महाराष्ट्र मंडल के सहयोग से डाक विभाग ने बच्चों के लिए बनाई लघु फिल्म
2025-05-15 09:47 PM
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- कुमुद लाड, अपर्णा आठले के साथ संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चों ने किया अभिनय
रायपुर। भारतीय डाक टिकट सिर्फ पत्रों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने का आधार ही नहीं होते, बल्कि ज्ञान का खजाना भी होते हैं। यदि छोटी उम्र से ही बच्चे डाक टिकट संग्रहण की आदत डाल लें, तो इससे उनके सामान्य ज्ञान में भी अकल्पनीय वृद्धि होगी। कुछ इसी थीम पर छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल ने 10 मिनट की प्रेरक लघु फिल्म महाराष्ट्र मंडल के सहयोग से बनाई गई है।
‘स्टाम्प वाली दादी’ नाम की लघु फिल्म के एक सीन में दादी कुमुद लाड बच्चों से कहती हैं कि डाक टिकट संग्रहण के माध्यम से हम अपने स्वतंत्रता आंदोलन को जान सकते हैं, भारत की इमारतें, भारत के राष्ट्रपति, खेलों, धार्मिक त्योहारों, वन्य- वनस्पत्ति, कला, संस्कृति, साहित्य, महापुरुषों, जन जीवन, भारत की वस्त्र परंपरा जैसी तमाम जानकारियां हासिल कर सकते हैं। साथ ही अपने सामान्य ज्ञान में वृद्धि भी कर सकते हैं।
लघु फिल्म में लाड बच्चों के सवालों का जवाब देते हुए बताती हैं कि आप स्थानीय मुख्य डाकघर में फिलेटेली ब्यूरो में जाकर महज 200 रुपये के साथ फार्म भरकर जमा करने मात्र से फिलेटेली ब्यूरो के सदस्य बन सकते हैं। ऐसा करने से जब भी विभाग की ओर से डाक साहित्य जारी की जाएगी, तो वो आपके घर के पते पर पहुंचा दी जाएगी।
कुमुद लाड ने बताया कि स्कूल के छठवीं से नौंवी कक्षा तक के बच्चे फिलेटेली ब्यूरो के सदस्य बनकर अपना एक अलग फिलेटेली क्लब बना सकते हैं। इसमें प्रत्येक सदस्य एक-एक एल्बम लेकर उसमें डाक टिकट संग्रहण शुरू करें। साथ ही एक विशेष नोट बुक में संग्रहित एक- एक डाक टिकट की विस्तृत जानकारी लिखते चले। कुछ ही समय में डाक टिकटों का यह संग्रहण ज्ञान के किसी खजाने से कम नहीं होगा।
लघु फिल्म में एक बच्चे के सवाल पर कुमुद बताती हैं कि डाक टिकट संग्रहण के आधार पर आप डाक विभाग की दीनदयाल स्पर्श योजना में शामिल हो सकते हैं। इसमें सबसे पहले एक प्रश्नोत्तरी का सेगमेंट होता है। इसमें पास होने पर आपको डाक विभाग की ओर से प्रोजेक्ट बनाने कहा जाता है, जो डाक टिकट और भारत के त्योहार, डाक टिकट और भारत की इमारतें, भारत की वस्त्र परंपरा जैसे विषयों पर ये प्रोजेक्ट होते हैं। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को छह हजार रुपये छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। वैसे भी स्पर्श योजना (स्पर्धा) के नगर स्तरीय विजेता को 15 हजार रुपये इनाम स्वरूप दिए जाते हैं। इसी तरह राज्य स्तरीय विजेता को 25 हजार और राष्ट्रीय विजेता को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। इस योजना के माध्यम से एक राष्ट्रीय विजेता को विश्व के सबसे बडे़ डाक टिकट संग्रहालय को देखने का अवसर भी मिलता है।
लघु फिल्म में महाराष्ट्र मंडल की साहित्यिक समिति की प्रभारी कुमुद लाड स्टाम्प वाली दादी की भूमिका में हैं। प्राचार्य मनीष गोवर्धन के सहयोग से शिक्षिकाओं अपर्णा आठले, तृप्ति अग्निहोत्री व छात्राएं अनुषा, गार्गी सहित 15 विद्यार्थियों ने लघु फिल्म में बेहतर काम किया है। इस दौरान उन्होंने डाक टिकट से अध्ययन करने की महत्ता को समझा भी। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल सहित विभिन्न स्थलों पर फिल्मायी गई इस लघु फिल्म में छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल रायपुर के सोशल मीडिया टीम के प्रभारी गीतेश साहू, जयंत मंडल, विनय कुमार का विशेष सहयोग रहा।