताब्दी जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है।

संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रिखी क्षत्रीय ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ 16 मई को शाम 6 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य, पद्मश्री अनुज शर्मा की अध्यक्षता में होगा। शुभारंभ अवसर पर शहीद वीर नारायण सिंह लोकगाथा पर छत्तीसगढ़ी नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। जिसके निर्देश संत फरिकार है। वीं पटकथा, संवाद और गीत राकेश तिवारी के है। 

संस्कार भारती रायपुर महानगर अध्यक्ष शशांक शर्मा ने बताया कि 17 मई को स्मृति दिवस का कार्यक्रम शाम 6 बजे होगा। कार्यक्रम  के मुख्य अतिथि आरंग विधायक अजय चंद्राकर होंगे। अध्यक्षता छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल करेंगे। जिसके उपरांत शाम 7 बजे से भरत मिलाप-कुटुंब प्रबोधन नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। जिसका निर्देश किशोर वैभव ने किया है। जिसमें एक नाटक की तैयारी के दौरान उपजी गलतफहमियों को दर्शाया गया है। वहीं इसके उपरांत नाटक लांछन का मंचन होगा। जो मुंशी प्रेमचंद के रचना पर आधारित है। जिसका निर्देशन अर्पिता बेडेकर ने किया है। इन नाटक में स्त्री के स्वभाव और मनोदशा देखने को मिलेगी।

आयोजन का समापन 18 मई को शाम 6.30 बजे से पद्मश्री और मुंबई के फिल्मी कलाकार मनोज जोशी के मुख्य आतिथ्य और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में होगा। रविवार को संस्कार भारती के चयनित कवियों द्वारा रचित काव्य रचना जो पुण्य श्लोक राजमाता अहिल्या बाई होल्कर पर आधारित है, उस पर नाटक पेइंग गेस्ट का मंचन किया जाएगा। यह नाटक महेंद्र आर्य की कहानी का नाट्य रूपांतरण है। जिसका निर्देशन आचार्य रंजन मोड़क ने किया है। यह नाटक मध्यमवर्गीय परिवार के जीवन को दर्शाता है। खट्टे मीठे संवादों के ताने बाने में बुनी एक कहानी जो कहीं न कहीं हमारे आसपास घटित होती है।