सीजी बोर्ड में ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न अधिक इसलिए प्रतियोगी परीक्षा के लिए मिलता है अधिक समय
2025-05-16 04:07 PM
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रायपुर। आज हम और यह समाज अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी और उत्तम शिक्षा देना चाहते है। सभी अपनी स्थिति के अनुसार बच्चों को सीजी, सीबीएसई और आईसीएससी बोर्ड में दाखिला कराते है, ताकि बच्चों का भविष्य उज्जवल बने। कुछ लोगों को लगता है कि आज की पीढ़ी को सीबीएसई या आईसीएससी बोर्ड की परीक्षा देनी चाहिए। लेकिन हम आपको बताना चाहते है कि सीजी बोर्ड़ में भी एनसीईआरटी की ही पुस्तकें चलती है। यानी सीबीएसई और सीजी बोर्ड के बच्चों लगभग समान पाठ्यक्रम की पुस्तकें पढ़ते है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में सीजी बोर्ड द्वारा संबंद्धित है। यहां के बच्चे हर साल बोर्ड की प्रावीण्य सूची में अपना स्थान सुनिश्चित करते है। इस वर्ष 2025 के परिणाम में तीन बच्चों ने मैरिट सूची में अपना स्थान बनाया।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि सीजी बोर्ड स्थानीय भाषा को प्रमुखता देता जो विद्यार्थियों को समझने में आसान है। सीजी बोर्ड अपेक्षाकृत आसान है, इसमें ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न पूछे जाते है, जिससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी का समय मिल जाता है। सीजी बोर्ड विद्यालयों की फीस काफी कम होती है। वहीं आरटीई के तहत बहुत से बच्चों को आसानी से प्रवेश मिल जाता है।
मनीष गोवर्धन ने आगे बताया कि सीजी बोर्ड के स्कूलों में स्थानीय शिक्षकों के कारण विद्यार्थी व शिक्षक के बीच अच्छा समन्वय स्थापित होता है। बोर्ड में खिलाड़ियों को विशेष अंक मिलने के कारण खेलों में भी रुचि बनी रहती है। सीजी बोर्ड की भाषा व सरलता के कारण विद्यार्थी परीक्षा में अच्छा अंक प्राप्त करते हैं जो उन्हें भविष्य में उन्नति के लिए सहायक होता है।