दिव्य महाराष्ट्र मंडल

जब भी समस्‍याओं से घिरे हों, सावरकर को पढें, आपको अपनी समस्‍या मामूली लगेगी: काले

0- महाराष्‍ट्र मंडल में आयोजित स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जयंती समारोह में घोषणाएं, मांग भी

रायपुर। जब भी आप जीवन में बहुत समस्‍याग्रसत हों, तनावग्रस्‍त हों, बड़ी मुसीबत में हो, तो वीर सावरकर को जरूर पढें, आपको अपनी समस्‍या मामूली लगेगी। स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन में अनंत समस्‍याएं थीं, कई गंभीर संकट थे, फिर भी वे कभी देशसेवा से मार्ग से नहीं डिगे। सावरकर हमें जीवन कैसे जीना चाहिए, सिखाते हैं। इस आशय के विचार महाराष्‍ट्र मंडल के अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने वीर सावरकर जयंती पर अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में व्‍यक्‍त किए।
काले ने स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा आयुर्वेदिक कॉलेज गेट के समीप लैंडस्‍केप वाले स्‍थान पर लगाने की मंजूरी देने की मांग की महापौर मीनल चौबे से की है। इससे पहले मंडल ने वीर सावरकर की आदमकद प्रतिमा आयुर्वेदिक कॉलेज गेट के समीप लगाने के लि‍ए छत्‍तीसगढ़ शासन के संस्‍कृति विभाग को ज्ञापन सौंपा है। काले ने कहा कि यदि रायपुर में वीर सावरकर प्रतिमा प्रतिष्ठित की जाती है, तो महाराष्‍ट्र मंडल उक्‍त प्रतिमा का रखरखाव करेगा। इस तरह मंडल हर साल राष्‍ट्र सेवा में उल्‍लेखनीय कार्य करने वाले छत्तीसगढ़ निवासी व्‍यक्ति का 31 हजार रुपये सम्‍मान राशि के साथ अभिनंदन करेगा।
मंडल अध्‍यक्ष ने बताया कि हमने राष्‍ट्रपति द्रोपदी मुर्मुरू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन प्रेषित कर स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्‍न सम्‍मान देने की मांग की है। इससे पहले भी महाराष्‍ट्र मंडल इस आशय की मांग कर चुका है। काले ने मांग की कि युवाओं में राष्‍ट्रप्रेम की भावना जागृत करने के लिए छत्‍तीसगढ़ शासन को सौ-सौ नौजवानों के बैच बनाकर उन्‍हें पोर्टब्‍लेयर अंडमान स्थित सेल्यूलर जेल का भ्रमण कराना चाहिए। इससे वे वीर सावरकर के संदर्भ में फैलाई जा रही अफवाहों से न केवल सतर्क व जागरूक रहेंगे, बल्कि इस तरह के कुत्सित प्रयासों का विरोध करना भी सीखेंगे।
मंडल अध्‍यक्ष ने कहा कि हमने मुख्‍यमंत्री विष्‍णु देव साय से चर्चा कर व उन्‍हें ज्ञापन सौंपकर स्‍कूली पाठ्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज, पुण्‍यश्‍लोका लोकमाता अहिल्‍या बाई होलकर और स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी की है। हमें यह बताते हुए प्रसन्‍नता हो रही है कि छत्‍तीसगढ़ शासन ने कक्षा सातवीं में लोकमाता अहिल्‍या बाई के अध्‍याय को शामिल कर लिया है। 
 
 
मुख्‍य अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि वीर सावरकर के जीवन को चाहे आप पढ़े और या श्रवण करें, हमको एक ही बात समझ में आती है कि जीवन में कितनी ही मुश्किलें आएं, कठिन परिस्थितियां क्‍यों न आए, आपको धैर्य नहीं खोना है। जीवन में चुनौतियों के आगे घुटने टेक कर अपनी ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहिए। अंडमार निकोबार की जेल में भी सावरकर ने धैर्य नहीं खोया और वीर शिवाजी की बातों को लक्ष्य मानकर देश की आजादी व स्‍वाभिमान के लिए संघर्ष किया। इसी का परिणाम है कि आज हम हिंद स्वराज के आनंद में महाराष्ट्र मंडल की पावन धरा में बैठे हैं।
इससे पहले विशेष अतिथि कपिल नारायण अग्रवाल ने अपनी कविता के माध्‍यम से विद्यार्थी, युवा, व्‍यवसायी, गृहिणी, अधिवक्‍ता सहित समाज के विभिन्‍न वर्गों के प्रतिनिधियों के माध्‍यम से वीर सावरकर के संदर्भ में स्‍वरचित कविता से देशप्रेम की भावना जागृत की। विशेष अतिथि उदयभान सिंह चौहान ने वीर सावरकर के जीवन प्रसंगों से अपने जीवन को और भी देश के लिए सेवाभावी बनाने का आह्रवान किया।
इस मौके पर सीजी बोर्ड की दसवीं व बारहवीं की मेरिट लिस्‍ट में शामिल होने वाली तीन छात्राओं पूर्वी साहू, वर्षा परिडा और रुचिका साहू को उनके अभिभावकों के हाथों से ही मैडल, प्रमाणपत्र सहित 10-10 हजार रुपये की नगद राशि देकर सम्‍मानित किया गया। वहीं वीर सावरकर पर दो वर्गों में आयोजित निबंध स्‍पर्धा के विजेताओं को भी नकद राशि के अलावा प्रमाण पत्र और स्‍मृति चिह्रन देकर पुरस्‍कृत किया गया। निबंध स्‍पर्धा में पुरस्‍कृत किए गए विजेता 60 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम मुकुन्द श्रीधर शिलेदार, द्वितीय भोपाल की शोभा भिसे रहीं। इसी क्रम में 60 से कम आयु वर्ग में आराधना लाल विजेता और दुर्ग के हमंत सगदेव उपविजेता रहे। 23 से 26 मई को हैदराबाद में आयोजित इंटरनेशनल रिंग फाइट चैंपियनशिप में छह स्‍वर्ण, एक रजत और दो कांस्‍य पदक जीतने वाले नौ सदस्‍यीय टीम के खिलाड़ियों को उनके अभिभावकों के हाथों से तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्‍मानित किया गया।