दिव्य महाराष्ट्र मंडल

प्रति वर्ष 8 हजार बहुएं हो रही दहेज मृत्यु की शिकारः शताब्दी पांडेय

- महिलाएं अब्यूस हो रही हो तो जरूर करें प्रतिकारः डा. वर्षा वरवंडकर

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की परिवार परामर्श समिति द्वारा बुधवार, 28 मई  को महराष्ट्र मंडल में महाराष्ट्र पुणे में घटित वैष्णवी आत्महत्या केस के प्रकाश में वैचारिक जागरूकता की दृष्टि से परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्या में मेंटर की भूमिका निभा रही परामर्श समिति की शताब्दी पांडेय ने कहा कि दहेज की मांग आज भी समाज में किसी ना किसी रूप में व्याप्त है, इसका सीधा संबंध मनुष्य की लालची प्रवृत्ति से है। आंकड़े बताते है कि आज भी प्रतिवर्ष 8000 बहुएं दहेज मृत्य की शिकार होती है।

शताब्दी पांडेय ने आगे कहा कि दहेज के लोभी अपनी बहू पर अत्याचार करते है और दिन पर दिन धनराशि और वस्तुओं की मांग करते हैं। ना देने पर शारीरिक प्रताड़ना मारपीट करते हैं अपनी बेटी के जीवन को देखते हुए माता-पिता ये मांगे पूरी करते रहते हैं। माता-पिता द्वारा ससुराल पक्ष की मांगे पूरी करना भी अपने आप में अपराध है। बतादें कि विगत 16 मई को महाराष्ट्र के पुणे में एक संभ्रांत परिवार में वैष्णवी की मृत्यु हो जाती है।

परिचर्चा में काउंसलर डॉ वर्षा वरवंडकर ने कहा कि सबसे पहले माता-पिता को अपना नजरिया बदलना होगा। अगर आपकी बेटी के साथ ससुराल में कुछ गलत हो रहा है तो तुरंत उसका प्रतिकार करें। बेटी की गृहस्थी बचाने की जगह अपनी बेटी के आत्मसम्मान और जिंदगी को बचाये। पुणे का वैष्णवी आत्महत्या केस  प्रेम विवाह का है लड़की निर्णय लेने में समर्थ थी। लेकिन लोग क्या कहेंगे उस कारण वो रिवर्स निर्णय नहीं ले पाई। जिंदगी में हमेशा यू टर्न रहता है। निर्णय लेने की कला सीखनी होगी।

डॉ वर्षा ने आगे कहा कि प्रेमी से पति बनने का सफर अलग रहता है। जब आपका जोड़ीदार आपकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है तो कम्युनिकेट कीजिए। समझौता व्यवहार में होता है लेकिन जब अब्यूस हो रहा हो तो प्रतिकार कीजिए। लड़कियों को जागरूक बनाना चाहिए, कानून की फाइनेंस की जानकारी होनी चाहिए। लड़कियों को भी शादी में फालतू खर्चे और दहेज के लिए खुद मना करना होगा।

एडवोकेट मनीषा भंडारकर ने कहा कि आज कल ज्यादातर युवा प्रेम विवाह कर रहे हैं, बिना सोचे समझे किए गए विवाह में आने वाली परेशानियों को सहते रहते है। गुस्सा किसी भी व्यक्ति का क्षणिक होता है। यदि पीड़िताएं किसी भी प्रकार की सहायता चाहती है तो हमारी परामर्श समिति की ओर से निःशुल्क कानूनी सहायता दी जाएगी।

परामर्श समिति की डॉ मंजरी बख्शी ने जन जागरूकता के कार्यक्रम अधिक से अधिक आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी प्रेम विवाह के मामले में मन के साथ बुद्धि का प्रयोग करें। महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता दलाल ने कहा कि एक जोडीदार ऐसा हो जो आपका समर्थन करें आपकी भावना को समझे और आपके साथ एक स्वस्थ सन्मानजनक संबंध रखे।

समिति की सदस्य शुभांगी रुद्रजवार ने कहा कि कोई भी पत्नी का सच्चा सुख सिर्फ बंगला, गाड़ी, गहने, पैसे से नहीं ,प्यार, इज्ज़त देने वाले समर्पित और निर्व्यसनी पति से होता है। शादी कर दी मतलब जिम्मेदारी से मुक्त हो गए ऐसा नहीं है। परामर्श समिति के ओपी कटारिया  ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए काउंसलिंग बहुत आवश्यक हो गई है।

काउंसलर शुभांगी आप्टे ने कहा कि दहेज की समस्या एक विकराल रूप में सामने आ रही है, जिस पर नियंत्रण लाना बहुत जरूरी है। अभी जो आए दिन हम घटनाएं सुनते है कहीं ना कहीं हम दोषी है। कई बार दोनों की आर्थिक परिस्थिति में बहुत अंतर होता है तो लड़की को तकलीफ ना हो ये सोचकर माता पिता धन और वस्तुएं देते है। एडवोकेट प्रियंका डोंगरे ने कहा कि आज कल के कुछ लड़के शादी को एक बिजनेस की तरह लेते हैं। इसलिए जब भी वह शादी करते हैं या दोस्ती करते हैं शादी के उद्देश्य से पहले लड़की का ब्रेक ग्राउंड उसकी सोच को पकड़ लेते हैं यदि उनको लगता है कि यह उनके लिए परफेक्ट है तो वह उसको अपने जाल में फंसाने के लिए सब तरीके के हथकंडे अपनाते हैं।